05 जुलाई 2020 चंद्रग्रहण: अगर ग्रहण के दुष्प्रभावों से चाहते हैं बचना, तो करें ये उपाय!

ग्रहण काल में बचना है दोष से, तो करें ये उपाय...

By: दीपेश तिवारी

Updated: 30 Jun 2020, 09:38 PM IST

05 जुलाई 2020 (5 July 2020) को इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण लगने वाला है। ये एक उपछाया ग्रहण होगा जो सुबह 08 बजकर 38 मिनट से 11 बजकर 21 मिनट तक (Chandra Grahan Kab hai रहेगा। उपच्छाया ग्रहण होने के कारण इसका प्रभाव भारत में बहुत कम रहेगा। वहीं यह ग्रहण अमेरिका, दक्षिण-पश्चिम यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्से में दिखाई देगा।

ज्योतिष में उपछाया ग्रहण को वास्तविक ग्रहण नहीं माना जाता है। इसमें चंद्रमा पृथ्वी की वास्तविक छाया के बजाय उसकी बाहरी छाया से ही होकर निकल जाता है। असल में उपच्छाया चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) उस ग्रहण को कहा जाता है जब सूरज और चांद के बीच पृथ्‍वी आती है।

इस भौगोलिक स्थि‍ति में ये तीनों एक सीध में नहीं होते हैं। इस दौरान पृथ्वी के बीच के हिस्से से पड़ने वाली छाया को अंब्र (Umbra) कहते हैं। तो वहीं चांद के बाकी हिस्‍से में पृथ्‍वी के बाहरी हिस्‍से की छाया पड़ती है, जिसे पिनम्‍ब्र या उपच्छाया (Penumbra) कहते हैं।

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गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण: सूतक काल मान्य नहीं होगा
5 जुलाई को पड़ने वाले इस चंद्रग्रहण के दिन गुरु पूर्णिमा 2020 (Guru Purnima 2020) भी है। इस ग्रहण काल में सूतक काल मान्य नहीं होगा। भारत में इसके न दिखने और असर न के बराबर होने के चलते सूतक काल अमान्य हो जाएगा।

ज्ञात हो कि ग्रहण में लगने वाला सूतक काल एक अशुभ समयावधि होती है। यह सूतक काल चंद्र ग्रहण लगने से तीन पहर (एक पहर 3 घंटे का) अर्थात 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है, जो ग्रहण समाप्ति के साथ ही खत्म होता है। इस दौरान कई शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है।

इस साल यानि 2020 में अभी ये ग्रहण और लगने हैं बाकि...
- चौथा ग्रहण : 5 जुलाई को लगेगा, चंद्र ग्रहण (वर्ष 2020 का तीसरा चंद्रग्रहण)।

- पांचवा ग्रहण : 30 नवंबर को लगेगा, चंद्र ग्रहण (वर्ष 2020 का चौथा चंद्रग्रहण)।

- छठा ग्रहण : 14 दिसंबर को लगेगा, सूर्य ग्रहण (वर्ष 2020 का दूसरा सूर्य ग्रहण)।

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चन्द्र ग्रहण पर ये पाठ, देंगे आपको उत्तम फल...
हिंदू पंचांग के अनुसार यह ग्रहण धनु राशि में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के दौरान, शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होगा। इसलिये धनु राशि के जातकों के जीवन में इस अवधि में कुछ बदलाव आ सकते हैं। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस ग्रहण काल के दौरान देवी मां दुर्गा के मंत्रों का या शिव चालीसा का पाठ करें साथ ही 'नम: शिवाय ऊं नम: शिवाय' के मंत्रों का जाप करें।

क्या करें इस समय...
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार आप शिव चालीसा के माध्यम से अपने सारे दुखों को भूला कर शिव की अपार कृपा प्राप्त कर सकते हैं। शिव पुराण के अनुसार शिव-शक्ति का संयोग ही परमात्मा है। शिव की जो पराशक्ति है उससे चित्‌ शक्ति प्रकट होती है। चित्‌ शक्ति से आनंद शक्ति का प्रादुर्भाव होता है, आनंद शक्ति से इच्छाशक्ति का उद्भव हुआ है।

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वहीं जानकारों के अनुसार चूकिं ग्रहण का काल अज्ञात शक्तियों व तांत्रिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, अत: ऐसे में भगवान शिव के मंत्र खास राहत प्रदान करते हैं।

दरअसल शिव चालीसा का पाठ करने से डर या भर से भी छुटकारा मिलता है। इसके लिए 'जय गणेश गिरीजा सुवन मंगल मूल सुजान, कहते अयोध्या दास तुम देउ अभय वरदान ' वाली लाइन पढ़ें।

हिन्दू धर्म में शिव चालीसा का खास महत्व है। शिव जी को प्रसन्न करने का यह सबसे सरल उपाय है, तो आइए हम आपको शिव चालीसा की महिमा के बारे में बताते हैं। हिन्दू धर्म में भक्त सरल भाषा में जो भगवान की प्रार्थना करता है उसे चालीसा कहते हैं। शिव चालीसा का चालीसा कहने के पीछे एक कारण यह भी है कि इसमें चालीस पंक्तियां हैं।

इस प्रकार लोकप्रिय शिव चालीसा का पाठ कर भक्त बहुत आसानी से अपने भगवान को प्रसन्न कर लेते हैं। शिव चालीसा के द्वारा आप अपने सभी दुख भूलकर शंकर भगवान की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह भक्त शिव जी को प्रसन्न कर अपनी मनोकामना पूरी कर लेते हैं।

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दीपेश तिवारी
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