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Daslakshan Parv 2022: आज से होगा दिगंबर जैन समाज का दसलक्षण पर्व प्रारंभ, जानिए क्या है इसका महत्व

जैन धर्म में दसलक्षण पर्व का बहुत ही महत्व है। इसे पर्यूषण पर्व के नाम से भी जानते हैं। इस साल दसलक्षण पर्व दिगम्बर जैन परंपरा में 31 अगस्त से 9 सितम्बर 2022 तक मनाया जाएगा।

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Daslakshan Parv 2022: आज से होगा दिगंबर जैन समाज का दसलक्षण पर्व प्रारंभ, जानिए क्या है इसका महत्व

Daslakshan Parv 2022: दिगंबर जैन समाज का दसलक्षण पर्व यानी पर्युषण पर्व की शुरुआत इस साल आज 31 अगस्त 2022 से हो रही है जो कि 9 सितंबर 2022 तक चलेगा। इस पर्व का जैन धर्म में काफी महत्व है। भाद्रपद मास में आने वाले दसलक्षण पर्व के दौरान जैन समाज के लोग अपना अधिकतम समय पूजा-अर्चना और व्रत-उपवास करके व्यतीत करते हैं। आइए जानते हैं क्या है इस पर्व का महत्व...

दसलक्षण पर्व का महत्व

जैन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पर्युषण यानी दसलक्षण पर्व विभिन्‍न धार्मिक क्रियाओं द्वारा आत्‍मशुद्धि करने और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाने का एक प्रयास है क्योंकि माना जाता है कि जब तक अशुभ कर्मों के बंधन से मनष्य नहीं छूटेगा तब तक मोक्ष की प्राप्ति नहीं की जा सकती है। यह जीवन में नया बदलाव लाने का पर्व है। जैन धर्म के अनुसार 10 दिनों के दसलक्षण पर्व के दौरान दस धर्मों जैसे उत्‍तम क्षमा, उत्‍तम मार्दव, उत्‍तम आर्जव, उत्‍तम शौच, उत्‍तम सत्‍य, उत्‍तम संयम, उत्‍तम तप, उत्‍तम त्‍याग, उत्‍तम आकिंचन एवं उत्‍तम ब्रह्मचर्य को धारण करने की प्रथा है। वहीं मान्यता है कि यह पर्युषण पर्व व्यक्ति को क्रोध, लालच, मोह-माया, ईर्ष्या, असंयम आदि विकारों से मुक्त होने की प्रेरणा देता है।

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