इस विजयादशमी सिद्ध कर लें रामायण की ये चौपाईयां, जरुर पूरी होगी मनोकामनाएं

इस विजयादशमी सिद्ध कर लें रामायण की ये चौपाईयां, जरुर पूरी होगी मनोकामनाएं

Tanvi Sharma | Updated: 03 Oct 2019, 03:27:21 PM (IST) धर्म

विजयदशमी के पावन पर्व पर रामचरितमानस की चौपाईयों में से किसी एक को मंत्र मानकर श्रद्धापूर्वक जपने से जरूर ही इच्छा पूरी होती है

हिंदू धर्म में रामचरितमानस का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। रामचरित मानस एक पवित्र ग्रंथ के साथ-साथ मानव जीवन के लिये भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। कई बार हमारे जीवन में कई ऐसी घटनाएं होती हैं जिनके कारण हम बहुत कमजोर पड़ जाते हैं और उसका सामना करने में हम कुछ सोच नहीं पाते। ऐसे में कभी कभी हमारे धर्म ग्रंथ हमारी मदद कर सकते हैं। जी हां, रमाचरित मानस में चौपाईयों की मदद से हम अपने जीवन की कठिनाईयों से आसानी से निकल सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे...

 

सिद्ध कर लें रामायण की ये चौपाईयां, पूरी होगी मनोकामनाएं

रमाचरित मानस में प्रभु श्री राम के संपूर्ण की जीवन से व्यक्तियों को कुछ ना कुछ सीख जरुर मिलती है। रामायण में चौपाईयां हमें सीख देने के साथ-साथ हमारे दुखों और कष्टों से निपटने का रास्ता भी दिखाती हैं। वहीं हर मनोकामना की पूर्ति भी करती हैं। विजयदशमी के पावन पर्व पर रामचरितमानस की चौपाईयों में से किसी एक को मंत्र मानकर श्रद्धापूर्वक जपने से जरूर ही इच्छा पूरी होती है।

 

सिद्ध कर लें रामायण की ये चौपाईयां, पूरी होगी मनोकामनाएं

ऐसे करें चौपाईयों को सिद्ध

रामचरित मानस के दोहे-चौपाईयों को सिद्ध करने के लिए दशहरे के दिन स्नान आदि कर स्वच्छ होने के बाद अष्टांग हवन के बाद चौपाईयां सिद्ध करें। इसके बाद जिस कार्य के लिये मानस का दिव्य मंत्र आप सिद्ध कर रहें हों, उसके लिए नित्य एक माला जप करें।

श्रीरामचरितमानस के सिद्ध मंत्र

मनोकामनाओं की पूर्ति के लिये-
भव भेषज रघुनाथ जसु,सुनहि जे नर अरू नारि।
तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहि त्रिसिरारि।।

संतान प्राप्ति के लिये-
प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बाल चरित कर गान।।

परीक्षा में सफलता पाने के लिये-
जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी॥
मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥

विवाह में आ रही समस्या के लिए-
तब जन पाई बसिष्ठ आयसु ब्याह। साज सँवारि कै।।
मांडवी, श्रुतकी, रति, उर्मिला कुँअरि लई हंकारि कै।।

संपत्ति की प्राप्ति के लिए
जे सकाम नर सुनहि जे गावहि। सुख संपत्ति नाना विधि पावहि।।

हर प्रकार के संकट दूर करने के लिए
दीनदयाल बिरिदु सम्भारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।

मुकदमा जीतने के लिए
पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना।।

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