17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Pradosh Vrat 2021: April का पहला प्रदोष व्रत शुक्रवार को? जानें शुभ मुहूर्त और भगवान शिव की पूजा विधि

सच्चे मन से व्रत रखने पर होती है मनचाही वस्तु की प्राप्ति...

3 min read
Google source verification
First Pradosh Vrat of April 2021 is on friday called shukra pradosh

First Pradosh Vrat of April 2021 is on friday called shukra pradosh

प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को त्रयोदशी होती है। प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी के व्रत को प्रदोष व्रत कहा जाता है। वहीं सूर्यास्त के बाद और रात्रि के आने से पहले का समय प्रदोष काल कहलाता है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त उपवास रखते हैं।

हिन्दू धर्म में व्रत, पूजा-पाठ, उपवास आदि को काफी महत्व दिया गया है। ऐसा माना जाता है कि सच्चे मन से व्रत रखने पर व्यक्ति को मनचाहे वस्तु की प्राप्ति होती है। वैसे तो हिन्दू धर्म में हर महीने की प्रत्येक तिथि को कोई न कोई व्रत या उपवास होते हैं, लेकिन इन सब में प्रदोष व्रत की बहुत मान्यता है।

वहीं इस बार हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी 09 अप्रैल, शुक्रवार को है। ऐसे में शुक्रवार के दिन पड़ने वाला यह प्रदोष शुक्र प्रदोष (कृष्ण) व्रत कहलाएगा। जबकि अप्रैल का दूसरा प्रदोष व्रत 24 अप्रैल, शनिवार यानि चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को है, जो शनिवार को होने की वजह से शनि प्रदोष (शुक्ल) कहलाएगा।

जानकारों के अनुसार प्रदोष व्रत को हिन्दू धर्म में बहुत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरी निष्ठा से भगवान शिव की अराधना करने से जातक के सारे कष्ट दूर होते हैं और मृत्यु के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार एक प्रदोष व्रत करने का फल दो गायों के दान जितना होता है।

09 अप्रैल को बन रहे ये शुभ मुहूर्त-

ब्रह्म मुहूर्त- 04:19 AM, अप्रैल 10 से 05:05 AM, अप्रैल 10 तक।
अभिजीत मुहूर्त- 11:45 AM से 12:36 PM तक।
विजय मुहूर्त- 02:17 PM से 03:07 PM तक।
गोधूलि मुहूर्त- 06:17 PM से 06:41 PM तक।
अमृत काल- 10:10 PM से 11:53 PM तक।
निशिता मुहूर्त- 11:47 PM से 12:32 AM, अप्रैल 10 तक।

ऐसे करें भगवान शिव की पूजा...
- शुक्र प्रदोष के दिन सूर्य उदय होने से पहले उठे

- नहा धोकर साफ हल्के सफेद या गुलाबी कपड़े पहनें

- सूर्य नारायण जी को तांबे के लोटे से जल में शक्कर डालकर अर्घ्य दें और अपने रोगों को खत्म करने की प्रार्थना सूर्य देव से करें।

- सारा दिन भगवान शिव के मन्त्र ॐ नमः शिवाय मन ही मन जाप करते रहे और निराहार रहें और जल का सेवन ज्यादा करें।

- शाम के समय प्रदोष काल मे भगवान शिव को पंचामृत (दूध दही घी शहद और शक्कर) से स्न्नान कराएं उसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर रोली मौली चावल धूप दीप से पूजन करें।

- साबुत चावल की खीर और फल भगवान शिव को अर्पण करें।

- वहीं आसन पर बैठकर नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय मंत्र 108 बार जपें और शिवपंचाक्षरी स्तोत्र का 5 बार पाठ करें और अपने रोगों को दूर करने की भोलेनाथ से प्रार्थना करें।

जानें: प्रदोष व्रत के दिन राहुकाल व भद्रा का समय-
राहुकाल- 10:36 AM से 12:10 PM तक।
यमगण्ड- 03:20 PM से 04:55 PM तक।
गुलिक काल 07:26 AM से 09:01 AM तक।
दुर्मुहूर्त- 08:23 AM से 09:13 AM तक।
वर्ज्य- 11:51 AM से 01:34 PM तक, इसके बाद 12:36 PM से 01:26 PM तक।
भद्रा- 04:27 AM, अप्रैल 10 से 05:50 AM, अप्रैल 10 तक।
पंचक- पूरे दिन।

शुक्र प्रदोष के खास उपाय...

- यदि शुक्र के कारण आपके दाम्पत्य जीवन में तनाव आ गया है, तो 11 लाल गुलाब के फूलों को गुलाबी धागे में पिरोए और पति पत्नी मिलकर शाम के समय भगवान शिव को नमः शिवाय 27 बार बोलकर अर्पण करें, माना जाता है कि ऐसा करने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है।

- जिस किसी को भी शुक्र से संबंधित कोई रोग हो तो वह सफेद चंदन में गंगाजल मिलाकर इसका लेप शुक्र प्रदोष के दिन शाम के समय शिवलिंग पर करें। मान्यता है कि ऐसा करने से रोग से मुक्ति मिलती है।

ये रखें शुक्र प्रदोष पर सावधानियां...

- घर में और घर के मंदिर में साफ सफाई करके ही पूजन करें।

- अपने घर पर आई हुई सभी स्त्रियों को मिठाई खिलाये और जल भी जरूर पिलाएं।

- अपने गुरु और पिता के साथ सम्मान पूर्वक बात करें।

- भगवान शिव की पूजा में काले गहरे रंग के वस्त्र न पहनें।

- सारे व्रत विधान में मन में किसी तरीके का गलत विचार ना आने दें।

- सारे व्रत विधान में अपने आप को भगवान शिव को समर्पण कर दें और जल का सेवन ज्यादा करें।