Puja Path: देवी मां दुर्गा का खास दिन होता है मंगलवार, जानें इस बार क्या है खास

सावन के मंगलवार अत्यंत विशेष

By: दीपेश तिवारी

Published: 02 Aug 2021, 08:17 PM IST

साप्ताहिक दिनों में जहां मंगलवार के कारक देव श्री हनुमान माने गए हैं। वहीं इस दिन शक्ति की देवी मां दुर्गा की पूजा का भी विधान है। मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धा भाव से देवी मां की पूजा करने पर भक्त की आध्यात्मिक व भौतिक कामनाएं पूर्ण होती हैं।

ऐसे में सावन के मंगलवार देवी माता की पूजा के लिए अत्यंत खास माने गए हैं। दरअसल एक ओर जहां सावन के मंगलवार मां मंगलागौरी देवी को अत्यंत प्रिय होने के चलते महिलाएं इस दिन मां मंगलागौरी का व्रत करती हैं। वहीं इस दिन मां दुर्गा भी जल्द प्रसन्न हो जाती हैं,ऐसे में कई पुरुष भक्त इस दिन देवी दुर्गा की आराधना करते हुए उनकी कृपा के पात्र बनते हैं।

ध्यान रहे केवल सावन के मंगलवार ही नहीं अपितु हर मंगलवार को देवी मां दुर्गा की पूजा खास मानी जाती है। लेकिन सावन के मंगलवार के दिन मां मंगलागौरी का दिन भी होने के कारण इसे दोनों माताओं (मां मंगलागौरी व मां दुर्गा) के लिए अत्यंत विशेष माना जाता है।

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यदि आप भी मंगलवार को माता दुर्गा की पूजा करते हैं तो इस दिन पूजन सामग्री में पंचमेवा, पंचमिठाई, रूई, कलावा, रोली, सिंदूर, गीला नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र, फूल, 5 सुपारी, लौंग, पान के पत्ते 5, गाय का घी, चौकी, कलश, आम का पल्लव, समिधा, कमल गट्टे, पंचामृत की थाली, कुशा, लाल चंदन, चंदन, जौ, तिल, सोलह श्रृंगार का सामान, गुडहल के फूल, लाल फूलों की माला होना अत्यंत विशेष माना जाता है।

देवी मां दुर्गा का ऐसे करें पूजन
देवी मा दुर्गा का पूजन करते समय सबसे पहले देवी मां के मंत्र: (सर्व मंगल मागंल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्येत्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥) का उच्चारण करते हुए मां दुर्गा का आवाहन करें।

फिर माता को आसन अर्पित करते हुए मंत्र: (श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:। आसानार्थे पुष्पाणि समर्पयामि॥) का उच्चारण करें।

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जबकि देवी मां दुर्गा को अर्घ्य अर्पित करते समय मंत्र: (श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:।
हस्तयो: अर्घ्यं समर्पयामि॥) का उच्चारण करें।

पंचामृत स्नान कराते समय
मंत्र: श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:।
पंचामृतस्नानं समर्पयामि॥

शुद्ध जल से स्नान कराते समय
मंत्र: श्रीजगदम्बायै दुर्गादेव्यै नम:।
शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि॥

इसके बाद देवी मां को आचमन कराएं, आचमन का मंत्र इस प्रकार है-
मंत्र :- शुद्धोदकस्नानान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि।

देवी मां दुर्गा को ये चीजें अर्पित करें-

- इसके तहत सबसे पहले वस्त्र फिर सौभाग्य सू़त्र इसके बाद क्रमश' चन्दन ,कुंकुम, आभूषण,पुष्पमाला, नैवेद्य प्रसाद, ऋतुफल अर्पित करने के बाद श्रद्धापूर्वक धूप-दीप से देवी माता की आरती करें।

देवी मां दुर्गा का इस विधि से आह्वान पूजन के बाद अपनी मनोकामना को देवी के सामने रख उसके पूर्ण होने की कामना करते हुए, इनसें से किसी भी एक मंत्र का जाप करें।

: ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते॥

: देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥

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: देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

: प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि।
त्रैलोक्यवासिनामीड्ये लोकानां वरदा भव॥

जानकारों व पंडितों के मुताबिक इस दिन मां दुर्गा के देवी सहस्त्रनाम का पाठ अवश्य करना चाहिए। देवी सहस्त्रनाम में देवी के एक हजार नाम हैं, बताया जाता है कि देवी सहस्त्रनाम का पाठ करते समय इन नामों से हवन करने का विधान भी है।

इसके तहत देवी के हर नाम के बाद नमः लगाकर स्वाहा लगाया जाता है। वहीं माना जाता है कि सहस्त्रनाम का पाठ करने से मिलने वाला फल भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन दुर्गा सप्तशती व दुर्गा चालीसा का भी पाठ भी बेहद खास माना जाता है।

दीपेश तिवारी
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