
शिव पुराण में कार्य, बात-व्यवहार और सोच द्वारा किए गए पापों के बारे में जानकारी दी गई है। कहा जाता है कि इस तरह के किये गए पापों को भगवान शिव कभी क्षमा नहीं करते। माना जाता है कि ऐसा व्यक्ति हमेशा ही शिव के कोप का भाजन होगा और कभी भी सुखी जीवन व्यतीत नहीं कर सकता।
आपने सुना होगा कि ऊपर वाले से कुछ भी छुपा नहीं है। यहां तक कि आप जो सोच रहे होते हैं, वह भी भगवान से छुपा नहीं है। इसलिए भले ही बात और व्यवहार में आपने किसी को नुकसान ना पहुंचाया हो, लेकिन अगर मन में किसी के प्रति कोई दुर्भावना है या अहित सोचा है तो यह भी पाप की श्रेणी में आता है।
आइये जानते हैं किस तरह के सोच पाप की श्रेणी में आता है...
दूसरों के पति या पत्नी पर बुरी नजर रखना या उसे पाने की इच्छा करना पाप की श्रेणी में आता है।
गुरु, माता-पिता, पत्नी या पूर्वजों का अपमान भी पाप की श्रेणी में आता है।
गुरु की पत्नी के साथ संबंध बनाना, दान की हुई चीजें वापस लेना महापाप माने जाते हैं।
दूसरों का धन अपना बनाने की चाह रखना भी अक्षम्य अपराध माना जाता है।
गलत तरीके से दूसरे की संपत्ति हड़पना भी पाप की श्रेणी में आता है।
ब्राह्मण या मंदिर की चीजें चुराना या गलत तरीके से हथियाने की कोशिश करना भी पाप की श्रेणी में आता है।
किसी भोलेभाले इंसान को कष्ट देना भी भगवान शिव की नजरों में पाप है।
अच्छी बातें भूलकर बुरी राह को चुनना भी पाप की श्रेणी में आता है।
किसी के बारे में बुरी सोच रखना भी पाप की श्रेणी में आता है।
Published on:
17 Feb 2020 12:27 pm
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