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सब पापों का नाश करता है माघी पूर्णिमा स्नान

माघ मास की पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

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हिंदू धर्म में माघ महीने का बहुत ही खास महत्व होता है। माना जाता है कि इस मास का हर दिन पवित्र होता है लेकिन पूर्णिमा का माहात्मय तो सभी दिनों से बढ़कर होता है। माघ मास की पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है।


स्नान का महत्व

माघी पूर्णिमा स्नान का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सभी देवी-देवता गंगा स्नान के लिये पृथ्वी पर आते हैं। मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन देवताओं के स्नान का अंतिम दिन होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के पश्चात अपने लोक वापस चले जाते हैं।


पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में दानवीर कर्ण को माता कुंती ने आज ही के दिन यानी पूर्णिमा के दिन ही जन्म दिया था और इसी दिन कुंती ने उन्हें नदी में प्रवाहित कर दिया था।


पापों से मिलती है मुक्ति

मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता है कि माघी पूर्णिमा से लेकर फाल्गुन मास के दूज तक स्नान करने से पूरे माघ मास स्नान करने के समान ही पुण्य की प्राप्ति होती है।


माघी पूर्णिमा व्रत का महत्व

माघ पूर्णिमा के दिन स्नान के साथ-साथ इस दिन व्रत उपवास रखने और दान पुण्य करने का भी बहुत महत्व है। मान्यता है कि माघी पूर्णिमा के दिन व्रत रखने से परिवार में सुख-समृद्धि में भी वृद्धि होती है। इसके अलावा मान्यता है कि माघी पूर्णिमा स्नान करने से विद्या की भी प्राप्ति होती है।

पूर्णिमा व्रत पूजा विधि

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा जाती है। पूजा के दौरान केले के पत्ते, फल, पंचामृत, पान-सुपारी, तिल, मोली, रोली, कुमकुम, दूर्वा आदि सामाग्री का उपयोग किया जाता है। इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा करवाना शुभ माना जाता है।