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जानें कब है परिवर्तनी एकादशी, पढ़ें महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

पार्श्व एकादशी / परिवर्तनी एकादशी को मनोकामना पूर्ती वाली एकादशी कहा जाता है।

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भोपाल

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Tanvi Sharma

Sep 06, 2019

parivartini ekadashi 2019

भाद्रपद के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को पार्श्व एकादशी, परिवर्तिनी एकादशी ( parivartani ekadashi 2019 ) एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी में भगवान श्री विष्णु के वामन रुप की पूजा की जाती है। पार्श्व एकादशी / परिवर्तनी एकादशी को मनोकामना पूर्ती वाली एकादशी कहा जाता है। माना जाता है की इस एकादशी पर सच्चे मन से पूजा-पाठ करने पर व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। भगवान विष्णु की एकादशी के दिन पूजा विधि-विधान से करने पर जातक मोक्ष प्राप्त करता है। इस बार परिवर्तनी एकादशी 9 सितंबर 2019 को पड़ रही है।

परिवर्तनी एकादशी मुहूर्त

एकादशी समाप्त – 10 सितंबर 2019 को दोपहर 12:31 बजे

परिवर्तनी एकादशी के दिन क्या करें

एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठें और स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। भगवान विष्णु को स्नान कराकर, फूल-पत्तों और खासकर कमल के फूल से मंदिर सजाएं। उसके बाद रोली का तिलक लगाकर अक्षत अर्पित करें और मीठाई का भोग लगायें। विष्णु और लक्ष्मीजी की आरती की जाती है। इस दिन रात्रि में भजन-कीर्तन करने का विशेष महत्व है।

परिवर्तनी एकादशी व्रत महत्व

धर्म ग्रंथों के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी पर व्रत करने से जातक को कई हजार गुना यज्ञ का फल मिलता है। व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है, कहा जाता है कि पापों का नाश करने के लिए इससे बड़ा कोई उपाय नहीं होता। माना जाता है की जो लोग परिवर्तनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वामन रुप की पूजा करते हैं उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है। इस एकादशी व्रत के बारे में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से बताते हुए कहा- कि जो इस दिन कमलनयन भगवान का कमल से पूजन करते हैं, वे अवश्य भगवान के समीप जाते हैं। जिसने भाद्रपद शुक्ल एकादशी को व्रत और पूजन किया, उसने ब्रह्मा, विष्णु सहित तीनों लोकों का पूजन किया। अत: हरिवासर अर्थात एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए।