Astrology : मदमस्त राहु का इस साल (2021-22) भारत पर असर

: वृषभ राशि में हो जाता है मदमस्त
: स्वतंत्र भारत की कुंडली में भी लग्न की वृषभ राशि में विराजमान है राहु

By: दीपेश तिवारी

Published: 25 Mar 2021, 10:16 AM IST

वैदिक ज्योतिष में राहु ग्रह को एक पापी व दैत्य ग्रह माना जाता है। ज्योतिष में राहु ग्रह को जहां कठोर वाणी, जुआ, यात्राएं, चोरी, दुष्ट कर्म, त्वचा के रोग, धार्मिक यात्राएं आदि का कारक माना जाता है, वहीं मदमस्त राहु शनि के गुण भी देता है।

माना जाता है कि जिस व्यक्ति की जन्म पत्रिका में राहु अशुभ स्थान पर बैठा हो, अथवा पीड़ित हो तो यह जातक को इसके नकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। वहीं ये भी माना जाता है कि राहु किसी जातक को जब शुभ परिणाम देता है तो उसके जैसा शुभ परिणाम भी कोई दूसरा ग्रह नहीं दे पाता।

वहीं ज्योतिष में राहु ग्रह को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। लेकिन मिथुन राशि में यह उच्च होता है और धनु राशि में यह नीच भाव में होता है। 27 नक्षत्रों में राहु आद्रा, स्वाति और शतभिषा नक्षत्रों का स्वामी है।

भारत की कुंडली: ऐसे समझें राहु की स्थिति...
दरअसल भारत की कुंडली के सभी 9 ग्रह केवल 5 भावों में ही विराजमान हैं। इस वृषभ लग्न की कुंडली में राहु लग्न में ही विराजमान है। जबकि मंगल द्वितीय भाव में हैं। इसके अलावा तीसरे घर में चंद्र, शुक्र, बुध, शनि व सूर्य है। वहीं छठे भाव में गुरु और सातवें भाव में केतु विराजमान हैं।

ऐसे में चूंकि सारे ग्रह राहु व केतु के बीचों बीच स्थिति हैं ऐसे में कालसर्प योग बना हुआ है। लेकिन इसमें सबसे खास काफी हद तक यही कालसर्प योग है, दरअसल कई जानकारों के अनुसार जहां कालसर्प योग काफी कठिनाई देता है, वहीं ये इस योग से जुड़े लोगों को कभी संतुष्ट नहीं होने देता और लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहता है।

जबकि ये भी माना जाता है कि कुंडली में यदि शुक्र बेहतर हो तो कालसर्प योग अत्यंत अच्छा प्रभाव देता है। लेकिन चंद्र से शुक्र के संबंध अच्छे नहीं माने जाते और भारत की कुंडली में चंद्र की राशि यानि कर्क में ही शुक्र हैं।

राहु आया वृषभ में...
राहु ने मिथुन राशि से 23 सितंबर 2020 को वृषभ राशि में गोचर किया था। वहीं राहु अब इस राशि में अप्रैल 2022 तक मदमस्त रहेंगे। जिनके प्रभाव अब तेजी से दिखने शुरु होंगे। उसके बाद यह मेष राशि में गोचर करेंगे।

राहु हमेशा उल्टी गति से चलते हैं, यही कारण है उस समय यह मिथुन राशि से कर्क राशि की बजाए यह वृषभ राशि में प्रवेश कर गए। राहु के गुरू यानि दैत्यगुरु शुक्र की राशि वृषभ में होने के कारण यह इस राशि में सर्वाधिक बलवान होता हैं।

राहु कैसे और कहां पर होता है मदमस्त?...
वृषभ यानि शुक्र (दैत्य गुरु) की राशि में स्थित होने पर राहु की स्थिति उसे मदमस्त बना देती है, लेकिन राहु की ये खास बात है कि वह जहां बैठता है उस स्थान को संभाल कर चलता है। लेकिन राहु उससे जुड़े लोगों को शनि के गुण भी दे देता है।

जो इस प्रकार हैं, ये आलसी, प्रपंची बनाने के साथ ही मदमस्त रहने के साथ ही नशे जैसे अवगुण भी देता है, चुंकि राहु भारत की कुंडली में ऐसा ही है, तो ये प्रवृत्ति ये यहां के कई देशवासियों को देखने को मिलती भी है।

राहु को ज्योतिष शास्त्र में बेहद क्रूर ग्रह माना गया है। राहु का नाम आते ही लोगों के मन में अशुभ ख्याल आते हैं। कई बार कुंडली में राहु की दशा लगने पर जातक को मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहु के पास किसी भी राशि का स्वामित्व नहीं है। माना जाता है कि राहु जिस राशि में प्रवेश करता है, उस राशि के हिसाब से जातकों के शुभ और अशुभ फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहु मिथुन राशि में उच्च का होता है और धनु राशि में नीच का होता है।

जहां तक अब तक देश की तरक्की की बात की जाए तो नवमांश कुंडली व ग्रहों के गोचर ने हमें सबसे ज्यादा तरक्की में मदद की है।

2021 में अभी और क्या होने वाला है...
: इस साल खेती अच्छी रहेगी। वहीं तकरीबन सितंबर अक्टूबर से स्कूल व कॉलेज पूरी तरह से खुल सकते हैं, इस दौरान बच्चों को पूरी सुरक्षा के साथ स्कूल जा सकेंगे।

: पड़ोसी देशों से हमारे संबंध खराब होंगे, अभी कुछ समय ठीक होने से कुछ मामले सुलझते दिख रहे हैं, लेकिन स्थितियां लगातार बिगड़ने की ओर भी ग्रहों की चाल इशारा करती दिख रही है।

स्वतंत्र भारत की कुंडली के हिसाब से यह साल 2021....
इस साल यानि 2021 में हम 2020 से अच्छी स्थिति में आएंगे। आर्थिक दृष्टि से भी स्थितियां बेहतर होती हुई दिख रही हैं।

सबसे महत्वपूर्ण : 2021 व 2022 साल कैसा रहेगा?...
ज्योतिष के जानकारों के अनुसार वर्तमान में अंग्रेजी कलेंडर के हिसाब से 31 दिसंबर 2020 की रात 12:00:01 बजे बनी भारत की कुंडली कन्या लग्न की रही है।

: जहां 2020 का साल कोरोना की चपेट में रहा, वहीं यह कोरोना 2021 में भी रहेगा। ऐसे में कोरोना की जो सबसे खास दवा आएगी वो 2021 के अंत तक या 2022 की शुरुआत में आ सकती है।

: वहीं पूरे साल 2021 में गुरु की महादशा में शनि का अंतर रहेगा। शनि और गुरु की ये युति किसी भी देश की कुंडली में एक परिवर्तन के दौर की ओर इशारा करती है। लेकिन, यहां शनि रोगकारक भी है, ऐसे में ग्रहों के हिसाब से 2021 व 2022 का वर्ष भी काफी संकट से भरा रह सकता हैं।

: ग्रहों की दिशा दशा के अनुसार इस समय शनि गुरु की युति के चलते इस साल यानि 2021 में देश में धरने प्रदर्शन अत्यधिक हो सकते हैं। जो लगातार तकरीबन पूरे साल चलते रहेंगे, लेकिन ग्रहों की चाल ये भी स्पष्ट करती दिख रही है कि 2022 तक ये सभी लगभग पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे।

: वहीं गुरु शनि की युति का यही समय यानि 2021-22 एक परिवर्तन का दौर साबित होता दिख रहा है। ये युति आबादी नियंत्रण की ओर भी इशारा करती दिख रही है।

: 2021 में कई परिवर्तन चलते रहेेगे, वहीं किसान आंदोलन कुछ समझौतों के साथ खत्म हो जाएगा। इसके बाद अभी काफी नए कानून व बिल भी आएंगे। वहीं 2022 व 2023 में शनि का कुंभ में गोचर देश में बहुत बड़े परिवर्तन लाएगा।

: ग्रहों की दिशा दशा के अनुसार सभी स्थितियां समय के साथ धीरे धीरे सुधरेंगी, वर्तमान में हम कोरोना काल से गुजर रहे हैं।

एक नए नेता के उदय की ओर ग्रह 2022 व 2023 में इशारा करते दिख रहे हैं। ये किसी नई भीड़ या रैली के समय सामने आ सकते हैं।

वर्तमान में देश में अभी चंद्र की महादशा है, जो 2025 तक रहेगी। 2021 के मुख्य गोचर में लग्न में राहु है, जबकि शनि व गुरु का गोचर नवम भाव यानि भारत की कुंडली के हिसाब से मकर में रहेगा। वहीं गुरु और शनि की युति से आने वाला परिवर्तन 2022 में साफ तौर से दिखाई देने की ओर भी ग्रहों के संकेत हैं। जबकि राहु इस समय यानि आने वाले नव संवत्सर 2078 में मंगल के राजा व मंत्री के प्रभाव के बावजूद बेहद असरकारक रहेगा।

दीपेश तिवारी
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