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Sankashti Chaturthi 2022: 17 जुलाई को सौभाग्य योग में संकष्टी चतुर्थी, पूजा में कभी ना करें गणेश जी की पीठ के दर्शन

हिंदू पंचांग के अनुसार सावन मास में 17 जुलाई 2022 को संकष्टी चतुर्थी पड़ रही है। ज्योतिष अनुसार इस दिन सौभाग्य योग का निर्माण होने से गणेश जी की विधि-विधान से पूजा लाभकारी मानी जा रही है। साथ ही पूजा में इन गलतियों से बचना चाहिए।

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Sankashti Chaturthi 2022: 17 जुलाई को सौभाग्य योग में संकष्टी चतुर्थी, पूजा में कभी ना करें गणेश जी की पीठ के दर्शन

हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर महीने 2 प्रकार की चतुर्थी का व्रत पड़ता है। एक संकष्टी और दूसरी विनायक चतुर्थी। इस साल 2022 में सावन मास में 17 जुलाई को संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाएगा। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन सौभाग्य योग बनने से भगवान गणेश की विधिवत पूजा बहुत फलदायी मानी जा रही है। तो आइए जानते हैं संकष्टी चतुर्थी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा की संपूर्ण विधि...

संकष्टी चतुर्थी तिथि
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 16 जुलाई 2022 को दोपहर 1 बजकर 27 मिनट से होकर इसका समापन 17 जुलाई 2022 को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगा। वहीं उदया तिथि 17 जुलाई को होने के कारण इसी दिन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा।

संकष्टी चतुर्थी पर सौभाग्य योग
हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन सौभाग्य योग 16 जुलाई 2022 को रात्रि 8:50 बजे से 17 जुलाई 2022 को शाम 5:49 बजे तक रहेगा।

संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
व्रत वाले दिन सुबह जल्दी स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल की साफ-सफाई करके एक चौकी रखकर उस पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। साथ ही पूरे स्थान को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। फिर एक फूल की मदद से भगवान गणेश पर जल अर्पित करें। अब रोली, अक्षत लाल फूल, दूर्वा, जनेऊ, लौंग, पान, सुपारी, इलायची, नारियल चढ़ाएं। तत्पश्चात गणपति जी को दक्षिणा चढ़ाकर 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। पूजा के बाद धूप, दीप से भगवान गणेश की आरती करें।

इस बात का खास ख्याल रखें
शास्त्रों के मुताबिक भगवान गणेश की पूजा के दौरान उन्हें हमेशा झुककर प्रणाम करना चाहिए और कभी भी पूजा के दौरान भगवान गणेश की पीठ के दर्शन नहीं करनी चाहिए। मान्यता है कि भगवान गणेश की पीठ के दर्शन से जीवन में दरिद्रता पैदा होती है। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान गणेश की परिक्रमा के दौरान पीठ के सामने कभी भी हाथ नहीं जोड़ें। अगर आप कभी भूल हो भी जाए तो तुरंत गणपति जी से क्षमा याचना करें।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह ले लें।)

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