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साल में दो बार क्यों मनाई जाती है शनि जयंती, इसके पीछे यह है वजह

अभी एक महीने पहले ही वैशाख अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाई (Shani Jayanti celebration ) गई थी। अब फिर शनि जयंती आ गई है। यह जानकर आप हैरान हो सकते हैं कि महज महीने के भीतर किसी देवता की दूसरी बार जयंती मनाई जाए। लेकिन यह सच है ज्येष्ठ अमावस्या (Jyeshtha Amavasya) 19 मई को उत्तर भारत में शनि जयंती (Shani Jayanti) मनाई जाएगी। इससे पहले वैशाख अमावस्या 20 अप्रैल के दिन दक्षिण भारत में शनि जयंती मनाई गई थी। इसके पीछे की वजह और भी हैरान करने वाला है तो आइये जानते हैं वजह।

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Pravin Pandey

May 09, 2023

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शनि जयंती पर पूजा से शनि की कृपा होती है और दोषों का निवारण होता है।

एक महीने के भीतर दो बार शनि जयंती मनाने की वजह
एक महीने के भीतर दो बार शनि जयंती मनाए जाने के पीछे की वजह कैलेंडर का अलग-अलग होना है। उज्जैन के पंचांगकर्ता पं. चंदन श्याम नारायण व्यास के अनुसार उत्तर भारत में पूर्णिमांत और दक्षिण भारत में अमावस्यांत कैलेंडर का प्रचलन है। दोनों में महीनों के नाम एक ही हैं और शनि जयंती अमावस्या के दिन ही पड़ती है। लेकिन अमावस्या और पूर्णिमा के बाद से महीने शुरू होने के चलते 15-15 दिन मिलाकर कैलेंडर में एक माह का फर्क आ जाता है।

व्यास के अनुसार उत्तर भारत के पूर्णिमांत कैलेंडर के अनुसार शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को मनाया जाता है, जबकि दक्षिण भारत के अमावस्यांत कैलेंडर के कारण यह तिथि वैशाख अमावस्या के दिन ही पड़ जाती है। हालांकि कुछ ग्रंथों में शनि देव का जन्म भाद्रपद की शनि अमावस्या के दिन माना गया है।

पूर्णिमांत कैलेंडर और अमावस्यांत कैलेंडर में फर्क
अमावस्यांत कैलेंडर में महीने की शुरुआत अमावस्या के अगले दिन से होती है और महीना अमावस्या तक चलता है। यानी पहले पंद्रह दिन शुक्ल पक्ष और इसका अंत कृष्ण पक्ष से होता है। इसीलिए इसे अमावस्यांत चंद्र हिंदू कैलेंडर कहा जाता है। वहीं पूर्णिमांत कैलेंडर में महीने की शुरुआत पूर्णिमा के अगले दिन यानी कृष्ण पक्ष से होती है और महीना पूर्णिमा के साथ खत्म होता है। इसे पूर्णिमांत चंद्र हिंदू कैलेंडर कहा जाता है।

ये भी पढ़ेंः Shani Jayanti 2023: विशेष योग में होगी कर्मफलदाता की पूजा, उत्तर भारत में शनि जयंती पूजा की खास विधि

ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती शुभ मुहूर्त (Shani Jayanti Shubh Muhurt)

शनि जयंती 19 मई शुक्रवार
अमावस्या तिथि का आरंभः 18 मई रात 9.42 बजे से
अमावस्या तिथि का समापनः 19 मई रात 9.22 बजे तक

शनि जयंती पर शुभ संयोग (Shani Jayanti Shubh Yog)
पंचांग के अनुसार शनि योग पर विशेष योग बन रहा है। इस दिन शोभन योग में शनि पूजा होगी। यह योग 18 मई को 7.37 बजे से 19 मई शाम 6.16 बजे तक है। इस दिन शनि स्वराशि कुंभ में रहकर शश राजयोग बनाएंगे। ऐसे में शनि देव की पूजा से विशेष फल मिलेगा। इसी के साथ इस दिन चंद्रमा गुरु के साथ मेष राशि में रहकर गजकेसरी राजयोग बनाएंगे।


इसके अलावा अन्य शुभ मुहूर्त


अभिजित मुहूर्त: 19 मई 12.09 पीएम से 1.01 पीएम
विजय मुहूर्तः 19 मई 2.46 से 3.38 पीएम