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Shiv Navratri 2023: शिव नवरात्रि दस फरवरी से, यह है महाकाल मंदिर में पूजा कार्यक्रम

Shiv Navratri 2023 (शिव नवरात्रि) की शुरुआत उज्जैन में दस फरवरी से हो रही है। इस दौरान नौ दिन तक बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया जाएगा, उन्हें दूल्हे की तरह सजाया जाएगा। शिव नवरात्रि में विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। शिव नवरात्रि में महाकाल मंदिर में विशेष पूजा कार्यक्रम की जानकारी के लिए पढ़िए रिपोर्ट।

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Pravin Pandey

Feb 09, 2023

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Shiv Navratri 2023:उज्जैन के महाकाल मंदिर (Mahakal Jyotirling Temple) में हर साल फाल्गुन कृष्ण पंचमी से महाशिवरात्रि तक शिव नवरात्रि मनाई जाती है। इस दौरान महाकाल की विशेष पूजा की जाती है। इस साल फाल्गुन कृष्ण पंचमी यानी शिव नवरात्रि 10 से शुरू होगी और 18 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन संपन्न होगी।


शिवनवरात्रि पर्व (shivnavratri festival) उज्जैन में उत्साह से मनाया जाता है। इसको लेकर भक्तों में उत्साह का माहौल है, शिव नवरात्रि के आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। भक्तों की आमद बढ़ने से सुरक्षा व्यवस्था तक को लेकर सभी व्यवस्थाएं कर ली गईं हैं। शिव नवरात्रि से फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी यानी भगवान शिव के विवाह के दिन महाशिवरात्रि नौ दिनों तक महाकाल का विशेष श्रृंगार किया जाएगा और महाकाल को दूल्हे की तरह सजाया जाएगा।

मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक संदीप कुमार सोनी ने बताया कि शिवनवरात्रि और महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर में साफ सफाई, रंगरोगन तथा श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर सभी इंतजाम कर लिए गए हैं। भगवान महाकाल की पूजन परंपरा के अनुसार 10 फरवरी को शिवनवरात्रि के पहले दिन शिवपंचमी का पूजन होगा। इसके लिए सर्वप्रथम कोटितीर्थ कुंड के समीप स्थित श्री कोटेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना कर हल्दी चढ़ाई जाएगी।

इसके बाद गर्भगृह में भगवान महाकाल की पूजा होगी। इसके बाद पुजारी भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक कर पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद 11 ब्राह्मणों द्वारा रूद्रपाठ किया जाएगा। दोपहर एक बजे भोग आरती होगी। दोपहर तीन बजे संध्या पूजा के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। नौ दिन तक पूजन का यही क्रम रहेगा।

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नौ दिन ऐसा रहेगा महाकाल मंदिर में पूजा का कार्यक्रमः शिव नवरात्रि में महाकाल मंदिर में लघु रूद्र, महा रूद्र, अति रूद्र, रूद्राभिषेक, शिवार्चन, हरि कीर्तन के आयोजन किए जाते हैं। इसके अलावा महादेव का इस तरह रोजाना अलग-अलग रूप में श्रृंगार किया जाता है।


पहले दिन : भगवान महाकाल का चंदन श्रृंगार, इसके बाद सोला एवं दुपट्टा धारण कराया जाएगा। मुकुट, मुंडमाला, छत्र आदि आभूषण पहनाए जाएंगे।
दूसरे दिन : शेषनाग श्रृंगार
तीसरे दिन : घटाटोप श्रृंगार
चौथे दिन : छबीना श्रृंगार


पांचवे दिन : होलकर रूप में श्रृंगार
छठे दिन : मन महेश रूप में श्रृंगार
सातवें दिन : उमा महेश रूप में श्रृंगार
आठनें दिन : शिव तांडव रूप में श्रृंगार
महाशिवरात्रि : सप्तधान रूप में श्रृंगार कर शीश पर फूल और फलों से बना मुकुट सजाया जाएगा।

यह है पूजा का बदला समय
प्रशासक संदीप कुमार सोनी के मुताबिक शिव नवरात्रि की पूजा अर्चना के चलते महाकाल मंदिर में आरती पूजन का समय भी बदल दिया गया है। महाकाल मंदिर में प्रतिदन सुबह 10 बजे भोग आरती और शाम को पांच बने संध्या पूजा होती है। शिव नवरात्रि के नौ दिन पूजन का विशेष कार्यक्रम होने से भोग आरती दोपहर एक बजे और संध्या पूजा दोपहर तीन बजे होगी।


महाशिवरात्रि पर 18 फरवरी को मंदिर प्रबंध समिति ने 250 रुपये की शीघ्र दर्शन व्यवस्था बंद रखने का निर्णय लिया है। स्थानीय के साथ ही देश-विदेश से आने वाले भक्तों को केवल समान्य दर्शन कराए जाएंगे। चारधाम मंदिर से त्रिवेणी संग्रहालय के रास्ते श्री महाकाल महालोक होते हुए भक्तों को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।

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शिव नवरात्रि पर ऐसे करें पूजा

शिव नवरात्रि में सुबह शीघ्र स्नान कर पूजा और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। श्रद्धानुसार नैवेद्य चढ़ाएं, फल फूल चढ़ाएं, आदिदेव को बेलपत्र जरूर चढ़ाएं। इसके अलावा शिवाष्टक, रूद्राष्टक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। रूद्र पाठ किसी ब्राह्णण से कराएं तो अच्छा, इस दौरान घर का माहौल सात्विक रखें।