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मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व, जानें ये अमावस्या क्यों है खास

- मार्गशीर्ष महीने की अमावस्या का महत्व कार्तिक मास की अमावस्या के समान माना गया है।

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Deepesh Tiwari

Nov 22, 2022

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Margsheersha Amavasya 2022: हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को अगहन अमावस्या या मार्गशीर्ष अमावस्या के नाम से जानते हैं। यह तिथि मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को आती है। हिंदू धर्म में इस अमावस्या का विशेष महत्व है। मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन स्नान दान के साथ पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध आदि कर्म किए जाते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से पितरों के लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं।

मान्यता के अनुसार मार्गशीर्ष महीने की अमावस्या का महत्व कार्तिक मास में पड़ने वाली अमावस्या से कम नहीं होता है। ऐसी माना जाता है कि मार्गशीर्ष मास की अमावस्या पर लक्ष्मी पूजन और व्रत करने से पापों का नाश होता है।

इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण ने मार्गशीर्ष माह में ही गीता का दिव्य ज्ञान दिया था, इसीलिए इस माह की अमावस्या तिथि को अत्यधिक लाभकारी और पुण्यदायी मानी जाती है। ऐसे में इसे कई मामलों में अत्यंत विशेष माना गया है।

पितरों की पूजा के लिए भी मार्गशीर्ष अमावस्या का विशेष दिन माना गया है। माना जाता है कि इस दिन पूजन और व्रत से पितर प्रसन्न होते हैं साथ ही पितृ दोष भी दूर होता है। इसके अलावा मार्गशीर्ष अमावस्या का व्रत करने से कुंडली के दोष दूर होते हैं, इस अमावस्या पर गंगा स्नान का भी विशेष महत्व बताया गया है। कहते हैं कि इस दिन गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाने से मनुष्य के सारे पाप मिट जाते हैं।

वहीं इस साल मार्गशीर्ष अमावस्या 23 नवंबर,बुधवार को मनाई जाएगी। तो चलिए जानते हैं मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व...

प्रत्येक अमावस्या की ही तरह मार्गशीर्ष अमावस्या में भी पितरों को तर्पण करने का विधान है, ऐसे में इस दिन किये जाने वाले पूजा-पाठ से पितरों को आत्म शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। इस दिन तर्पण और पिंड दान करने का विशेष महत्व माना गया है। मार्गशीर्ष अमावस्या का व्रत रखने से समस्याओं का अंत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन ऐसे करें पितरों का तर्पण-
जिस प्रकार पितृपक्ष की अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या के रूप में मनाया जाता है, ठीक उसी प्रकार कहा जाता हैं कि मार्गशीर्ष माह की अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त व्रत रखने और जल से तर्पण करके सारे पितरों को प्रसन्न किया जा सकता है। इस दिन व्रत करने से कुंडली के पितृ दोष समाप्त हो जाते हैं, निसंतानों को संतान प्राप्ति के योग बन जाते हैं, अगर किसी के भाग्य स्थान में राहु नीच का होकर परेशान कर रहा हो तो वह भी दूर हो जाती है। माना जाता है कि अगहन माह की अमावस्या के व्रत से न केवल पितृ बल्कि ब्रह्मा, इंद्र, रूद्र, अश्विनीकुमार, सूर्य, अग्नि, पशु-पक्षियों सहित सब भूत-प्राणियों की तृप्ति भी होती है।

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