18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

विदुर नीति: इन चीजों के धनी व्यक्ति रहते हैं हमेशा दुखी

विदुर नीति: ईर्ष्या एक मानसिक रोग की तरह है जो मनुष्य को अंदर से खोखला कर देती है। इस रोग में व्यक्ति अपने दुखों से नहीं बल्कि दूसरों की खुशी से अधिक परेशान रहता है।

2 min read
Google source verification
vidur neeti in hindi, mahatma vidur niti, mahatma vidur quotes, unhappy people, sad person, vidur niti suvichar, विदुर नीति,

विदुर नीति: इन चीजों के धनी व्यक्ति रहते हैं हमेशा दुखी

महात्मा विदुर परम ज्ञानी और नीतिज्ञ व्यक्ति थे। लेकिन इस बात का कभी उन्होंने घमंड नहीं किया। साथ ही उन्होनें अपनी नीतियों में भी उन बातों का जिक्र किया है जिसके जरिए व्यक्ति सही मार्ग पर चलकर जीवन की परेशनियाओं का डटकर सामना कर सके। इन्हीं नीतियों में विदुर जी ने कुछ ऐसे गुणों के बारे में बताया है जो आगे किसी व्यक्ति में हैं तो वह इंसान कभी सुखी नहीं रह पाता...

1. ईर्ष्यालु इंसान
विदुर नीति के अनुसार ईर्ष्या व्यक्ति की सबसे बुरी दोस्त है। ईर्ष्या एक मानसिक रोग की तरह है जो मनुष्य को अंदर से खोखला कर देती है। इस रोग में व्यक्ति अपने दुखों से नहीं बल्कि दूसरों की खुशी से अधिक परेशान रहता है। ऐसे लोगों के मन में दूसरों के प्रति हमेशा जलन का भाव रहने के कारण मन ही मन कुड़ते रहते हैं और इनके यहां खुशी आने पर भी इनका मन प्रफुल्लित नहीं होता।

2. गुस्सा
कहते हैं कि गुस्सा इंसान को अंदर ही अंदर खा जाता है। जिस व्यक्ति का स्वभाव बहुत गुस्सैल होता है वह क्रोध में सही-गलत की परख नहीं कर पाता है। क्रोध में इंसान कई ऐसे गलत फैसले भी ले लेता है, जिसके कारण उसे बाद में पछताना पड़ता है। साथ ही विदुर नीति के अनुसार क्रोधी व्यक्ति को कोई पसंद नहीं करता। इस कारण गुस्सैल व्यक्ति हमेशा दुखी रहता है।

3. परनिर्भर व्यक्ति
महात्मा विदुर कहते हैं कि जो लोग हर कार्य के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं, उन्हें भी जीवन में कभी सुख नहीं मिलता। क्योंकि परनिर्भरता इंसान को आश्रित बना देती है और वह खुद से कुछ नहीं करता। अगर उसका कोई काम अधूरा है और किसी अन्य व्यक्ति ने उसे पूरा नहीं किया तो निर्भर व्यक्ति को दुख झेलना पड़ता है। ऐसे इंसान का कोई स्वाभिमान भी नहीं होता।

4. शंकालु व्यक्ति
विदुर नीति के अनुसार यदि एक बार लोगों के मन में शक का बीज उत्पन्न हो जाए तो उसे समझाना बहुत कठिन हो जाता है। वह व्यक्ति हर किसी को शक की नजर से ही देखता है। जिस कारण अच्छे लोगों में भी उसे कोई न कोई कमी नजर आती है। ऐसे लोगों को कोई अपना दोस्त नहीं बनाना पसंद करता। इसलिए खुश रहना है तो शंका को मन से निकालना ही होगा।

यह भी पढ़ें: बच्चों को बनाना चाहते हैं संस्कारी और सफल, तो माता-पिता चाणक्य नीति की इन बातों का रखें ध्यान