
योगिनी एकादशी उपाय से होगा कल्याण
Yogini Ekadashi 2023: आषाढ़ के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाती है। उपवास रखा जाता है। आषाढ़ कृष्ण पक्ष एकादशी की शुरुआत 13 जून सुबह 9.28 बजे हो रही है, यह तिथि 14 जून बुधवार सुबह 8.48 बजे संपन्न होगी। उदयातिथि में यह व्रत 14 जून को रखा जाएगा। योगिनी एकादशी व्रत का पारण 15 जून सुबह 6.00 बजे से 8.32 बजे तक होगा।
योगिनी एकादशी के दिन शुभ मुहूर्तः योगिनी एकादशी के दिन कई शुभ मुहूर्त हैं।
योगिनी एकादशी शुभ मुहूर्त
विजय मुहूर्त दोपहर 02:51 बजे से 03:44 बजे तक
अमृत काल सुबह 06:26 बजे से 08:02 बजे तक
निशिता मुहूर्त 15 जून सुबह 12:17 बजे से से 01:00 बजे तक
योगिनी एकादशी महत्वः धार्मिक ग्रंथों के अनुसार योगिनी एकादशी का उपवास रखने से भक्त के सारे पाप कट जाते हैं, उसे जीवन में समृद्धि और आनंद की प्राप्ति होती है। वहीं मृत्यु के बाद योगिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से साधक को स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार यह एकादशी तीनों लोकों में प्रसिद्ध और इस व्रत को रखने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्यफल मिलता है। योगिनी एकादशी के दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है। कोई किसी श्राप से पीड़ित है तो उससे मुक्ति के लिए यह एकादशी सबसे खास मानी जाती है।
योगिनी एकादशी उपाय
1. योगिनी एकादशी के दिन पूजा पाठ के बाद 7 तेज पत्ते घर में जलाएं और इसके धुएं को पूरे घर में फैला दें। इससे घर का वास्तु दोष दूर होगा और नकारात्मकता घर से निकल जाएंगी।
2. यदि आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को एक तेज पत्ता अर्पित करें और सुख, समृद्धि और धन वृद्धि के लिए प्रार्थना करें। इस उपाय से धन संबंधी परेशानी दूर होती है।
3. विशेष कार्य में सफलता पाने के लिए योगिनी एकादशी के दिन तेज पत्ते पर सिंदूर से अपनी इच्छा लिखकर भगवान के सामने रख दें। इस उपाय को करने से हर प्रार्थना साकार होती है।
4. अगर घर के किसी व्यक्ति को बुरी नजर लग गई है तो योगिनी एकादशी के दिन 7 तेज पत्ता और एक चम्मच नमक लेकर पीड़ित व्यक्ति के सिर पर 7 बार घुमाकर तेज पत्ता और नमक को किसी पेड़ के नीचे रख दें।
5. अगर आपको रात में बुरे सपने आते हैं तो रात में सोने से पहले तकिए के नीचे एक तेज पत्ता रख दें। इस उपाय को करने से बुरे और डरावने सपने नहीं आते हैं।
6. यदि आप अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति चाहते हैं तो योगिनी एकादशी के दिन बेजुबान पशु-पक्षियों की सेवा करें। एकादशी के दिन उपवास रखकर पारण करने से पहले गरीबों को वस्त्र, खाद्य सामग्री तथा ब्राह्मणों को मिठाई, दक्षिणा का दान दें।
7. जीवन के सभी संकटों और पापों से छुटकारे के लिए योगिनी एकादशी के दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप तुलसी की माला से करना चाहिए। इसके साथ ही भगवान श्री विष्णु और माता लक्ष्मी को भोग लगाते समय उसमें तुलसी पत्ता डालकर ही नैवेद्य अर्पित करें।
8. योगिनी एकादशी के दिन पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करके शाम के समय तुलसी माता के सामने घी का दीया जलाकर 11 बार परिक्रमा करें। इसके साथ ही अपने पापों के लिए क्षमायाचना करते हुए पाप तथा कष्ट दूर करने के लिए प्रार्थना करें।
योगिनी एकादशी व्रत की पूजा विधि (Yogini Ekadashi Vrat Ki Puja Vidhi): योगिनी एकादशी के दिन स्नान के लिए धरती माता की रज यानी मिट्टी का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा स्नान के लिए तिल के उबटन का प्रयोग करें।
1. योगिनी एकादशी के दिन 14 जून को सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर और एकादशी व्रत का संकल्प लें।
2. आषाढ़ कृष्ण एकादशी के दिन घर के मंदिर में पूजा कर रहे हैं तो इससे पहले एक वेदी बनाएं, उसे गंगाजल से शुद्ध करें।
3. इसके बाद वेदी पर सप्त धान्य जैसे उड़द, मूंग, गेहूं, चना, जौ, चावल और बाजरा रखें।
4. पूजा के लिए बनाई वेदी पर मिट्टी का कलश स्थापित करें। कलश में पानी अक्षत मुद्रा रखकर उसमें 5 या 11 की संख्या में आम या अशोक के पत्ते डालकर एक ढक्कन से बंद करें और उसी पर चावल रखकर उस पर दीया रखें।
5. अब वेदी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें।
6. भगवान को रोली टीका लगाकर अक्षत चढ़ाएं। कलश के सामने शुद्ध देसी घी का दीप जलाएं।
7. इसके बाद भगवान विष्णु को तुलसी का पत्ता, पीले फूल चढ़ाएं, मौसमी फल, मिठाई आदि अर्पित करें।
8. फिर अगरबत्ती या धूपबत्ती जलाएं और विधि विधान से पूजा कर एकादशी कथा सुनें और भगवान विष्णु की आरती करें।
9. भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करें और विष्णु सह्स्त्रनाम का पाठ करें।
10. एकादशी के दिन शाम को भगवान विष्णु की पूजा और आरती करने के बाद ही फलाहार ग्रहण करें ।
11. रात को सोने के बजाय भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें।
12. इसके बाद द्वादशी तिथि की सुबह पूजा पाठ करने के बाद किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और उसे दान-दक्षिणा से संतुष्ट कर विदा करें।
13. ब्राह्मण को विदा करने के बाद अपना खुद का भोजन बनाकर और खाकर व्रत पूरा करें।
Updated on:
13 Jun 2023 10:15 pm
Published on:
13 Jun 2023 10:13 pm
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