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अनूठी है झुंझुनूं के माधव गुप्ता के सफलता की कहानी

माधव ने बताया कि उसने कोचिंग केवल दस माह की, तीन साल तक घर पर रहकर सेल्फ स्टेडी की। दृड निश्चय कर मेहनत की जाए तो एक दिन सफलता जरूर मिलती है। असफलताओं से घबनाएं नहीं, बल्कि उससे सीखें। अंग्रेजी माध्यम में पढाई की सामग्री ज्यादा मिल जाती है। सोशल मीडिया से दूर रहा, लेकिन नेट का अच्छा उपयोग भी हो सकता है। फिल्म नहीं देखता, रोज खेलने जरूर जाता हूं।

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madhav gupta jhunjhunu

Madhav gupta राजस्थान के झुंझुनूं शहर के कारुंडिया मार्ग के रहने वाले माधव गुप्ता ने सिविल सेवा परीक्षा में 132 वीं रैंक हांसिल की है। गुप्ता ने बताया कि बिट्स पिलानी से पीजी करने के बाद दिल्ली में लगभग दस माह सिविल सेवा की कोचिंग की। इसके बाद उसका चयन लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी मसूरी में इकोनॉमिक्स विषय में टीचिंग एसोसिएट पद पर हो गया। वहां वह लगभग एक साल तक देश के चुने हुए आइएएस अधिकारियों को पढाता था। मसूरी का माहौल देखकर मन में ठाना कि मुझे अब पढाना नहीं है, बल्कि खुद पढना है और आइएएस बनना है। नौकरी बीच में छोड़कर घर झुंझुनूं आ गया। लगभग तीन साल घर पर जमकर पढाई की। अब मंगलवार को परिणाम आया तो पूरा घर खुशियों से झूम उठा। माधव ने बताया कि इंटरनेट का उपयोग सही दिशा में किया जाए तो सफलता में बाधक नहीं बल्कि सहायक है। बास्केटबॉल के इस खिलाड़ी ने बताया कि उसे आगे बढ़ाने में पिता राजेश गुप्ता, मां अनिता गुप्ता का विशेष योगदान रहा। वह हर दिन आठ से दस घंटे नियमित पढाई करता था।

तीन बार असफल, हार नहीं मानी

माधव गुप्ता की सफलता की कहानी भी अनूठी है। वह आईएएस का सपना संजोकर कोचिंग करने दिल्ली गया। पहले प्रयास में सफल नहीं हुआ। दूसरी साल ज्यादा मेहनत की, इंटरव्यू तक पहुंचा, लेकिन सफलता नहीं मिली। तीसरी बार का भी प्रयास सफल नहीं हुआ। उसके कई साथियों ने हार मान ली, लेकिन माधव मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत हुआ, पहले से ज्यादा तैयारी की। चौथे प्रयास में देश भर में 132 वीं रैंक हांसिल की

असफलताओं से घबनाएं नहीं, बल्कि उससे सीखें

माधव ने बताया कि उसने कोचिंग केवल दस माह की, तीन साल तक घर पर रहकर सेल्फ स्टेडी की। दृड निश्चय कर मेहनत की जाए तो एक दिन सफलता जरूर मिलती है। असफलताओं से घबनाएं नहीं, बल्कि उससे सीखें। अंग्रेजी माध्यम में पढाई की सामग्री ज्यादा मिल जाती है। सोशल मीडिया से दूर रहा, लेकिन नेट का अच्छा उपयोग भी हो सकता है। फिल्म नहीं देखता, रोज खेलने जरूर जाता हूं।

दादा-दादी का सपना हुआ पूरा

दसवीं में माधव के 9.8 सीजीपीए व बारहवीं में 96.2 प्रतिशत अंक आए। उसके दादा डॉ. एचके गुप्ता व दादी शांति देवी का भी सपना था, पोता सिविल सेवा में जाए। सफलता पर मां अनिता, पिता राजेश गुप्ता, भाई राघव, ने खुशी व्यक्त की। वहीं मनीष अग्रवाल, दिलीप मोदी, रविशंकर शर्मा, श्याम शर्मा, अग्रवाल समाज झुंझुनूं, गोपाल गोशाला, गल्ला व्यापार संघ, खेमी शक्ति मंदिर, वस्त्र व्यापार संघ, श्याम आशीर्वाद सेवा संस्था के पदाधिकारियों ने माधव का सम्मान किया। माधव ने आठवीं तक की पढाई एसएस मोदी स्कूल से की। सीए अग्रवाल ने बताया कि माधव बचपन से पढाई के साथ बास्केटबॉल का भी अच्छा खिलाड़ी रहा है। वह अभी भी हर दिन बास्केटबॉल खेलता है।