तो, इस तरह से ब्रेन दे सकता है बेस्ट Results

क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप वर्कप्लेस पर कंट्रोल से बाहर हो गए हों और बाद में अपने एक्शन्स या शब्दों के बारे में गहरा दुख हुआ? यह दर्शाता है कि आप इमोशनल ब्रेन के कब्जे में आ गए थे और लॉजिकल ब्रेन ने काम करना बंद कर दिया था।

By: जमील खान

Published: 01 Jan 2019, 02:14 PM IST

क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप वर्कप्लेस पर कंट्रोल से बाहर हो गए हों और बाद में अपने एक्शन्स या शब्दों के बारे में गहरा दुख हुआ? यह दर्शाता है कि आप इमोशनल ब्रेन के कब्जे में आ गए थे और लॉजिकल ब्रेन ने काम करना बंद कर दिया था। न्यूरोसाइंटिस्ट पॉल मैकलिन ने एक मॉडल पेश किया जो बताता है कि दिमाग में तीन स्वतंत्र क्षेत्र होते हैं- रेप्टीलियन, लिंबिक/इमोशनल ब्रेन और नियो कॉर्टेक्स/कॉग्निटिव ब्रेन। ये विचारों, व्यवहार या एक्शन को नियंत्रित करते हैं। जानते हैं कि किस तरह से ब्रेन बेस्ट रिजल्ट्स दे सकता है।

दिमाग का काम का तरीका
रेप्टीलियन माइंड 200 मिलियन से ज्यादा वर्षों में विकसित हुआ है। यह सर्वाइवल, रीप्रोडक्शन व गुस्से से डील करता है। तनाव होने पर यह फ्लाइट या फाइट प्रतिक्रिया देता है। इसमें भाषा या समय की समझ नहीं है। आपका लिंबिक सिस्टम या पैलियो मैमेलियन दिमाग स्तनपायी से विकसित हुआ है। यह संवेदी सूचनाओं से डील करता है और इवेंट्स के लिए इमोशन्स को असाइन करता है। यह भावनाओं को नियंत्रित करता है। यह वर्तमान में ऑपरेट होता है और सिर्फ खुशी व दर्द से मोटिवेट होता है। नियो-कॉर्टेक्स या दिमाग का टास्क आधारित हिस्सा उच्च स्तर के स्तनपायी से विकसित हुआ है। यह आपको भाषा, समझ, प्लानिंग और कल्पना की शक्ति देता है।

क्या आप नियंत्रित होते हैं
आपके दिमाग के तीन क्षेत्र स्वतंत्र रूप से तीन कार्यों पर फोकस करते हैं- बचे रहना, आनंद लेना और कामयाब होना। आपका क्रोकोडाइल या डायनासोर ब्रेन डर से ट्रिगर होता है और वित्तीय सुरक्षा से सर्वाइवल महसूस करता है। वर्कप्लेस पर अपने बॉस से या नौकरी जाने के अतार्किक डर से आपका सर्वाइवल रेस्पॉन्स ट्रिगर हो सकता है और आप लड़ाई करने या भागने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। आपके इमोशनल ब्रेन में भी ट्रिगर्स होते हैं। इसलिए जब आप ऑफिस में कठिन लर्निंग असाइनमेंट के दर्द से बचते हैं और प्रोजेक्ट पूरा करने के बजाय इंटरनेट ब्राउजिंग का आनंद लेते हैं तो आप इमोशनल ब्रेन के कंट्रोल में होते हैं। सफलता के लिए बचे रहने या आनंद से आगे जाना पड़ता है।

दिमाग को प्रशिक्षित करें
वर्कप्लेस पर यदि आप खुद के अंदर अतार्किक गुस्सा या हिंसा की ओर झुकाव महसूस करें तो खुद को धीमा करने का अभ्यास करें। पता करें कि आपके शरीर में क्या हो रहा है- क्या आपकी सांस तेज चल रही है, पल्स रेट बढ़ रही है या मांसपेशियां में तनाव है? किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने के बजाय अपनी सांसों की गति को धीमा करने की कोशिश करें। यदि इससे तुरंत परिणाम न मिलें तो तनाव दूर करने के लिए फुर्ती के साथ वॉक करें। अपने कॉग्निटिव माइंड को कंट्रोल लेने दें। यदि आपका कोई साथी अपने रेप्टीलियन ब्रेन के कंट्रोल में है और गालियां दे रहा है तो उससे दूर चले जाएं। स्थिति शांत होने पर लौट आएं।

अपनी भावनाओं को सही तरह से काम में लें
वर्कप्लेस पर कॉम्प्लेक्स कॉग्निटिव समस्या को सुलझाने के दौरान कई बार भावनात्मक मजबूती होने पर कम डाटा या समय होने पर भी परिणाम तक पहुंच जाते हैं। जब वर्कप्लेस पर लगातार तनाव या डिप्रेशन महसूस करते हैं तो आपका लिंबिक ब्रेन ओवरटाइम कर रहा होता है। तब पुराने अनुभव और भावनाएं अतार्किक रूप से मौजूदा कार्यों को गाइड करते हैं। अपनी भावनाओं को बदलने के लिए नोटिस करें कि क्या चल रहा है और अपनी भावनाओं को पहचानने की कोशिश करें। दिमाग से गुजरने वाले क्षणिक विचारों पर निगाह रखें और उसे सकारात्मक विचारों से बदल दें। खुद को ऐसे कलीग्स के साथ रखें, जो पॉजिटिव बॉण्डिंग और इमोशन्स पर फोकस रखते हैं। अपने कॅरियर की उपलब्धियों के बारे में जर्नल लिखें। सकारात्मक यादों की अपनी लाइब्रेरी में जाएं। व्यायाम और ध्यान से आप अपनी भावनाओं पर काबू पा सकते हैं। कई बार लोग डाटा पर बहुत ज्यादा निर्भर हो जाते हैं, पर आपको सहज बोध को भी काम में लेना चाहिए।

जमील खान
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