22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सत्य व अहिंसा के जरिए महात्मा गांधी ने दिलाई आजादी

टीआरएस महाविद्यालय में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर परिसंवाद

less than 1 minute read
Google source verification

रीवा

image

Vedmani Dwivedi

Jan 29, 2020

150th birth anniversary of Mahatma Gandhi

150th birth anniversary of Mahatma Gandhi

रीवा. शासकीय ठाकुर रणमत सिंह कॉलेज में महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में परिसंवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह मौजूद रहे। उन्होंने कहा, महात्मा गांधी प्रेरणा के स्त्रोत हैं। उनका जीवन आने वाली पीढिय़ों को प्रेरित करता रहेगा। कार्यकम की अध्यक्षता प्रिंसिपल डा. रामलला शुक्ल ने की। विशिष्ट अतिथि के रुप में जनभागीदारी के अध्यक्ष दिवाकर द्विवेदी, जिला पंचायत अध्यक्ष अभय मिश्रा, विंध्य चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा, जिला ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष त्रियुगी नारायण शुक्ला,शहर कांग्रेस अध्यक्ष गुरमीत सिंह, सुखेंद्र सिंह बन्ना, विवेक तिवारी रहे।

मुख्य अतिथि अजय ङ्क्षसह ने कहा कि, महात्मा गांधी के अथक प्रयासों से हमें 200 सालों की अंग्रेजों की गुलामी से 15 अगस्त 1947 के दिन आजादी मिली। अहिंसा के आंदोलन ने अंग्रेजी हुकूमत की रीड़ तोड़ कर रख दी। हिंसात्मक आंदोलनों को अंग्रेजी सरकार हिंसा के दम पर तोडऩा जानती थी लेकिन जिन आंदोलनों की बुनियाद ही सत्य और अहिंसा पर टिकी हो उसके आगे अंग्रेजी हुकूमत भी बेबस नजर आती थी।

उन्होंने बताया कि 156 देशों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर डाक टिकट जारी किया है। कार्यक्रम में खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए श्रृति शर्मा, अंजू साहू, कविता शर्मा, शशांक मिश्रा, अतुल यादव, शिवनारायण आदिवासी को शील्ड देकर पुरस्कृत किया गया। मुख्य अतिथि ने कैंटीन का उद्घाटन किया।

कार्यक्रम का संयोजन डा. अखिलेश शुक्ल एवं संचालन डा. भूपेन्द्र सिंह ने किया। कार्यक्रम को सफ ल बनाने में डा.अजय शंकर पांडे, डा.आर एन तिवारी, डा.अमित तिवारी, डा.अनिल तिवारी, डा.के.के.शर्मा, डा. आर पी चतुर्वेदी, डा.संजय सिंह, डा.नागेश त्रिपाठी, डा.रवीन्द्र धुर्वे, डा.महेश शुक्ला, डा.रामेश्वर पांडे, डा. श्रीनाथ पांडे, डा.गायत्री मिश्रा, डा.गिरीश चतुर्वेदी का उल्लेखनीय योगदान रहा।