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टीआरएस कालेज रीवा का शताब्दी वर्ष देर से मनाया गया तो इसका मतलब नहीं कि इतिहास बदल गया

- टीआरएस कालेज के 150वें स्थापना वर्ष आयोजन विवाद पर पुनर्विचार के लिए सौंपा ज्ञापन

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रीवा

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Mrigendra Singh

Jun 09, 2020

Rewa

150th establishment year organizing dispute of TRS College,150th establishment year organizing dispute of TRS College,150th establishment year organizing dispute of TRS College,150th establishment year organizing dispute of TRS College


रीवा। शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय के स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किए जाने वाला कार्यक्रम विवादों में है। कुछ दिन पहले ही संभागायुक्त ने कालेज के तत्कालीन प्राचार्य रहे डॉ. रामलला शुक्ला के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का प्रस्ताव उच्च शिक्षा विभाग को भेजा है। जिसमें आरोप है कि कालेज स्थापना वर्ष के तथ्यों को लेकर भ्रामकता फैलाने का प्रयास किया गया है, साथ ही जिला प्रशासन से भी इस संबंध में कोई अनुमति नहीं ली गई है।

इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने के लिए संभागायुक्त को एक और ज्ञापन स्थानीय लोगों ने सौंपा है। जिसमें मांग उठाई गई है कि विस्तृत और तथ्यों के आधार पर जांच करने की जरूरत है। टीआरएस कालेज के एल्युमिनीज एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता घनश्याम सिंह ने प्रतिनिधि मंडल के साथ पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इनके साथ अंतरराष्ट्रीय अधिवक्ता दिवस संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजकुमार सिंह तिवारी सहित अन्य कई प्रमुख लोग भी मौजूद रहे।

ज्ञापन में कहा गया है कि ठाकुर रणमत सिंह कालेज की उम्र उसके बीजवयन संस्था के रूप में पहले पब्लिक की स्थापना रीवा के महाराजा रघुराज सिंह जूदेव ने 1869 में स्थापित कराई थी। इसके बाद उसका उन्नयन होता रहा। अंग्रेजी स्कूल, दरबार हाईस्कूल, दरबार इंटरमीडियट कालेज फिर 1944 में दरबार कालेज के रूप में स्थापना हुई। 1957 से अब तक यह ठाकुर रणमत सिंह कालेज के रूप में संचालित किया जा रहा है। इससे जुड़े तथ्यों की प्रमाणिकता के लिए रीवा राज्य गजेटियर के कुछ दस्तावेज भी सौंपे गए हैं।

ज्ञापन में कहा गया है कि यह सही है कि टीआरएस कालेज के शताब्दी वर्ष समारोह का आयोजन 1984 में किया गया था। निर्धारित अवधि पर तत्कालीन कालेज प्रशासन की ओर से शताब्दी वर्ष का आयोजन नहीं किया गया था। इस पर कालेज के छात्र रहे तत्कालीन मुख्यमंत्री कुंवर अर्जुन सिंह के ध्यान में बात आई तो उनके निर्देश पर यह भव्य आयोजन किया गया था। इसलिए उक्त अवधि से अब तक की गणना करने से करीब 36 वर्ष हुए हैं लेकिन कालेज की मुख्य संस्था की स्थापना से अब तक 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

यह सवाल भी उठाया गया है कि शताब्दी वर्ष समारोह विलंब से मनाया गया, इसका मतलब स्थापना वर्ष और कालेज का इतिहास नहीं बदल गया है। 150 वर्ष पूरे होने पर आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम में इतिहास के साथ तोड़मरोड़ किए जाने पर आपत्ति भी दर्ज कराई गई है। यह कहा गया है कि शताब्दी वर्ष समारोह 115 वर्ष में मनाया गया था लेकिन 150 वर्ष पूरे होने का कार्यक्रम अपनी निर्धारित अवधि में मनाया जाना चाहिए।


- विधायक दिव्यराज ने भी इतिहास से छेड़छाड़ को अनुचित बताया
भाजपा विधायक एवं राजघराने के वारिस दिव्यराज सिंह ने भी इस मामले में अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। भाजयुमो नेता बृजेन्द्र गौतम ने ट्वीट कर इतिहास से छेड़छाड़ करने और विंध्य की संस्कृति का अपमान करने का आरोप स्थानीय प्रशासन पर लगाया था। इस पर जवाब देते हुए दिव्यराज सिंह ने कहा है कि 1869 में राजपरिवार द्वारा विद्यालय की स्थापना कराई गई थी। शिक्षा का वही वटवृक्ष अब टीआरएस कालेज के रूप में जाना जाता है। स्थापना वर्ष के साथ छेड़छाड़ करना अनुचित है।