
नेशनल हाइवे का खुला टोलनाका.
रीवा। कोविड -१९ में जहां विकास की रफ्तार रोक दी है। वहीं उसके उल्ट कुछ बेहतर परिणाम सामने आए है। वातावरण के साथ सड़क हादसों में भी कमी आई है। स्थिति है कि हाइवे में सड़क दुर्घटना में 70 फीसदी से अधिक कम हुए है। पहले जहां प्रतिमाह 50 से 60 सड़क मनगवां चाकघाट एवं रीवा हनुमना सड़क में होते । वह लॉक डाउन के दौरान घटकर महज 12 सड़क हादसे हुए है।
मध्य प्रदेश रोड सड़क कारपोरेशन के आक ड़े बताते है। 22 मार्च के बाद लाकडाउन के बाद अप्रेल माह में महत रीवा जिले अंतर्गत एमपीआरडीसी के राष्ट्रीय राज्यमार्ग में सिर्फ 12 सड़क दुर्घटना दर्ज हुई है। वहीं जबकि इसके पहले इन सड़कों में 50 से 60 सड़क दुर्घटनाएं होती थी। बताया जा रहा है कि इस दौरान सड़क में गुजरने वाले वाहनों की संख्या कम हुई है। वहीं लॉक डाउन के दौरान सड़क नशा को सेवन कम होना भी हादसों की वजह माना जा रहा है। वहीं इन सड़कों में प्रदूषण का ग्राफ भी घटा है।
फोरलेन में भी पैंच लगाने का काम शुरु-
रीवा हनुमना फोरलेन सड़क 5 हजार से अधिक सड़क पर पैंच लगाए जा चुके है। इसके बाद फिर सड़क धंस जाने के कारण रायपुर कर्चुलियान से मनगंवा तक सड़कों पर पैंच लगाने का काम प्रांरभ हो गया है। पिछले दो सालों से लगातार सड़क में पैंच लगाने के कारण सड़क में रफनेंस व राइड क्वालिटी नहीं रह गई है। इसके लेकर एमपीआरडीसी के अधिकारी ने व्हीआरडी टेस्ट कराने की बात कही थी। लेकिन अभी तक इन सड़कों को यह टेस्ट नहीं होना है जबकि टोल वसूलने वाली, सड़कों को प्रतिवर्ष यह रफनेस टेस्ट कराना अनिवार्य है। लेकिन कंपनी दबाद के आगे यह अधिकारी टेस्ट नहीं करा रहे है। इसके बावजूद वसूली टोल वे में वसूली चल रही है।
पांच सालों में कई जगह उखड़ गई सड़क-
बताया जा रहा है कि वर्ष 2015 में बनी रीवा से हनुमना 90 किलोमीटर फोरलेन सड़क कई हिस्सों में टूट चुकी है। इस पर पूरी सड़क में पैंच लगाए गए है। जबकि इस सड़क अब डामर रिन्युवल की आवश्यकता है। पैंचों की संख्या लगातार अधिक होने से चालकों को राइड क्वालिटी नहीं मिल रहे है। वहीं सड़के के हिस्से डॉमर का उभरा हुआ भाग हम्म होने से वाहन भी अनियित्रिंत हो जाते है।
Published on:
14 May 2020 06:46 am
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