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कोरोना का अगला टारगेट बच्चों पर होने की आशंका और आगनबाडिय़ों में खिचड़ी पर भरोसा

  - रेडी टू ईट वितरण के मैन्यु चार्ट का पालन नहीं, कैसे बढ़ेगी इम्युनिटी- कोरोना काल का बहाना बनाकर गांवों में नियमित वितरण नहीं

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रीवा

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Mrigendra Singh

Jun 28, 2021

rewa

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रीवा। कोरोना संक्रमण के दो चरणों ने अपना काफी प्रभाव रीवा सहित पूरे देश में छोड़ा है। अब तीसरी लहर आने की आशंका जाहिर की जा रही है। इसमें विशेषज्ञों ने कहा है कि अगला टारगेट बच्चों पर हो सकता है। एक ओर जहां बच्चों पर संकट की आशंका जाहिर की जा रही है वहीं उनके स्वास्थ्य को लेकर प्रशासनिक तौर पर कोई गंभीरता नहीं बरती जा रही है।

आगनबाड़ी केन्द्रों में मिलने वाला पोषण आहार मनमानी की भेंट चढ़ता जा रहा है। कोरोना काल के बाद से स्व सहायता समूहों के जरिए बच्चों के परिजनों को खाद्य सामग्री मुहैया कराई जा रही है। जिसमें बड़े पैमाने पर मनमानी की शिकायतें आ रही हैं। स्व सहायता समूहों की ओर से बच्चों के परिजनों से कहा जा रहा है कि कोरोना काल की वजह से पोषण आहर के मैन्यु में भी बदलाव आया है। इसमें कई जगह पर तो आगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत भी बताई गई है।

कोरोना काल में बच्चों के परिजनों को खिचड़ी मुहैया कराई जा रही है। इसकी मात्रा में समूहों के सदस्यों की ओर से कटौती की जा रही है। कई जगह से शिकायतें आई हैं लेकिन उन पर कोई कार्रवाई विभाग की ओर से नहीं की गई है।
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- केन्द्र बंद, परिजनों को सौंपा पोषण आहार
कोरोना संक्रमण बढ़ते ही आगनबाड़ी केन्द्रों को बंद कर दिया गया है। अब कोरोना की स्थिति सामान्य होने के बाद भी इन्हें नहीं खोला जा रहा है। लॉकडाउन के दिनों में लोगों को घरों से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी, ऐसे में आगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के साथ स्व सहायता समूहों के लोग चिन्हित बच्चों के घरों तक पोषण आहार के पैकेट पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। हर दिन सूखी सामग्री देने के बजाए सप्ताह में एक बार देने का प्रावधान किया गया है। जबकि कई जगह से सूचनाएं आ रही हैं कि महीने में एक या दो बार ही वितरण किया जा रहा है।
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सत्यापन में परियोजना स्तर पर भर्रेशाही
शासन ने प्रावधान किया है कि जिस दिन बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार समय पर नहीं मिलता, मात्रा कम मिलती है अथवा उसकी गुणवत्ता खराब होती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। यह कार्य परियोजना अधिकारियों और सुपरवाइजर्स को सौंपा गया है लेकिन परियोजना स्तर पर भर्रेशाही चल रही है। सुपरवाइजर्स द्वारा कमीशन की मांग से जुड़े कई आडियो वायरल हो चुके हैं, जिससे जाहिर होता है कि किस तरह से भर्रेशाही चल रही है। बताया गया है कि देरी से पहुंचाने पर निर्धारित समय से एक घंटा देरी से पहुंचाने पर दस रुपए प्रति आगनबाड़ी केन्द्र के मान से कटौती की जानी है। इसी तरह मात्रा में अनुपातिक दर के अनुसार कटौती करने और गुणवत्ता में भी अनुपातिक दर के मुताबिक कटौती किए जाने का प्रावधान है।
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पोषण आहार का यह है प्रावधान


सोमवार- सुबह नाश्ते में मीठी लप्सी, दोपहर भोजन में रोटी, सब्जी एवं दाल।
मंगलवार- सुबह नाश्ते में पौष्टिक खिचड़ी, भोजन में खीर, पूरी, आलू-मटर या आलू चने की सब्जी।
बुधवार- सुबह नाश्ते में मीठी लप्सी, दोपहर भोजन में सब्जी, रोटी, दाल।
गुरुवार- सुबह नाश्ते में नमकीन दलिया, भोजन में वेज-पुलाव, पकौड़े वाली कढ़ी।
शुक्रवार- सुबह नाश्ते में उपमा, भोजन में रोटी, सब्जी, दाल।
शनिवार- सुबह नाश्ते में मीठी लप्सी, भोजन में चावल-सांभर।
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वर्तमान में यह मिल रहा
कोरोना काल की वजह से बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार सामग्री की जगह सूखी राशन सामग्री मुहैया कराई जा रही है। जिसमें तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को एक किलो चावल, जिसमें ३०० ग्राम मूगदाल, सोयाबीन बड़ी, दरिया, गुड़ आदि की मात्रा 1300 ग्राम में दी जा रही है। इसमें बच्चों को उनके घरों में केवल खिचड़ी ही मुहैया हो पा रही है।
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एक्सपर्ट व्यू---


कोरोना से मुकाबले के लिए पहली जरूरत इम्युनिटी मजबूत होने की रहती है। यह केवल बच्चे ही नहीं सबके लिए जरूरी है। अभी तक ऐसा नहीं रहा कि बच्चों में संक्रमण हुआ ही नहीं, उनमें भी पाया जाता रहा है। जो आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं, उससे बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने पर जोर देने की जरूरत है। जिसमें उन्हें बेहतर पोषण आहार मिले और स्वास्थ्य की जांच होती रहे। आगामी 19 जुलाई से दस्तक अभियान में जिले भर के बच्चों को विटामिन ए की डोज देने का प्रावधान है। आवश्यकता है कि आगनबाड़ी केन्द्रों में प्रावधान के अनुरूप पोषण आहार मिले।
डॉ. एनपी पाठक, शिशु रोग विशेषज्ञ
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