
रीवा. किसान अपनी आय बढ़ाने के लिए कृषि के साथ ही अब बागवानी पर भी जोर दे रहे हैं। इस दिशा में पहल करते हुए जिले के भी कई किसानों ने अफ्रीकन महोगनी के पौधे लगाए हैं। इसकी लकड़ियां काफी मजबूत और महंगी होती है। साथ ही इन पौधों के बीच में किसान खेती भी कर सकते हैं।
महंगी बिकती है लकड़ियां
महोगनी की लकड़ी मजबूत और काफी लंबे समय तक उपयोग में लाई जाने वाली होती है। यह लकड़ी लाल और भूरे रंग की होती है। इस पर पानी के नुकसान का कोई असर नहीं होता है। बताया जाता है कि इसकी लकड़ियों का इस्तेमाल एरोप्लेन, जलजहाज आदि के लिए भी होता है। इसकी लकड़ी को सागौन से भी मजबूत माना जाता है। वर्तमान में इसकी लकड़ियां 5 हजार रुपए घन फिट में बिकती है।
राजस्थान, पंजाब के अलावा अब म.प्र. में भी इसकी खेती बढ़ने लगी है। रीवा में चोरहटा के सांव गांव निवासी अनिल कुमार मिश्रा ने भी एक ह एकड़ में पौधे लगाए हैं इसके अतिरिक्त दीनबंधु पटेल निवासी देवरिहन थाना नईगढ़ी, भोला प्रसाद कुशवाहा निवासी तारीखास थाना नईगढ़ी सहित अन्य लोग भी इनकी खेती कर रहे हैं। कई समय लगता है और उसके बाद लोगों के पौधे अब धीरे-धीरे विकसित हो रहे है। किसानों ने बताया कि पौधे लगाने के बाद पेड़ यार होने में 10 से 15 साल का समय लगता है इसके बाद इसकी लकड़ियां तैयार हो जाती हैं।
दोमट मिट्टी में जल्दी तैयार होता है पेड़
जिले की जलवायु और मिट्टी तैमहोगनी के लिए अनुकूल बताई जा रही है। महोगनी का पेड़ दोमट मिट्टी में जल्दी तैयार होता है। इसको उस जगह पर उगाया जाता है, जहां तेज हवाएं कम चलती हैं, क्योंकि इसके पेड़ 40 से 200 फ़ीट तक लम्बे होते हैं लेकिन किन्तु भारत में यह 60 फीट तक ही होते हैं। इन्हें पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़कर किसी भी जगह उगाया जा सकता है। यह पेड़ 50 डिग्री सेल्सियस तक ही तापमान को सहने की क्षमता को बर्दाश्त कर सकता है। जिले के सीमित इलाकों में अभी इसकी खेती होती है लेकिन इसके महत्व को देखते हुए लोगों में इस पेड़ के प्रति रुझान तेजी से बढ़ रहा है।
पांच वर्ष में एक बार होता है बीज
यह औषधीय पौधा भी है, इसलिए इसके पत्तों, फूलों और बीजों का उपयोग भी कई प्रकार के रोगों में होता है। इसका पौधा पांच वर्षों में एक बार बीज देता है। इसके एक पौधे से पांच किलों तक बीज प्राप्त किए जा सकते है। इसके बीज की कीमत एक हजार रुपए प्रतिकिलो तक होती है। इस वृक्ष की पत्तियों में एक खास तरह का गुण पाया जाता है, जिससे इसके पेड़ो के पास किसी भी तरह के मच्छर और कीट नहीं आते हैं।
अनिल कुमार मिश्रा के मुताबिक तीन साल पूर्व एक एकड़ में महोगनी के पौधे लगाए थे। इनके बारे में इंटरनेट से जानकारी ली थी। पौधों को पूरी तरह तैयार होने में 10-15 साल लग जाता है। इसको हर सप्ताह पानी की आवश्यकता होती है और हर साल करीब एक क्विंटल खाद देनी होती है। अभी तक पौधों में किसी तरह की दिक्कत सामने नहीं आई है।
Published on:
19 Feb 2022 03:10 pm
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