
RTI activist at attacked and looted mobile
रीवा। सूचना का अधिकार अधिनियम के जरिए भ्रष्टचार के प्रति लोगों को जागरुक करने का अभियान चला रहे एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी पर कुछ बदमाशों ने हमला कर दिया। उनके साथ मौजूद अन्य लोगों के साथ भी मारपीट की गई है। इसकी शिकायत मनगवां थाने में दर्ज कराई गई है लेकिन देर शाम तक पुलिस मामला दर्ज करने में आनाकानी करती रही।
इस घटना को लेकर बड़े पैमाने पर लोगों ने निंदा की है और कहा है कि यदि पुलिस इस तरह से आरोपियों को संरक्षण देती रहेगी तो भ्रष्टचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामने नहीं आएंगे। अपने शिकायत में शिवानंद ने लिखा है कि वह चंदेह गांव के लोगों के बुलावे पर वहां आयोजित सोशल आडिट के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गए थे।
गांव के कौवाढान पुल के पास एक जीप में सवार करीब आधा दर्जन की संख्या में बदमाशों ने रास्ता रोक लिया और गालीगलौज शुरू कर दी। इसमें चंदेह का सरपंच रमेश शर्मा उर्फ पप्पू सामने आया और उसने कहा कि लगातार शिकायतें करने और जनता को जागरुक करने की वजह से उसकी कमाई बंद हो गई है। वह झूमाझटकी कर रहा था, इसी दौरान वहां से गुजर रहे स्थानीय मीडियाकर्मियों ने घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। इस पर बदमाशों ने उनके भी मोबाइल छीन लिए और उनके साथ भी मारपीट की।
बदमाशों ने अपने साथ जीप में डंडे भी लेकर आए थे उसी से मारपीट की, जिसकी वजह से एक्टिविस्ट शिवानंद के साथ ही प्रियेश पाण्डेय, स्वतंत्र शुक्ला, राहुल चतुर्वेदी, रविशंकर मिश्रा आदि को चोट पहुंची हैं। इसमें कइयों के पास मौजूद मोबाइल और रुपए भी बदमाशों ने लूट लिए। एक का मोबाइल तोड़ दिया गया था। मनगवां थाने की पुलिस ने सामान्य सूचना लेकर मेडिकल कराया और सभी को घर भेज दिया है लेकिन आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि आरोपी सरपंच एवं उसके साथ मौजूद अन्य आरोपियों की ओर से राजनीतिक दबाव भी पुलिस पर बनाया गया है जिसकी वजह से एफआइआर दर्ज करने में पुलिस आनाकानी करती रही।
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सूचना आयोग ने भी मामले में लिया संज्ञान
आरटीआइ एक्टिविस्ट के साथ मारपीट के मामले में राज्य सूचना आयोग ने भी संज्ञान लिया है। राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने अपने बयान में कहा है कि यह घटना निंदनीय है। पहले भी भ्रष्टाचार की आवाज उठाने की वजह से शिवानंद द्विवेदी पर हमले हो चुके हैं। इस पर आयोग की ओर से रीवा एसपी को निर्देशित किया गया था कि सुरक्षा व्यवस्था दी जाए। यदि मारपीट के बाद भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती तो आयोग संज्ञान लेगा और सख्त कार्रवाई के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पत्र जारी करेगा। वहीं पूर्व केन्द्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने भी कहा है कि आरोपियों पर सख्त कार्रवाई होना चाहिए, यदि शिकायत के चलते विवाद हुआ है तो आरटीआइ में प्रावधान है कि शिकायतकर्ता को सुरक्षा व्यवस्था पुलिस मुहैया कराए। इस घटना पर पूर्व सूचना आयुक्त आत्मदीप, महती अधिकार मंच मुंबई के संयोजक भास्कर प्रभु, हाईकोर्ट के अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, संजय सिंह सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निंदा की है और कहा है कि आरोपियों पर सख्त कार्रवाई होना चाहिए।
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Published on:
15 Oct 2020 11:07 pm
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