
महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव चिड़ियाघर मुकुंदपुर में बंगाल टाइगर की मौत
रीवा. महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव चिड़ियाघर मुकुंदपुर में एक और बाघ "नकुल" की मौत हो गई है। हफ्ते भर में ही चिडिय़ाघर के दूसरे बाघ की मौत ने जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। बता दें कि इस चिड़ियाघर में जहां हफ्ते भर में दो बाघों की मौत हुई है वहीं पूरे साल की बात की जाए तो पांच बाघ दम तोड़ चुके हैं। इसे लेकर लोगों में चिड़ियाघर प्रशासन को लेकर घोर आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि बाघों के रखरखाव में बड़ी लापरवाही के चलते ही उनकी मौत हो रही है।
हफ्ते भर में इस तरह से बाघों की मौत ने कई सवाल खड़े किए हैं। बाघों के इलाज के लिए नियुक्त चिकित्सक भी बिना अवकाश लिए गायब हैं। इस मौत पर पूरे प्रबंधन ने चुप्पी साध ली है।
ये हाल तब है जब चिडिय़ाघर परिसर में ही प्रदेश स्तर का रेस्क्यू सेंटर खोला गया है, जहां पर दूसरे हिस्सों से घायल और बीमार बाघों और जानवरों को लाया जाता है। लेकिन यहां पर चिडिय़ाघर के ही बाघों को प्रबंधन नहीं बचा पा रहा है। अब औरंगाबाद से लाए गए बंगाल टाइगर नकुल की भी मौत हो गई है। बता दें कि हाल ही में नकुल के साथ लाई गई बाघिन दुर्गा की मौत पहले ही हो चुकी है। अब बंगाल टाइगर का बाड़ा खाली हो गया है। इसे अब पर्यटकों के लिए बंद किया जाएगा।
बता दें कि करीब हफ्ते भर पहले ही सफेद बाघ गोपी की मौत ने भी प्रबंधन को बड़ा झटका दिया था, बावजूद इसके सीख नहीं ली गई और एक और बाघ की मौत हो गई। मुकुंदपुर के जू एंड सफारी में हालिया कुछ दिनों से जानवरों की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही सामने आई है। आम लोगों का आरोप है कि प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का फोकस नेताओं और अफसरों के साथ ही उनके करीबियों को भ्रमण कराने पर ही रहता है, जिसके चलते आवश्यकता के अनुरूप व्यवस्था देने में वह सफल नहीं हो पा रहे हैं। बताया जा रहा है कि अधिकांश केयर टेकरों की नियुक्ति भी सिफारिश के आधार पर हुई है।
मुकुंदपुर का चिडिय़ाघर वन विभाग का प्रदेश में अकेला चिडिय़ाघर और ह्वाइट टाइगर सफारी है। यहां वन विभाग के अधिकारियों का नियंत्रण है। चिडिय़ाघर में संचालक की नियुक्ति तो की गई है साथ ही सतना डीएफओ और रीवा के सीसीएफ की भी जिम्मेदारी सुपरविजन की है। ये अधिकारी अपनी भूमिका ठीक से नहीं निभा पा रहे। अब बाघ की मौत के बाद चिडिय़ाघर प्रबंधन के साथ अन्य अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है।
साल भर के भीतर पांच बाघों की मौत
-22 अप्रेल को औरंगाबाद से लाई गई बाघिन दुर्गा
-16 मई को बांधवगढ़ से आए बंधु
-19 जून को मादा लायन देविका
- 23 दिसंबर को सफेद बाघ गोपी
-अब नकुल की भी मौत हो गई है।
वहीं रेस्क्यू कर लाए गए तीन तेंदुओं को भी नहीं बचाया जा सका। जानकारी मिली है कि सफेद बाघिन सोनम की हालत भी ठीक नहीं है। साथ ही सफारी की सफेद बाघिन विंध्या भी कमजोर हो गई है।
Published on:
02 Jan 2021 06:29 pm
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