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mp board exam 2019 : बोर्ड परीक्षा से पहले शिक्षा विभाग में इतनी बड़ी लापरवाही, जानेंगे तो पैरों तले खिसक जाएगी जमीन

जिले की हाईस्कूल एवं हायर सेकण्डरी स्कूल में कुल 79920 छात्र - छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं। जिसमें से 39793 छात्र - छात्राएं अगली कक्षा में जाने के काबिल नहीं हैं।

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रीवा

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Vedmani Dwivedi

Feb 05, 2019

Big negligence in education department

Big negligence in education department

रीवा. हर कोई चाहता है कि उसका बेटा पढ़ने - लिखने में अव्वल हो। हालही में आई शिक्षा विभाग की एक रिपोर्ट लोगों की इस चाहत पर पानी फेर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक जिले की हाई एवं हायर सेकण्डरी स्कूल में अध्ययन कर रहे 40 हजार ऐसे छात्र - छात्राएं हैं जो शैक्षणिक रूप से बेहद कमजोर हैं। वे अगली कक्षा में जाने के काबिल नहीं हैं। 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा को अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। इस बीच यदि ठीक से पढ़ाई नहीं की तो वार्षिक परीक्षा उत्तीर्ण कर पाना उनके लिए बेहद मुश्किल होगा। इतने कम समय में उन्हें इसके काबिल यदि बना लिया जाता है तो ठीक है अन्यथा वे परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाएंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक जिले की हाईस्कूल एवं हायर सेकण्डरी स्कूल में कुल 79920 छात्र - छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं। जिसमें से महज 40127 छात्र - छात्राएं ही अगली कक्षा में पहुंच पाने के काबिल पाए गए हैं। 39793 छात्र - छात्राएं अगली कक्षा में जाने के काबिल नहीं हैं। यह रिपोर्ट छमाही परीक्षा परिणाम के आधार पर तैयार की गई है। मार्च में बोर्ड परीक्षाएं होनी है। शिक्षा विभाग की चुनौती है कि इस बीच इन छात्र - छात्राओं को कम से कम परीक्षा उत्तीर्ण करने लायक बनाया जा सके। इसके लिए प्रयास भी किए जा रहे हैं।

3100 छात्र ही ए ग्रेड में
जिले में कुल 79920 छात्र - छात्राएं हैं। इनमें से महज 3100 छात्र ही ए ग्रेड की श्रेणी में हैं। इसके अलावा सबसे ज्यादा 49334 छात्र - छात्राएं डी एवं ई ग्रेड की श्रेणी में हैं। विभाग के लिए डी एवं ई ग्रेड की श्रेणी के छात्र - छात्राएं चुनौती बने हुए हैं। इसके लिए निदानात्मक कक्षा स्कूल में चलाने के निर्देश हैं। सभी हाईस्कूल एवं हायर सेकण्डरी स्कूलों में डी एवं ई ग्रेड के बच्चों के लिए अलग से करीब एक घंटे की कक्षाएं ली जाती है।

रिर्पाट को लेकर अधिकारी परेशान
घटिया प्रदर्शन की वजह से रिपोर्ट को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारी परेशान हैं। उनकी नींद उड़ी हुई है। शिक्षा विभाग कई तरह की योजनाएं चला रहा है। जिससे शैक्षणिक रूप से कमजोर बच्चों के शैक्षणिक स्तर को सुधारा जा सके। स्कूलों में पदस्थ प्राचार्य एवं शिक्षकों की लापरवाही की वजह से यह संभव नहीं हो पा रहा है।

बोर्ड कक्षाओं के रिजल्ट पर पड़ेगा असर
जिस प्रकार अभी स्थिति है ऐसा ही रहा तो बोर्ड कक्षाओं के परीक्षा का वार्षिक परिणाम का प्रतिशत गिर जाएगा। शर्मनाक स्थिति से बचने के लिए शिक्षा विभाग प्रयास कर रहा है। जिससे इस खराब स्थित को पटरी पर लाया जा सके। इसके लिए मॉडल प्रश्न पत्र तैयार कर बच्चों को उससे पढऩे के लिए कहा जा रहा है। इस प्रयास से कुछ सुधार होने की संभावना है।

कक्षा दर्ज उपस्थित अनुपस्थित उत्तीर्ण ग्रेड डी इ
9 33449 30509 2940 13175 23521
10 22020 21791 229 11022 14205
11 11841 11399 442 8575 4952
12 12610 11928 682 7355 6656

"निदानात्मक कक्षाएं लगवाकर हम प्रयास कर रहे हैं कि डी एवं ई ग्रेड के बच्चों को पटरी पर लाया जा सके। सभी हाईस्कूल एवं हायर सेकण्डरी स्कूलों में कड़ाई से निदानात्मक कक्षाओं के संचालन के लिए निर्देश दिए गए हैं। इससे कुछ सुधार की संभावना है"।

आरएन पटेल, जिला शिक्षा अधिकारी रीवा