
Big news : 87 of children in Rewa have not been screened
रीवा। सरकार का दस्तक अभियान स्थानीय स्वास्थ्य अमले की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। जिले में लक्ष्य के सापेक्ष केवल 12.97 प्रतिशत बच्चों तक ही महकमा पहुंच सका। लगभग 87 फीसदी बच्चे स्क्रीनिंग से छूट गए। यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग की प्रदेश स्तरीय रिपोर्ट में हुआ है। जिसमें रीवा की स्थिति शर्मनाक बताई गई है। मामले में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य व हेल्थ कमिश्नर ने स्थानीय अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 2 लाख 20 हजार 186 बच्चों की स्क्रीनिंग करने का लक्ष्य निर्धारित किया था जिसके सापेक्ष स्थानीय स्वास्थ्य महकमा केवल 28,577 बच्चों की ही स्क्रीनिंग कर सका। करीब 87 प्रतिशत बच्चे स्क्रीनिंग से छूट गए। दस्तक अभियान में 0 से 5 वर्ष तक की कमजोर बच्चों की स्क्रीनिंग करनी थी। जिसमें प्रमुख रूप से कुपोषण, एनीमिया से पीडि़त बच्चों को चिह्नित कर उन्हें मेडिकल ट्रीटमेंट दिलाया जाना था। इस कार्य में रीवा जिले में घोर लापरवाही बरती गई। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में प्रदेश ही नहीं, संभाग स्तर पर भी अन्य जिलों की अपेक्षा रीवा की स्थिति शर्मनाक पायी गई है। कुपोषण के मामले में संभाग में दस्तक अभियान के तहत 3136 गंभीर कुपोषित चिह्नित किए गए। जिसमें से 51 को मेडिकल ट्रीटमेंट देने की जरूरत बताई गई थी लेकिन सीधी और सतना को छोड़कर शेष जिलों में एक भी कुपोषित एनआरसी तक नहीं पहुंचा। इसी तरह एनीमिया के मामले में संभाग स्तर पर 12,310 बच्चे स्क्रीनिंग के दौरान एनीमिया (खून की भारी कमी) की चपेट में पाए गए। जिसमें से केवल 3 सीवर एनीमिया के बताए गए। जबकि संभाग में 6 प्रतिशत बच्चे सीवर एनीमिया की चपेट में हैं। हैरानी तो ये है कि इन बच्चों को न तो उपचार मुहैया कराया गया। न ही बच्चों को खून चढ़ा और न ही आयरन गोली प्रदान की गई। केवल विटामिन ए सप्लीमेंट देने के मामले में रीवा जिले की स्थिति अन्य जिलों से ठीक है। वहीं स्क्रीनिंग के मामले में भी रीवा सबसे फिसड्डी रहा।
पीएस ने ली अधिकारियों की जमकर क्लास
शर्मनाक स्थिति पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य गौरी सिंह और हेल्थ कमिश्नर पल्लवी जैन ने जेडी हेल्थ डॉ. एसके सालम, प्रभारी सीएमएचओ व सिविल सर्जन डॉ. संजीव शुक्ला और डीपीएम डॉ. एसके शर्मा को तलब किया था। कड़ी फटकार लगाने के साथ अधिकारियों से कहा गया है कि स्क्रीनिंग से छूट बच्चे जैसे भी संभव हो 15 जुलाई तक शत-प्रतिशत कवर होने चाहिए। अगर इसमें कोताही मिली तो कार्रवाई से बख्शा नहीं जाएगा।
प्रशिक्षण में बहा पानी की तरह पैसा
दस्तक अभियान शुरू होने से पहले जिले भर के एमपीडब्ल्यू, आशा कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी, एएनएम को प्रशिक्षण दिया गया था। इस प्रशिक्षण में स्वास्थ्य विभाग ने लाखों रुपए खर्च किए हैं। उद्देश्य था कि प्रशिक्षण लेकर कर्मचारी बेहतर परिणाम देंगे। लेकिन स्थानीय महकमे की लापरवाही के चलते मंशा पर पानी फिर गया है।
Published on:
11 Jul 2018 11:52 am
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