रीवा

लॉकडाउन के बीच तालाब में बसे गरीबों का तोड़ा आशियाना, सड़क पर आया परिवार

- पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत सौंदर्यीकरण का कार्य कराया जाना है, प्रशासन एवं निगम ने की कार्रवाई

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May 10, 2020
broke the home of the poor settled in the ponds in ratahra rewa


रीवा। शहर के रतहरा तालाब में लंबे अर्से से बने कच्चे मकानों और झुग्गियों को तोड़कर वहां पर मौजूद अतिक्रमण को हटा दिया है। सुबह तहसीलदार के साथ नगर निगम एवं पुलिस की टीम पहुंची और जेसीबी चलाकर एक तरफ से मकान गिराए गए। कुछ लोगों को तो पूरा सामान भी भीतर से निकालने का मौका नहीं दिया। इस कार्रवाई का वहां पर बसे लोगों ने विरोध किया है और कहा है कि पूर्व से कोई सूचना नहीं दी गई और पुलिस के दम पर एक तरफ से मकान गिराना शुरू कर दिया। इसकी सूचना मिलने पर स्थानीय पार्षद अशोक पटेल सहित कई अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता भी पहुंचे लेकिन पुलिस ने रोक दिया। कुछ देर के बाद कांग्रेस नेता सिद्धार्थ तिवारी भी पहुंचे और कहा कि लॉकडाउन के इस समय पर ऐसे बेघर करना दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री पर भी आरोप लगाए कि गरीबों के नाम पर वह केवल राजनीति करते हैं। भीड़ बढ़ते देख एसडीएम एवं पुलिस के अधिकारियों ने वहां से लोगों को हटाया और सिद्धार्थ को भी आश्वासन देकर वापस लौटाया। इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने अनुचित बताते हुए कहा है कि बेहतर तरीके से विस्थापन किया जाए।
- तालाब का सौंदर्यीकरण कराने के लिए की कार्रवाई
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि तालाब का सौंदर्यीकरण कराए जाने के लिए कई वर्षों से प्रस्तावित है। हाउसिंग बोर्ड द्वारा पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत १३.२६ एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस तालाब का सौंदर्यीकरण कराया जाना है। इसकी लागत ३.२९ करोड़ रुपए है, यह कार्य चार अक्टूबर २०१८ से प्रारंभ बताया गया है। निर्माण की अवधि दो वर्ष की है। इसलिए आगामी चार अक्टूबर के पहले कार्य पूरा किया जाना है। इसका निर्माण मेसर्स भुंडा इनफ्रास्ट्रक्चर हैदराबाद द्वारा किया जा रहा है। पूर्व में तत्कालीन निगम आयुक्त सभाजीत यादव ने पहले विस्थापन करने की बात कहते हुए कार्य को रोक दिया था। भाजपा की सरकार आते ही सक्रियता बढ़ गई है।
- प्रशासन के कहने पर ही रानीतालाब से आए थे
शहर के रानीतालाब के सौंदर्यीकरण के दौरान हटाए गए परिवारों में कुछ को आइएचएसडीपी योजना का मकान दे दिया था। स्थानीय पार्षद अशेाक पटेल ने बताया कि रानीतालाब से आए २५ लोगों को रतहरा तालाब की मेढ़ पर तब प्रशासन ने ही बसाया था। ये पक्के मकान का वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। यहां परिवार बढ़कर 68 से अधिक हो गया है। साथ ही कुछ नए लोग भी आए हैं। निगम के नेता प्रतिपक्ष अजय मिश्रा ने कहा है कि विस्थापन से पहले हटाना अनुचित है।

Mrigendra Singh IMAGE CREDIT: patrika


- दिग्विजय समेत कांग्रेस नेताओं कार्रवाई पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता सिद्धार्थ तिवारी की पोस्ट को रिट्वीट करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस संकटकाल में गरीबों का घर गिराने का अभियान? शिवराज जी आपके प्रशासन को क्या हो गया है? माफी मांगकर शासकीय खर्च पर फिर बसाइए। वहीं सांसद विवेक तन्खा ने लिखा कि सौंदर्यीकरण के नाम पर कोरोना काल में श्रमिकों पर चला आफत का बुल्डोजर। यह अमानवीय तस्वीर है। वहीं रीवा विधायक राजेन्द्र शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेशकर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की आदत है। झुग्गीवासियों की सहमति से पक्के मकानों में भेजा जा रहा है।
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लोगों ने ऐसे व्यक्त की पीड़ा
- प्रशासन ने ही कब्जा दिलाया था
ठेकेदार के लोग आए थे हटाने के लिए फिर भाजपा नेता आए थे और कहा कि रानीतालाब वालों का नहीं गिराएंगे। अब अचानक आकर मकान गिरा दिया, सामान फेक दिया। प्रशासन ने ही यहां पर कब्जा दिलाया था, हम किससे बात कहें कोई सुनने वाला नहीं है। हमारी जिंदगी तो तमाशा बनाकर रख दिया।
संजूदेवी, विस्थापित
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एक तरफ कहते हैं कि घर से कोई नहीं निकले, अब मौका पाकर घर ही तोड़ दिया। अब हम कहां जाएं, क्या हम गरीबों की कोई जिंदगी नहीं है। इस समय बेघर किया है कि हम कहीं जा नहीं सकते। पहले भी कहा था कि कोई स्थान बताएं हम वहीं चले जाएंगे।
निर्मला बंसल, विस्थापित
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तालाब की मेढ़ पर हम सब को कब्जा देकर बसाया गया था। विधायक के प्रतिनिधि आए अवैध कब्जा वाले कुछ लोगों पांच-पांच हजार रुपए दिया। कहा केवल वही लोग हटाए जाएंगे। अब मकान गिरा दिया। कुछ लोगों को ऐसा मकान दिया जा रहा है, जहां ऊपर और नीचे हर तरफ से पानी है। आवास योजना के मकान हमें दिए जाएं।
दिनेश बंसल, विस्थापित
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सीधी बात-

अर्पित वर्मा, आयुक्त नगर निगम
सवाल- रतहरा तालाब में कितने मकान गिराए गए और क्या कारण था?
जवाब- इसमें 68लोग चिन्हित हैं, जिसमें 14 के मकान गांवों में भी बने हैं। २० को मकान आवंटन की प्रक्रिया चल रही है, कुछ लोगों को दूसरी जगह पट्टा भी दिया है। तालाब सौंदर्यीकरण होना है इसलिए हटाना जरूरी था।
सवाल- हटाए गए लोगों का विस्थापन कहां हुआ ?
जवाब- जिन लोगों की व्यवस्था पहले से है, वे अपने यहां जाएंगे। शेष जो बचे हैं उन्हें आइएचएसडीपी के मकानों की पार्किंग में रखा गया है। उन्हें भोजन की भी व्यवस्था दी है।
सवाल- मकान देने में कितने दिन लग जाएंगे ?
जवाब- प्रक्रिया तो प्रारंभ कर दी है, लेकिन ऋण स्वीकृत करना एवं अन्य औपचारिकताएं जैसे ही पूरी होंगी मकान मिल जाएंगे।
सवाल- ऐसी क्या जल्दवाजी थी कि लॉकडाउन में मकान तोड़े गए ?
जवाब- सौंदर्यीकरण होना है, आगे चलकर बरसात भी आ जाएगी, इसलिए कार्य में विलंब होगा। इसी के चलते कार्रवाई हुई है।

Published on:
10 May 2020 01:53 pm
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