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रीवा के दो बड़े कार्यों का बजट में किया गया उल्लेख, जिले को कोई भी नया प्रोजेक्ट नहीं मिला

प्रदेश सरकार के बजट में रीवा जिले के लिए कोई अलग से विशेष प्रोजेक्ट नहीं मिला है

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रीवा

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Mrigendra Singh

Mar 10, 2022

rewa

Budget Madhya Pradesh 2022


रीवा। प्रदेश सरकार के बजट में रीवा जिले के लिए कोई अलग से विशेष प्रोजेक्ट नहीं मिला है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में रीवा जिले के दो प्रमुख कार्यों का उल्लेख जरूर किया है। जिसमें एक ऐतिहासिक गोविंदगढ़ किले को हेरिटेज रूप से संरक्षित करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देने और अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में इंक्यूबेशन सेंटर खोलने की बात कही गई है। इस सेंटर के जरिए युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
सरकार ने रीवा के जिन कार्यों को अपने नए बजट में जोड़कर नया कार्य बताने का प्रयास किया है, वह पहले से ही संचालित हो रहे हैं। गोविंदगढ़ किले को हेरिटेज रूप से विकसित करने का दावा किया गया है। जिसमें रीवा के गोविंदगढ़ के साथ ही सतना के माधवगढ़, भोपाल के ताजमहल, छतरपुर के राजगढ़ पैलेस को निजी निवेश से विकसित करने की बात कही गई है। रीवा के गोविंदगढ़ किले को विकसित करने के लिए करीब दस वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं। पूर्व की ठेका कंपनी ने यहां पर कार्य सही ढंग से नहीं किया, जिसकी वजह से नई कंपनी को ठेका दिया गया है। वर्तमान में यहां पर हेरिटेज होटल बनाने का कार्य चल रहा है। इसी तरह अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा सहित अन्य विश्वविद्यालयों में इंक्यूबेशन सेंटर खोले जाने का उल्लेख किया गया है। रीवा में बीते साल ही इसकी शुरुआत की जा चुकी है। जहां पर छह तरह के स्वरोजगार से युवाओं को जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। जिसमें प्रमुख रूप से सुपारी के खिलौने, सोलर पैनल, फूड एण्ड मेडिसिन यूनिट, हैंडमेड सोप एंड सेनेटाइजर, हथकरघा यूनिट और मोबाइल एप आदि बनाने के कार्यों को सिखाने की योजना बनाई गई है। जिसमें सुपारी के खिलौने और हाथों से साबुन बनाए जाने का प्रशिक्षण लेकर कई बैच जा चुके हैं। हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने बजट में इस इंक्यूबेशन सेंटर के लिए ५० लाख रुपए के बजट का प्रावधान किया था।
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एमएसएमई एवं व्यापारियों के लिए कोई आकर्षक स्कीम नहीं : कैट

- प्रस्तुत बजट में उद्योग एवं व्यापार को किसी भी प्रकार की आकर्षक योजना इस बजट में प्रस्तुत नहीं की है। एक ओर सरकार ने युवाओं के रोजगार के लिए चलने वाली प्रधान मंत्री स्वरोजगार योजना बंद कर दी, जिसमें 30 प्रतिशत सब्सिडी मिलती थी, वहीं सरकार ने ब्याज अनुदान देने वाली मुख्यमंत्री युवा क्रान्ति योजना प्रस्तुत की है। औद्योगिक क्षेत्र में सर्वांगीण विकास और नए औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए जो प्रावधान होना चाहिए वह नहीं किए गए। राज्य सरकार स्वरोजगार को स्थापित करने के लिये नि:शुल्क भूमि, किफायती दर पर बिजली जैसी कुछ आकर्षक योजना देती तो इससे हमारे प्रदेश में रोजगार के अवसर और आर्थिक गतिविधियां बढ़ती। कोरोना महामारी से टूट चुके मध्यम व्यापारियों को उम्मीद थी कि सरकार बजट में बिजली ब टैक्स तथा बैंक कर्ज ब्याज में राहत देगी लेकिन कुछ नही दिया सिर्फ बड़े लोगो को लाभ देने पीपीपी योजना को बढ़ावा दिया।
अमरजीत सिंह, जिला अध्यक्ष कैट

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यह बजट झूठ और फरेब का पुलिंदा है

भाजपा सरकार ने प्रदेश की जनता पर 3 लाख करोड़ रुपए के कर्ज का बोझ प्रदेश पर डाल दिया है, सरकार कर्ज लेकर घी पीने का कार्य कर रही है। बेरोजगारी का आंकड़ा 30 लाख को पार कर चुका है, वहीं रोजगार प्रदान करने को लेकर इस बजट में कोई ठोस कार्ययोजना व प्रावधान नहीं है। इस बजट में गांव, गरीब, किसान व नौजवान को कुछ नहीं मिला। खाद्य सामग्री महंगे होना व शराब सस्ती करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण कदम है।
सिद्धार्थ तिवारी, कांग्रेस नेता
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शराब आधारित बजट
कर्ज में डूबी हुई बजट विहीन सरकार यह बजट इनके खुद के लिए और कुछ चन्द उद्योगपतियों के लिए है। शराब पर आधारित हैं, पूरा प्रदेश नशे में धकेलना चाहते हैं। इस सरकार को युवा, किसान एवं आमजन से कोई सरोकार नहीं है।
सुखेन्द्र सिंह बन्ना, पूर्व विधायक
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व्यापारियों ने कहा टैक्स नहीं बढ़ाकर राहत दी, इसी की जरूरत थी

रीवा। प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए बजट पर व्यापारियों ने संतोष जाहिर किया है। कहा है कि यह सबसे बड़ी राहत की बात है कि सरकार ने किसी तरह से नया टैक्स नहीं लगाया है। महंगाई तेजी से बढ़ ही रही है, यदि प्रदेश सरकार भी कोई उपकर लगा देती तो इसमें और वृद्धि होती। बजट पेश होने के बाद आपस में चर्चा कर रहे व्यवसाई नवनीत कुमार गुप्ता, स्वर्णिम सोनी, आशीष सोनी, आरबी शुक्ला, रामायण सिंह, लक्ष्मी प्रसाद सोनी, राजकुमार रामवानी, रावेन्द्र विश्वकर्मा, महेश वर्मा सहित अन्य एक तरह की राय जाहिर की। साथ ही यह भी कहा कि जरूरत इस बात की थी कि कुछ टैक्सों में कमी की जाती जिससे अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलती। व्यवसाइयों ने यह भी कहा कि हाल ही में कर्मचारियों के वेतन में हुई बढ़ोत्तरी से भी बाजार को रफ्तार मिलेगी।
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व्यापार की दृष्टि से यह टैक्स इसलिए अच्छा है कि कोई टैक्स नहीं बढ़ाया गया है। आशंका थी कि कोरोना क्राइसेस के बाद टैक्स बढ़ेगा तो महंगाई भी बढ़ेगी, जिसका असर व्यापार पर होगा।
नवनीत गुप्ता, व्यवाई
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इस बार चर्चा थी कि नए उपकर लगाए जाएंगे लेकिन सरकार ने इतनी राहत दी है कि किसी तरह का नया टैक्सेशन नहीं किया है। बाजार अब तेजी से अपनी रफ्तार पर आगे बढ़ेगा।
आशीष सोनी, व्यवसाई
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इसे समय के अनुसार बढिय़ा बजट कह सकते हैं। यह हर क्षेत्र के लोगों को उबरने का अवसर है। इस बीच टैक्स बढ़ाया जाता तो हर क्षेत्र प्रभावित होता। महंगाई बढ़ती तो लोगों के शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता था।
मुकेश श्रीवास्तव, कालेज संचालक
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महिला वर्ग : महंगाई बढ़ाई नहीं पर रोकने के लिए भी कोई प्रयास नहीं


रीवा। बजट पर महिलाओं ने कहा है कि सरकार ने कोई टैक्स में बदलाव नहीं किया है। यह राहत की खबर है कि महंगाई तेजी से नहीं बढ़ेगी। वहीं यह भी कहा है कि सरकार ने बढ़ती महंगाई को रोकने के लिए कोई प्रयास भी नहीं किए। इनका मानना है कि महिलाओं और युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कुछ नई योजनाएं लागू की जाती तो बेहतर होता। पूर्व से चल रहे टैक्सों में कुछ कटौती होती तो महंगाई में कमी आती, इससे घरों का बजट संभालने वाली महिलाओं को अधिक प्रसन्नता होती। कुछ युवतियों ने इतना जरूर कहा है कि पुलिस एवं अन्य विभागों में नियुक्तियों की बात कही जा रही है, जिसमें लड़कियों को भी अवसर मिलेंगे। एक समूह में बैठी महिलाएं बजट पर चर्चा कर रही थी, जिसमें अर्पिता लखेरा, प्रीति त्रिपाठी, कल्याणी तिवारी, शमा खान, गोलू सेन, मनीषा दुबे, संध्या श्रीवास्तव आदि ने कहा कि अच्छा बजट है पर महिलाओ के लिए और ध्यान देने की जरूरत थी।
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बजट तो ठीक है, सबसे बड़ी समस्या इनदिनों बढ़ती महंगाई की है। सरकार ने एक काम अच्छा किया है कि महंगाई बढऩे से रोकने का प्रयास किया है, जिसके चलते काफी हद तक राहत मिलेगी।
प्रीति त्रिपाठी
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बजट में लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई योजनाओं की जरूरत थी। सरकार ने नए प्रयास नहीं किए हैं। पहले की तरह ही अपनी पुरानी योजनाएं बताई हैं। हम सबको उम्मीद थी कि कुछ नया सुनने को मिलेगा।
शमा खान
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कोरोना काल के बाद से हर घर का बजट गड़बड़ाया हुआ है। ऐसे में सरकार से ही राहत की उम्मीद थी कि महंगाई कम करने के लिए कुछ प्रयास किए जाएंगे। बजट में ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई है, बाकी तो ठीक है।
संध्या श्रीवास्तव
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