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रामायण और महाभारत काल की औषधियों के बीजों का संकलन, यहां तैयार हो रहे पौधे

- जंगली क्षेत्रों के लोगों एवं वैद्यों की सहायता से कराया संग्रहण, आम लोगों को भी उपलब्ध कराए जाएंगे निर्धारित शुल्क पर पौधे  

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रीवा

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Mrigendra Singh

Apr 28, 2019

rewa

Compilation of seeds of Ramayana and Mahabharat period drugs, preparing plants here

रीवा. जंगलों की कभी शोभा बढ़ाने वाले पेड़ अब विलुप्त होने की कगार पर आ गए हैं। औषधीय एवं अन्य गुणों के चलते इनका दोहन भी तेजी के साथ हुआ है। वन विभाग ने अब ऐसे दुर्लभ होते जा रहे प्रजाति के संरक्षण की मुहिम शुरू की है। जिसके तहत जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीण जिन्हें पेड़ों के महत्व की जानकारी है, उनके साथ मिलकर बीजों का संग्रहण शुरू किया गया है। साथ ही कई ऐसे वैद्यों का भी सहयोग लिया जा रहा है जो जंगलों से औषधियां लाते हैं और लोगों के देते हैं।

अब तक ५३ से अधिक प्रजातियों के बीजों का संग्रहण हुआ है। इन बीजों से पौधे तैयार किए जाएंगे। वन अनुसंधान एवं विस्तार वृत्त की जयंतीकुंज में स्थित नर्सरी में कई ऐसी प्रजातियों के पौधे तैयार किए जाएंगे जो अब तक यहां नहीं थे। इन पौधों को पहले जंगलों में लगाया जाएगा, साथ ही आम लोगों को भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा ताकि अधिक से अधिक संख्या में पौधे लगाए जा सकें। बताया गया है कि विभाग ने सुग्रीव यादव गड़ेहरा(अंतरैला), प्रमोद सिंह रीवा, संतोष तिवारी सेमरिया सहित अन्य कई वैद्यों से जानकारी एकत्र कराने की शुरुआत की है। ये जंगलों से बीज संकलित कर रहे हैं और उसका महत्व भी बता रहे हैं।

इन प्रजाति के बीजों का हो चुका है संग्रहण
वन एवं अनुसंधान विस्तार वृत्त की नर्सरी में पौधे तैयार करने के लिए ५३ से अधिक प्रजातियों के बीज संग्रहित हो चुके हैं। जिसमें प्रमुख रूप से पुत्रनजीवा, बांस, आंवला, सागौन, साजा, सेंधा, बेर, करंज, सफेद सिरस, कैमा, कसही, मौलश्री, खिन्नी, बहेड़ा, अरण्य, मुनगा, अगस्त, कचनार, रीठा, चिरौल, इमली, चंदन, खम्हार, सीताफल, बकायन, कठमाहुल, डलवरिया सीसम, ऐंगुआ, कपासिया बरगा, हल्दू, केसिया, सेमिया, जंगली सिंदूरी, खरहार, शल्यपर्णी, सिंदूरी, पीपल, सफेद चित्रक, रामा तुलसी, सफेद घुघची, समी, गुलमोहर, भुड़कुड़, खैर, अमलतास, सतावर, अपराजिता, अर्जुन, गुरजा, शीशम, कंदम, गटायन, हरश्रृंगार, लाल चंदन आदि शामिल हैं।

आकर्षण के लिए औषधीय महत्व भी बताया जाएगा
वन अनुसंधान एवं विस्तार विभाग ने आम लोगों को दुर्लभ प्रजाति के पौधों का महत्व भी बताने की तैयारी की है। नर्सरी में जहां पौधे तैयार होंगे वहां पर गुण बताने के लिए बोर्ड लगाए जाएंगे। शासन द्वारा निर्धारित दर के अनुसार पौधे आम लोगों को उपलब्ध कराए जाएंगे।

जागरुकता अभियान भी चलाएंगे
पौधों के औषधीय एवं अन्य महत्व बताने के लिए जागरुकता अभियान भी विभाग चलाएगा। नर्सरी के रेंजर शंकर प्रसाद ने बताया कि इसके लिए स्कूल-कालेजों में जागरुकता अभियान चलाएंगे। साथ ही लोगों के बीच चौपाल लगाकर भी इसकी जानकारी दी जाएगी कि जो पौधे विलुप्त होने की कगार पर थे, उनकी फिर से प्रजाति तैयार की गई है।