
corruption in apsu rewa, vc kedarnath yadav
रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय का प्रबंधन एक बार फिर भ्रष्टाचार और मनमानी के चलते संदेह के घेरे में आ गया है। कई शिकायतें प्रबंधन के विरुद्ध अलग-अलग स्थानों पर की गई थी। जहां से आए निर्देशों के बाद संभागायुक्त ने जांच कराने के बाद प्रतिवेदन शासन को भेज दिया है।
शिकायतों में जो आरोप लगाए गए थे, उन पर विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए तर्क का उल्लेख किया गया है। अब संबंधित जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई का निर्धारण शासन स्तर से किया जाना है। इसमें पूर्व के कुलपति, कुलसचिव के साथ ही वर्तमान के भी संदेह में शामिल किए गए हैं। सबसे गंभीर आरोप नियम विरुद्ध नियुक्तियों और पदोन्नतियों को लेकर हैं।
आरोपों के घेरे में विश्वविद्यालय के कुलपति केदारनाथ सिंह यादव भी हैं। कई शिकायतों में उन्हें केन्द्र पर रखा गया था। जिसके आधार पर जांच की गई है। अनुकंपा नियुक्ति की शिकायत पर जांच में कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा एक स्कूल का संचालन किया जा रहा है। जहां पर प्राचार्य रहीं सुमन पाण्डेय की मौत १९ नवंबर २००५ को हो गई थी। इनके पुत्र डॉ. अतुल पाण्डेय को विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर बना रखा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि स्कूल के पद शासन द्वारा स्वीकृत नहीं हैं न ही विश्वविद्यालय के नियमित स्थापना के पदों में शामिल हैं। ऐसे में स्कूल के पद पर कार्यरत कर्मचारी के परिवार के सदस्य को विश्वविद्यालय के नियमित पद पर अनुकंपा नियुक्ति देना गलत है। शिकायत में आरोप था कि राहुल पाण्डेय को अनुकंपा नियुक्ति दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि परिवार के एक सदस्य को विश्वविद्यालय में सेवा दी गई थी तो दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देना नियम विरुद्ध है। इसी तरह किशनलाल पिता स्व. लाला स्वीपर की अनुकंपा नियुक्ति को भी गलत बताया गया है। किशनलाल की मां मुन्नीबाई पहले से स्वीपर पद पर कार्यरत है। ऐसे में यह अनुकंपा नियुक्ति भी नियम विरुद्ध है।
अशैक्षणिक विभाग को नियम विरुद्ध शैक्षणिक बनाया
शिकायत में यह भी कहा गया था कि अशैक्षणिक विभाग नियम विरुद्ध तरीके से विश्वविद्यालय प्रबंधन ने शैक्षणिक बनाकर पदोन्नतियां भी दे दी। विश्वविद्यालय ने एक कम्प्यूटर केन्द्र की स्थापना की थी। इस केन्द्र का नाम बदलकर डिपार्टमेंट आफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन कर दिया गया। यह अशैक्षणिक केन्द्र था लेकिन शैक्षणक बनाने के चलते पठन-पाठन भी शुरू कर दिया गया। यूजीसी एवं उच्च शिक्षा विभाग से इसकी अनुमति नहीं ली गई।
कम्प्यूटर केन्द्र के प्रभारी डॉ. पीके राय को सिस्टम इंचार्ज के रूप में पदस्थ किया गया था। यह पद अशैक्षणिक था।े कार्यपरिषद में कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रोफेसर के समकक्ष पद पर पदोन्नति दे दी गई। इस संबंध में राज्यपाल के कार्यालय ने कुलपति को नोटिस भी जारी किया था। जिसमें जवाब दिया गया कि मामला अब कोर्ट में चला गया है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि पीके राय की पदोन्नति नियम विरुद्ध है कोर्ट ने भी कोई स्थगन नहीं दिया है।
सांसद जनार्दन मिश्रा सहित कई लोगों ने की थी शिकायत
सांसद जनार्दन मिश्रा के नाम से भी एक शिकायती पत्र जांच में शामिल किया गया है। जिसमें उन्होंने कुलपति पर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी।आरोप था कि दागी और आपराधिक व्यक्तित्व को उच्च पद से हटाया जाए।
संभागायुक्त को विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने इस संबंध में जानकारी दी थी कि जबलपुर में लोकायुक्त एवं इओडब्ल्यू में प्रकरण दर्ज कर विवेचना की जा रही है। इसका ब्यौरा जबलपुर से मिलेगा, विश्वविद्यालय के पास जानकारी नहीं है। अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में भ्रष्टाचार, विवि अधिनियम का पालन नहीं, पूर्व राज्यपाल से रिश्तेदारी, क्षेत्रवाद से ग्रसित सहित अन्य कई आरोप कुलपति केदारनाथ यादव पर लगाए गए थे। सभी बिन्दुओं पर रिपोर्ट भेजी गई है।
इसके अलावा रिसर्च स्कालर स्वेता पाण्डेय, संजय पाण्डेय, सोशल वर्कर अजय खरे, ब्रम्हनारायण शर्मा, रामसेवक तिवारी सहित अन्य कई लोगों की शिकायतों के बाद सामूहिक जांच कराई गई है।
--
शिकायतों के आधार पर विश्वविद्यालय के कुलपति के विरुद्ध आरोपों की जांच कराई गई है। प्रतिवेदन शासन को भेज दिया गया है। इस पर वहीं से अगली कार्यवाही तय होगी।
डॉ. अशोक कुमार भार्गव, संभागायुक्त
--
कुलसचिव ने क्या जवाब दिया और संभागायुक्त ने क्या रिपोर्ट भेज दी, इसकी जानकारी नहीं है। हमसे आरोपों पर जवाब मांगा जाएगा तो तथ्यों के आधार पर जानकारी उपलब्ध कराएंगे। जहां तक मेरा सोचना है कि सांसद ने अपने से कुछ भी नहीं लिखा होगा, किसी ने उनके नाम का उपयोग किया है।
प्रो. केदारनाथ सिंह यादव, कुलपति अवशेध प्रताप सिंह विश्वविद्यालय
Published on:
10 Apr 2019 04:05 pm
बड़ी खबरें
View Allरीवा
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
