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सफेद शेरों की धरती में कुमार विश्वास की कविताओं ने मचाया धमाल, इन व्यंग्यों से गूंजा कृष्णा राजकपूर ऑडिटोरियम

कुमार विश्वास नाइट: कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है...पर झूमा रीवा शहर

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Dr. Kumar Vishwas LIVE Concert at Krishna Raj Kapoor Auditorium Rewa

Dr. Kumar Vishwas LIVE Concert at Krishna Raj Kapoor Auditorium Rewa

रीवा/ युवा व्यापारी संघ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कवि डॉ. कुमार विश्वास ने यादगार प्रस्तुति देकर रीवा वासियों को अपना दीवाना बना लिया। पहली बार सफेद शेरों की धरती पर कुमार विश्वास की कविताओं ने धमाल मचा दिया। कुमार विश्वास ने 'मैं अपने गीत-गजलों से उसे ये पैगाम करता हूं। उसी की दी दौलत उसी के नाम करता हूं' नज्म पढ़ी तो तालियों की गडग़ड़ाहट और वाह वाह की गूंज से कृष्णा राजकपूर ऑडोटोरियम गूंज उठा। इस दौरान कुमार विश्वास ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए अपने नज्मों, चुटकुलों एवं रोमांटिक शायरी के माध्यम से लोगों को खूब हंसाया।

सबसे पहले भुवन मोहनी ने सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन की शुरुआत की। अपनी सुमधुर आवाज से उन्होंने कवि सम्मेलन को ऊंचाई प्रदान करते हुए कविता के माध्यम से समां बांध दिया। उनकी रचना 'मां की आशा हूं निराशा हो नहीं सकती, कलम की हूं मैं परिभाषा, तमाशा हो नहीं सकती' और 'नैनों ने नैनों में ही मदिरा घोली रातभर, चांद को पाने की जिद में खिड़की खोली रातभर' सुनकर लोग देर तक ताली बजाते रहे।

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मैली चादर हुई फेंक नहीं सकते हैं
शंभू शिखर ने देश की वर्तमान स्थिति को कविता के माध्यम से कुछ इस तरह रखी-मैली चादर हुई फेंक नहीं सकते हैं, टायर जलाकर आग भी सेंक नहीं सकते हैं। इसके साथ ही हास्य के कवि शंभू शिखर ने अपनी छोटी-छोटी हास्य कविताओं के माध्यम से लोगों गुदगुदाया। कवियित्री अंकिता सिंह ने भी अपनी रचनाएं पढ़कर रीवावासियों का दिल जीत लिया- वो जिस पर उसकी रहमत हो वो दौलत मांगता है क्या, मोहब्बत करने वाला दिल मोहब्बत मांगता है क्या...,

तुम्हारा दिल कहे जब ही उजाला बनके आ जाना
तुम्हारा दिल कहे जब ही उजाला बनके आ जाना, कभी उगता हुआ सूरज इजाजत मांगता है क्या, पढ़कर तालियां बटोरी। इस दौरान युवा रचनाकर अमन अक्षर ने अपनी रचना कुछ यूं पढ़ी- हाथ पर हाथ रखना पड़ेगा तुम्हें, खुद को लाचार करना पड़ेगा तुम्हे, ये जिंदगी तो कहेगी मोहब्बत करो, तो मोहब्बत करना पड़ेगा तुम्हें, इसके बाद ये समय अनूठा उपन्यास है, जिसमें अपना होना अनायास है। प्यार का सफर बहुत दूर का, जबकि घर नदी के बहुत पास है पढ़कर लोगों के दिलों में प्यार जगा दिया।

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व्यवस्था बनाने मेें लगे रहे आयोजक
कार्यक्रम के आयोजक अध्यक्ष प्रणत कनौडिया, उपाध्यक्ष हरमीत दुग्गल, तनुज त्रिपाठी, अर्जित डालमिया, सुभम दुर्गिया, हर्षित ठारवानी आदि व्यवस्था बनाने में जुटे रहे। ऑडिटोरियम के बाहर भारी पुलिस बल सुरक्षा तैनात रहा।

विधायक ने किया उद्घाटन
राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का रीवा विधायक राजेन्द्र शुक्ल ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभांरभ किया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री पुष्पराज सिंह, महापौर ममता गुप्ता, विधायक केपी त्रिपाठी, आयुक्त डॉ. अशोक कुमार भार्गव, आइजी चंचल शेखर, डीआइजी, राजेन्द्र शर्मा, सुनील सिंह सहित अन्य प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।

आप बुरा मत मानिएगा
कार्यक्रम में कुमार विश्वास ने टीवी और अखबारों को भी निशाने पर लिया। कहा कि आज इनका क्या हाल है आप सब जानते हैं। राजनीति पर चुटकी लेते हुए कहा कि मप्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जब भाजपा हार गई तो भक्तों को भरोसा नहीं हुआ कि हार गई, जब टीवी ने बताया तब भरोसा हुआ। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिबद्धताओं की बात होगी तो आप बुरा मत मानिएगा।

कोई पागल समझता है...
कुमार विश्वास ने एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनाईं। उन्होंने किसी के दिल की मायूसी होकर गुजरी है, हमारी चालकी वो खोकर गुजरी है..., पुरानी दोस्ती को इस नई ताकत से मत तोलो..., समंदर पीर का अंदर है लेकिन रो नहीं सकता, कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ...आदि रचनाएं पढ़कर रीवावासियों का दिल जीत लिया।