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गोबर के गमले बनाना आसान, अब पालीथिन की जगह इसी के गमले में मिलेंगे पौधे

  - सामाजिक वानिकी के रीवा वृत्त के कर्मचारियों के लिए आयोजित की गई कार्यशाला

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रीवा

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Mrigendra Singh

Jan 02, 2021

rewa

Easy to make cow dung pot, now plants will be found in this pot instead of polythene


रीवा। मवेशियों के गोबर से अब तक सामान्य तौर पर केवल खाद बनाई जाती रही है। लेकिन अब इसके दूसरे उपयोगों पर जोर दिया जा रहा है। सामाजिक वानिकी के रीवा वृत्त के वन अधिकारी, कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें आधुनिक तरीकों से काम करने की सीख दी गई।

विभाग के अधिकारियों ने कृषि वैज्ञानिकों के साथ ही स्वसहायता समूहों के सदस्यों को भी बुलाया था। जिन्होंने अपने-अपने तरीके से जानकारी दी। समूह की महिलाओं ने बताया कि किस तरह से गोबर से गमले बनाए जा सकते हैं। इसके लिए एक हाथ से चलने वाली मशीन भी बुलाई गई थी। विभाग ने तय किया है कि अब यह मशीन सभी रोपणियों में उपब्ध कराई जाएगी और गोबर के गमले तैयार किए जाएंगे।

इन गमलों से फायदा यह होगा कि इन्हें सीधे गड्ढे में डाल दिया जाएगा। पालीथिन वाले पौधों की पालीथिन निकालना पड़ती है और यह मिट्टी को प्रदूषित करने की वजह भी बनती है, क्यों कि यह पालीथिन जल्द ही मिट्टी में नहीं गलती। विभाग के अधिकारियों ने कार्यशाला में कहा कि अभी इसका प्रयोग शुरू किया जाएगा और आगे चलकर हर जगह इसका प्रयोग होगा।

इस दौरान पौधों में कलम बांधने की आधुनिक तकनीकों के बारे में भी बताया गया। जिससे मौसम का इन पर असर नहीं पड़े। कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेश सिंह ने रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली एवं शहडोल से आए रोपणियों के प्रभारियों की जिज्ञासाओं के अनुसार जानकारी दी। इस दौरान सामाजिक वानिकी की सहायक वन सरंक्षक अर्चना पटेल एवं वायपी वर्मा के साथ के आजीविका मिशन के उमेश कुमार पाण्डेय, सुधीर शर्मा, इकाई प्रभारी शंकर मिश्रा, रोपणी प्रभारी शिवशंकर रावत, पंकज पाण्डेय, जगंदलाल साकेत, राधारमण द्विवेदी, विष्णु तिवारी सहित कई अन्य मौजूद रहे।