
eco tourism project mp, tonce river in rewa
रीवा। विंध्य में पर्यटन की नई संभावनाओं को तलाशने का प्रयास शासन द्वारा किया जा रहा है। इसके लिए कई पिकनिक स्पाटों को विकसित करने की योजनाएं चल रही हैं। साथ ही नए स्थल भी सामने आ रहे हैं, जिन्हें पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाए तो राजस्व के साथ ही रोजगार की संभावनाओं में भी वृद्धि होगी। इसी बीच सिरमौर अंचल के पटेहरा के नजदीक टमस नदी को विकसित करने की मांग उठने लगी है।
रीवा जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर बरदहा घाटी उतरते ही पटेहरा से होकर टमस नदी निकलती है। इसमें पटेहरा घाट से गोहटा घाट तक वाटर टूरिज्म बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकता है।
नदी में यहां पर हर समय पानी भरा रहता है। इको टूरिज्म को क्षेत्र में प्रमोट करने के लिए काम कर रहे सर्वेश सोनी ने यहां की पस्थितियों को लेकर मांग पत्र इको टूरिज्म को भेजा है। साथ ही रीवा कलेक्टर से भी मांग उठाई है कि पर्यटन विकास परिषद के माध्यम से टमस नदी के पटेहरा और गोहटा घाट को विकसित करने की योजना बनाई जाए।
क्षेत्र के अन्य कई लोगों ने भी इसके लिए मांग उठाई है। बता दें कि सिरमौर अंचल के तीन दुर्गम पिकनिक स्थलों को इको टूरिज्म बोर्ड द्वारा विकसित किया जा रहा है। जिसमें घिनौचीधाम, टोंस वॉटरफाल का कार्य पूरा हो चुका है। आल्हाघाट का भी कार्य शुरू हो चुका है। इसके अलावा गोविंदगढ़ के खंधो और क्योंटी किला का भी प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे तकनीकी कारणों से अब तक स्वीकृत नहीं किया गया है। टमस नदी में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए विकसित करने में जलसंसाधन, वन विभाग, राजस्व सहित निजी भूमि भी है। इसलिए जिला प्रशासन की रुचि पर ही इस प्रोजेक्ट का विकास संभव हो सकेगा।
- दो नेशनल हाइवे नजदीक से निकलेंगे
टमस नदी के जिस क्षेत्र को इको टूरिज्म के हिसाब से विकसित करने की मांग उठाई जा रही है। वहां से दो नए नेशनल हाइवे प्रस्तावित हैं। एक हाइवे सतना से चाकघाट तक जो सेमरिया, पटेहरा होते हुए प्रस्तावित है। वहीं दूसरा शंकरगढ़ से रीवा तक के लिए इसी क्षेत्र से निकलेगा। इस वजह से लोगों का वहां से आनाजाना काफी अधिक संख्या में होगा। ऐसे में प्राकृतिक सौंदर्य को विकसित करने के लिए बेहतर योजना बनाई जा सकती है।
इसलिए है यह स्थल खास
- नदी में नाव चलाने के लिए पर्याप्त पानी हर मौसम में उपलब्ध।
- नजदीक से दो नेशनल हाइवे गुजरने से लोगों की पर्याप्त संख्या जुड़ सकेगी।
- क्षेत्र में अन्य कई इको टूरिज्म स्पाट हैं, इसलिए यह भी महत्वपूर्ण होगा।
- शैलचित्र सहित पुरातात्विक महत्व के स्थल देखने विदेशी पर्यटक भी आते हैं।
- बोटक्लब विकसित करने से वाटर टूरिज्म कारीडोर विकसित हो सकेगा।
- पर्यटकों के आने से स्थानीय लोगों को मिल सकेगा रोजगार।
- नदी में रेत के अवैध खनन पर रोक लगाने में होगा सहायक।
Published on:
22 Apr 2019 12:14 pm
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