
Electric safety is necessary for fire safety certificate, Rewa city
रीवा। शहर के भवनों को आग से बचाने के लिए लगातार शासन की ओर से दिशा निर्देश आ रहे हैं। अब एक बार फिर से कहा गया है कि फायर एनओसी जारी करने से पहले संबंधित भवनों के मालिक इलेक्ट्रिक आडिट अनिवार्य रूप से कराएं। नगर निगम को इस कार्य में गंभीरता लेने के निर्देश दिए गए हैं और कहा गया है कि हर प्रमुख इमारत के पास फायर सेफ्टी से पूरे इंतजाम किए जाएं। जहां पर व्यवस्था नहीं हो रही है वहां पर सख्ती के साथ कार्रवाई भी होगी। गाइडलाइन जारी होने के दो महीने के भीतर व्यवस्था बनाने के लिए कहा गया है। ऐसा नहीं होने पर भवन स्वामी पर 500 रुपए प्रतिदिन की दर से जुर्माना लगाया जाएगा।
यह निर्देश केवल नगर निगम ही नहीं बल्कि अन्य नगरीय निकायों को भी भेजा गया है। जिसमें शासन ने कलेक्टर से कहा है कि नगर परिषदों के भीतर भी यही नियम लागू होंगे। नए निर्देश में कहा गया है कि पांच हजार वर्गफीट क्षेत्र व 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए पहले विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा। उसके बाद फायर सेफ्टी का सर्टिफिकेट लेने के लिए आवेदन करना होगा। इसके पहले भी कई बार नगर निगम के पास दिशा निर्देश आते रहे हैं लेकिन किसी घटना के बाद ही प्रशासनिक रूप से सक्रियता बढ़ती है। इसी का फायदा भवन स्वामियों द्वारा उठाया जाता है। गर्मी के दिनों में आग लगने की आशंकाएं अधिक बढ़ जाती हैं। अधिकांश में यही बात सामने आती है कि आग बिजली के शार्ट सर्किट की वजह से लगी है। इस वजह से अब हर बड़े भवन के लिए फायर सेफ्टी से जुड़ा एनओसी स्थानीय निकाय से लेना अनिवार्य किया गया है।
अब नई व्यवस्था के तहत उससे पहले इलेक्ट्रिक सेफ्टी आडिट कराना जरूरी हो जाएगा। इतना ही नहीं कि केवल आडिट कराने से काम पूरा हो जाएगा, बल्कि आडिट में जो कमियां बताई जाएंगी उन्हें पूरा करना होगा तभी फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट मिल पाएगा। शासन द्वारा यह व्यवस्था बीच-बीच में बदली जाती रहती है। कुछ समय पहले फायर एनओसी और सर्टिफिकेट भोपाल से ही जारी किए जाने का निर्देश हुआ था। जिसकी वजह से सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरती जा रही थी। स्थानीय स्तर पर निकायों द्वारा भी कोई सख्ती नहीं बरती जा रही थी। जिसके चलते व्यवस्था फिर नगरीय निकायों को ही सौंप दी गई है। इस व्यवस्था का कड़ाई से पालन कराने के लिए औचक निरीक्षण का भी प्रावधान किया गया है।
- नए नियम इनके लिए होंगे जरूरी
राष्ट्रीय भवन संहिता के प्रावधानों का हवाला देते हुए नई गाइडलाइन में कहा गया है कि जिन भवनों को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट अनिवार्य रूप से लेना है उसमें प्रमुख रूप से 15 मीटर से ऊंचे सभी भवन, एक तल पर 500 वर्गमीटर से अधिक निर्मित क्षेत्रफल वाले, इसमें आवासीय, धार्मिक एवं सामुदायिक भवनों को अनिवार्यता से बाहर रखा गया है। अस्पताल, होटल या अन्य ऐसे भवन जहां पर व्यवसायिक गतिविधियां संचालित होती हैं लोगों की आवाजाही लगी रहती है। इन स्थानों पर फायर सेफ्टी से जुड़ी व्यवस्था बनाना होगा।
- नए और पुराने भवनों के लिए भी गाइडलाइन
नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए गए गाइडलाइन में नए और पुराने भवनों को अलग-अलग तरह से व्यवस्थाएं बनाए जाने के लिए समझाया गया है। नए भवनों के लिए कहा गया है कि फायर सेफ्टी का प्लान अग्रिशमन प्राधिकारी द्वारा किया जाएगा। फायर प्लान निकाय द्वारा अधिकृत लाइसेंसधारी इंजीनियर से तैयार कराया जाएगा। विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद ही निकाय फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करेगा। पूर्व से निर्मित भवनों के लिए कहा गया है कि गाइडलाइन जारी होने के दो महीने के भीतर उन्हें व्यवस्था बनानी होगी। इसका मूल्यांकन करने के बाद अग्निशमन अधिकारी आगे की प्रक्रिया पूरी कराएंगे।
- दो महीने में व्यवस्था नहीं बनी तो हर दिन लगेगा जुर्माना
इस बार गाइडलाइन में सख्ती बरतने का भी निर्देश जारी हुआ है। पूर्व से बने भवनों को दो महीने का समय दिया गया है। साथ ही कहा गया है कि यदि उक्त अवधि में किसी तरह से प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती तो प्रतिदिन पांच सौ रुपए की दर से जुर्माना लगाया जाएगा। एक वर्ष के बाद जुर्माने की यह राशि एक हजार रुपए प्रतिदिन हो जाएगी। इस तरह से सख्त व्यवस्था बनाई जा रही है ताकि लोग गंभीरता के साथ प्रक्रिया का पालन करें।
- तीन वर्ष के लिए जारी होगी सर्टिफिकेट
भवनों को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट तीन वर्ष तक के लिए जारी किया जाएगा। इसके बाद फिर निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए रिन्यूवल कराना होगा। भवन स्वामी को हर साल 30 जून के पहले सेफ्टी आडिट भी देनी होगी। पहले जो एक वर्ष तक के लिए प्रोविजनल एनओसी लेकर कार्रवाई से बच रहे थे अब उसकी अवधि केवल तीन महीने की हो गई है। तीन महीने के बाद स्थाई रूप से फायर सेफ्टी की शर्तों का पालन करना होगा और उसके बाद सर्टिफिकेट लेना होगा। सभी निकायों से कहा गया है कि वह फायर आफिसर की नियुक्ति करें। जहां पर इस कार्य में विलंब होगा वह अपने किसी तकनीकी अधिकारी को इसका प्रभार दे सकेंगे। इन्हें शहर में रेंडम जांच भी करना होगा।
-
फीस का भी हुआ निर्धारण
फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के लिए अब नगर निगम निर्धारित फीस भी जमा कराएगा। आवासीय तथा शैक्षणिक भवन के लिए दो हजार रुपए 500 वर्गमीटर तक के क्षेत्रफल में, इससे अधिक क्षेत्रफल में दो रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से फीस वसूली जाएगी। वहीं अन्य भवनों के लिए 500 वर्ग मीटर तक पांच हजार रुपए और इससे अधिक क्षेत्रफल में पांच रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से फीस ली जाएगी।
---
फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के लिए नई गाइडलाइन आई है। जिसमें फीस के साथ ही जुर्माने का भी प्रावधान है। अब सभी भवन स्वामियों को शासन का निर्देश बताया जा रहा है। इसी के अनुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
मुरारी कुमार, प्रभारी फायर सेफ्टी नगर निगम Rewa
Published on:
23 Dec 2022 02:51 pm
बड़ी खबरें
View Allरीवा
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
