
elligal collony rewa, mp govt
रीवा। शहर की अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण के लिए प्रारंभ की गई प्रक्रिया का अब अगला चरण अपनाया जाएगा। जिसके तहत पूर्व में कराए गए सर्वे के आधार पर कॉलोनियों का सत्यापन होगा। जिसमें तय किया जाएगा कि किस कॉलोनी से कितनी राशि विकास शुल्क के नाम पर वसूली जाएगी।
नगर निगम द्वारा पूर्व में जारी किए गए नोटिफिकेशन के एक महीने पूरे हो गए हैं। इसमें लोगों से दावा-आपत्तियां मांगी गई थी। किसी भी वार्ड से कोई आपत्ति या फिर दावा करने वाले लोग अब तक सामने नहीं आए हैं। इसके लिए एक महीने का समय दिया गया था। अब अगले चरण में कॉलोनियों को नियमित करने के बदले वसूले जाने वाले विकास शुल्क का निर्धारण किया जाएगा। नगर निगम ने इस कार्य के लिए एक महीने का समय तय किया है।
पूर्व के सर्वे के आधार पर होगा सत्यापन
अवैध कॉलोनियों का पूर्व में जो सर्वे कराया गया था, उसी के तहत सत्यापन कराया जाएगा कि जो कॉलोनियां पहले अवैध घोषित की गई थी, उनकी वर्तमान में क्या स्थिति है। महीने भर के भीतर इस कार्य को पूरा किया जाना है। शासन ने कॉलोनियों के नियमितीकरण के लिए चरणबद्ध कार्यक्रम घोषित कर रखा है। १५ अगस्त के पहले प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
कॉलोनी के आधार पर तय होगा विकास शुल्क
पहले अवैध कॉलोनियों से वसूले जाने वाले विकास शुल्क पर शासन ने ७० रुपए प्रति वर्ग मीटर के आधार पर राशि तय की थी। हाल के संशोधन में कहा गया है कि कॉलोनी की संरचना के आधार पर विकास शुल्क तय किया जाए। मतलब यह कि जो बड़ी कॉलोनी होगी उससे अधिक राशि वसूली जाएगी और छोटे भूखंड वाली कॉलोनी में कम राशि पर विकास शुल्क तय होगा। इसी के लिए दोबारा सर्वे कराया जाना है। बताया जा रहा है कि अब जिस कॉलोनी में ७० फीसदी से अधिक छोटे प्लाट होंगे वहां पर विकास शुल्क का २० फीसदी हिस्सा जमा कराया जाएगा। जहां पर बड़े प्लाट अधिक होंगे वहां पर ५० फीसदी राशि जमा कराई जाएगी।
पार्क के बदले भी जमा होगी राशि
कई कॉलोनियां ऐसी हैं जहां पर पार्क के लिए स्थान नहीं छोड़ा गया है। जबकि नियम है कि कुल भूखंड का २० प्रतिशत हिस्सा सड़क और १० प्रतिशत पार्क के लिए छोड़ा जाएगा। अब होने वाले सर्वे में इसकी गणना होगी और कलेक्टर गाइड लाइन के आधार पर उक्त भूमि का मूल्यांकन कर कॉलोनाइजर्स से राशि वसूली जाएगी। जहां पर पूर्व के भूमि स्वामी की मौत हो गई है, वहां उनके वारिस को नोटिस देकर पक्ष मांगा जाएगा और आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।
विकास प्रारूप बनाएंगे आर्किटेक्ट
नगर निगम ने विकास शुल्क तय करने के लिए आर्किटेक्ट भी नियुक्त कर दिए हैं। जो कॉलोनियों का सर्वे कर उसका विकास प्रारूप बनाएंगे। साथ ही इसमें आने वाले खर्च का ब्यौरा भी होगा। इसी के आधार पर नगर निगम विकास शुल्क जमा कराने के लिए राशि का निर्धारण करेगा।
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अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण के लिए दावा-आपत्तियों का समय पूरा हो गया है। अब कॉलोनियों का विकास प्रारूप आर्किटेक्ट से बनवाया जाएगा। उसके बाद कॉलोनाइजर्स को नोटिस देकर उनका जवाब मांगेंगे और कॉलोनियां निगम अपने अधिपत्य में लेने की प्रक्रिया प्रारंभ कर देगा।
एचके त्रिपाठी, नोडल अधिकारी नगर निगम
Published on:
29 May 2018 01:04 pm
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