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भूमि सुरक्षा अभियान के तहत सरकारी कालेजों का हटेगा अतिक्रमण

- उच्च शिक्षा विभाग ने फिर शुरू की कवायद, सभी कालेजों की मांगी गई रिपोर्ट- तीन साल पहले शुरू हुई प्रक्रिया कोरोना काल की वजह से रुकी थी

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रीवा

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Mrigendra Singh

Aug 23, 2021

rewa

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रीवा। सरकारी कालेजों की भूमि पर अतिक्रमण को लेकर पूर्व में चलाई गई मुहिम बीच में ही रुकती रही है। अब एक बार फिर शासन के स्तर पर प्रयास शुरू किया गया है। जिसमें पहले कालेजों से भूमि का दस्तावेज तैयार कराने के लिए कहा गया है। इसके बाद सीमांकन किया जाएगा। सीमांकन में जहां पर अतिक्रमण का हिस्सा पाया जाएगा उसे हटाने की प्रक्रिया स्थानीय प्रशासन द्वारा होगी।

भूमि सुरक्षा अभियान के तहत कालेजों सहित अन्य सरकारी संपत्तियों के अतिक्रमण को हटाने की तैयारी है। इसकी शुरुआत तीन वर्ष पहले हुई थी, जिसमें पहले प्रदेश की राजनीतिक अस्थिरता और फिर कोरोना संक्रमण के काल की वजह से रुकावट आई थी। अब कोरोना की स्थितियां सामान्य हो रही हैं तो उच्च शिक्षा विभाग ने अतिरिक्त संचालक सहित सभी कालेजों के प्राचार्यों को पत्र लिखकर कहा है कि वह संस्था की भूमि से जुड़े दस्तावेज तैयार करें। सीमांकर कराकर अपनी चौहद्दी को बाउंड्रीवाल या अन्य निर्माण के जरिए कवर करें। जिन संस्थाओं की भूमि पर अतिक्रमण है वहां पर विशेष अभियान के तहत कार्रवाई होगी।

पूर्व के वर्षों में रीवा जिले में कालेजों की भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्रयास सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से किए गए थे। बीके माला की शिकायत पर संभागायुक्त ने रीवा सहित संभाग के अन्य जिलों में इसकी जांच कराने के लिए कमेटी गठित की गई थी। जिसने रिपोर्ट तैयार की थी लेकिन आगे की कार्रवाई नहीं हो पाई है। इस तरह के मामले केवल रीवा जिले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य जिलों से भी शिकायतें सरकार तक पहुंच रही हैं। अब उच्च शिक्षा विभाग ने कालेज प्राचार्यों की जवाबदेही तय की है कि वे अपने संस्थान की भूमि से जुड़े समस्त दस्तावेज दुरुस्थ करें। शहर के कई सरकारी कालेजों की भूमि में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण है। कुछ जगह तो दूसरे सरकारी विभागों के कार्यालय बना दिए गए हैं तो वहीं निजी लोगों ने भी कब्जा कर रखा है।

- लॉकडाउन के चलते रुकी प्रक्रिया
उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक ने कालेजों की भूमि पर अतिक्रमण को लेकर बीते साल रिपोर्ट तैयार की थी। शासन को प्रस्ताव भी भेजा था कि कहां पर कितनी भूमि पर अतिक्रमण है। साथ ही कालेजों को भी पत्र लिखकर कहा था कि अपने क्षेत्र के एसडीएम से मिलकर भूमि का सीमांकन कराएं और उसके अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई कराएं। यह प्रक्रिया चल ही रही थी कि कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन घोषित किया गया, जिसके चलते प्रक्रिया रुकी तो अब तक वही स्थिति बनी रही लेकिन अब फिर से शासन के पत्र ने इस अभियान को आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं।

- जिले के प्रमुख कालेजों का यह है हाल
- टीआरएस कालेज- पाठ्यक्रम और छात्र संख्या के हिसाब से विंध्य का सबसे पुराना और सबसे बड़ा कालेज है। इसे 49.24 एकड़ भूमि आवंटित हुई थी। दूसरे विभागों के भवन इसकी भूमि पर बने हैं। साथ ही इसके हिस्से की भूमि को निजी स्कूल को लीज पर देने का विवाद न्यायालय में चल रहा है। इसी की भूमि का हिस्सा लॉ कालेज को भी दिया गया है। हास्टल भी बना दिया है।
- साइंस कालेज- रीवा जिले का यह नोडल कालेज है। इसे 19.118 हेक्टेयर भूमि आवंटित हुई थी। बीएड छात्रावास भी इसी की भूमि में चल रहा है। जिसको लेकर कालेज की ओर से आपत्तियां कई बार उठाई जा चुकी हैं। राजस्व विभाग से कालेज की भूमि के दस्तावेज के लिए पत्राचार किए गए लेकिन जानकारी नहीं दी गई।
- विधि महाविद्यालय- टीआरएस कालेज की भूमि के 2.61 एकड़ हिस्से का आवंटन इसके लिए हुआ है। कई निजी लोगों ने कब्जा कर रखा है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब तक नहीं हुई है। शेष बचे हिस्से में बाउंड्रीवाल बना ली गई है।
- कन्या महाविद्यालय- 14 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। इसके सीमांकन के लिए कई प्राचार्यों ने प्रयास किया लेकिन प्रशासन का सहयोग नहीं मिला। उपभोक्ता फोरम, आयकर, उद्यानिकी सहित अन्य विभागों को कुछ हिस्सा कलेक्टर की ओर से दिया गया था। निजी लोगों का भी कब्जा है। मामला कोर्ट में चल रहा है।
- संस्कृत महाविद्यालय- इसका भवन तो बना है लेकिन भूमि के दस्तावेज संस्थान के नाम पर नहीं है। प्राचार्य को संभागायुक्त ने पहले निर्देशित किया था कि कोर्ट में मामला दायर करें। प्रबंधन की ओर से कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
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संपत्ति का ब्यौरा आनलाइन नहीं करा पाए
बीते साल ही शासन ने सभी कालेजों को निर्देशित किया था कि वह भूमि एवं अन्य संपत्तियों से जुड़ी जानकारी एकत्र कर आनलाइन अपडेट कराएं। जिससे भविष्य में किसी तरह की परेशानी नहीं हो। इसके साथ ही कई कालेजों के भूमि से जुड़े दस्तावेजों में त्रुटियां हैं उनके अभिलेखों के सुधार का भी निर्देश आया था लेकिन अब तक कालेजों के प्राचार्यों की ओर से यह कार्रवाई नहीं की गई है।
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कालेजों के भूमि से जुड़े अभिलेखों में सुधार एवं अतिक्रमण को लेकर पूर्व में पत्र भेजे गए थे। महामारी की परिस्थितियों के चलते सारी व्यवस्थाएं ठप रहीं। अब शासन का निर्देश फिर आया है, जिसके चलते प्रक्रिया नए सिरे से प्रारंभ होगी।
डॉ. पंकज श्रीवास्तव, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा




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