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सफाईकर्मी बनने के लिए इंजीनियरिंग पास की लगी कतार

रेलवे स्टेशन में लगा शिविर, 25 गांवों से पहुंचे 500 अभ्यर्थी, घंटों इंतजार के बाद भी आधे अभ्यर्थियों का नहीं आया नंबर, शाम को बिना सत्यापन खदेड़ा

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रीवा

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Lok Mani Shukla

Oct 08, 2017

रेलवे स्टेशन में लगा शिविर

रेलवे स्टेशन में लगा शिविर

रीवा. रेलवे में सफाईकर्मी के लिए इंजीनियरिंग और पीजी की डिग्री ले चुके युवा कतार में लगे हैं। शनिवार को रेलवे में चर्तुथ श्रेणी की नौकरी पाने के लिए 500 से ज्यादा अभ्यर्थी पहुंचे, जिसमें 20 से ज्यादा इंजीनियरिंग किए हुए थे। रेलवे इन अभ्यर्थियों की योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण के बदले नौकरी दे रहा है। दस्तावेज सत्यापन के लिए शनिवार को रेलवे स्टेशन में शिविर आयोजित किया था, जिसमें ५०० से अधिक अभ्यर्थीउपस्थित हुए, भीड़ अधिक होने के कारण पचास फीसदी का ही दस्तावेज सत्यापन हो पाया और अन्य को शाम को खदेड़ दिया गया।

रीवा-सिगंरौली रेल लाइन के लिए रेलवे ने जमीन अधिग्रहीत की है। इसके बदले रेलवे परिवार के एक सदस्य को चतुर्थ श्रेणी की नौकरी दे रहा है। 2010 में प्रकाशित अधिसूचना के दौरान पात्र हितग्राहियों के अभिलेख सत्यापन के लिए पश्चिम मध्य रेलवे ने रीवा, सीधी, सिंगरौली के 25 गांवों के 500 अभ्यर्थियों को
एक दिवसीय शिविर में बुलाया था। अभिलेखों का सत्यापन होने के बाद रेलवे की स्कै निंग कमेटी परीक्षण करेगी। इसके बाद सभी अभ्यर्थियों को तीन से चार माह के अंदर नियुक्ति आदेश जारी कर दिए जाएंगे।

लग्जरी गाडिय़ों में आए अभ्यर्थी
रेलवे में नौकरी के लिए 500 अभ्यर्थियों में से बड़ी संख्या में पीजी एवं इंजीनियरिंग पास शामिल रहे। वहीं, महिलाएं भी बड़ी संख्या में सत्यापन के लिए पहुंची। चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरी पाने के लिए कई अभ्यर्थी लग्जरी गाडिय़ों से सत्यापन कराने रेलवे स्टेशन पहुंचे।

घंटों इंतजार के बाद भी नहीं आया नंबर
दस्तावेज सत्यापन कराने के लिए सुबह से ही स्टेशन परिसर में अभ्यर्थी पहुंच गए थे। 10 बजे से बैठे कई अभ्यर्थियों का नाम शाम तक नहीं आया। इसके बाद सभी अभ्यर्थियों को आरपीएफ ने बाहर खदेड़ दिया।

शिविर में अव्यवस्था
पश्चिम मध्य रेलवे द्वारा लगाए गए शिविर में अव्यवस्था के कारण अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। पीने के लिए पानी एवं बैठने तक की व्यवस्था नहीं की गई थी। वहीं, लाउडस्पीकर नहीं होने के कारण बहुत से अभ्यर्थी अपना नाम तक नहीं सुन पाए।