
Farmers left medical studies, earning lakhs per month
जिले के रीठी ग्राम निवासी युवा कृषक मितेश देव बताते हैं कि परिवार के लोग पारंपरिक रूप से धान एवं गेंहू की फसल का उत्पादन कर रहे थे, लेकिन यह खेती घाटे का सौदा साबित हो रही थी। बचपन की अच्छा कृषक बनने की ललक के चलते कॉलेज की पढ़ाई छोडकऱ गांव लौट आए, तब परिजन नाराज भी हुए थे। लेकिन हिम्मत बांधकर आत्मा परियोजना के कृषि वैज्ञानिकों से मुलाकात की तो उन्होंने पारंपरिक खेती छोडकऱ आधुनिक खेती तथा फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह दी। मैने उसका पालन किया और फसल विविधीकरण अपनाने पर मेरी आय लाखों रुपए होने लगी। इसके बाद तो उद्यानिकी, पशुपालन एवं मक्खीपालन में हाथ अजमाया और हर जगह सफलता मिली। अब प्रतिमाह 2.50 लाख रुपए से अधिक कमा रहे हैं।
पांच एकड़ में आमरूद का बगीचा
मितेश देव ने बताया कि खेत में सोलर झटका मशीन के तार की फेसिंग लगवाई। पांच एकड़ में आमरूद का बगीचा लगवाया। खेत में वर्मीपिट बनाकर उसी से बनी जैविक खाद का उपयोग करते हैं तथा अर्गेनिक खेती करते हैं। तीन एकड़ में प्याज की खेती तथा मेड़ों में अरहर की बोनी करने लगा। इसके अलावा अन्य जिंसों एवं विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती को भी अपनाया, जिससे आय बढ़ी। कहा कि युवाओं के लिए यह अच्छा रास्ता है।
उत्कृष्ट पशुपालक बने, मिला पुरस्कार
मितेश ने 2.5 एकड़ में डेयरी प्रारंभ की। साहीवाल एवं गिर किस्म की 45 गाय रखी हैं, इनसे 150 लीटर दूध प्रतिदिन होता है। दूध हाथोंहाथ 90 रुपये लीटर गांव में ही बिक जाता है। अकेले दूध से 1.25 लाख रुपए प्रतिमाह आमदनी होती है। 2022 में पशुपालन प्रोत्साहन योजना के अन्तर्गत प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ और 10 हजार प्रोत्साहन राशि मिली। मितेश के अनुसार वे रीवा के पहले शुद्ध भारतीय नस्ल की गाय का सर्टिफाइड दूध सप्लायर हैं।
मधुमक्खी पालन में भी आगे
मितेश न केवल पशुपालन बल्कि फसल विविधीकरण के साथ ही मधुमक्खी पालन में भी आगे हैं। इन्होंने वर्तमान में 150 बाक्स में मधुमक्खी पालन किया हुआ है। इस तरह विविध स्टार्टअप के जरिए लाखों रुपए की कमाई करके मितेश युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हंै। उन्होंने युवाओं से कहा कि नौकरी का मोह छोड़ें और स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार करें।
Published on:
12 Jan 2023 11:59 am
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