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रीवा. गर्मी इन दिनों चरम पर है, ऐसे में आग भडकऩे की संभावनाएं अधिक रहती हैं। सबसे अधिक जंगल इस समय आग की चपेट में हैं। जिले के कईहिस्सों में आग भडकऩे की सूचना मिली है। वन विभाग के कर्मचारी इनदिनों हड़ताल पर चल रहे हैं जिसकी वजह से इस आग को बुझाने के कोई प्रयास भी नहीं किए जा रहे हैं। इस समय सूखे पत्ते और लकडिय़ों की वजह से तेजी के साथ आग फैल रही है। कई हिस्सों में भारी नुकसान की सूचनाएं हैं।
बीते 24 मईसे वन विभाग के सभी कर्मचारी एक साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इनका कहना हैकि जब तक 19 सूत्रीय मांगे पूरी नहीं होती तब तक वह काम पर नहीं लौटेंगे। गर्मीकी वजह से आग अक्सर जंगलों में लगती हैलेकिन मैदानी स्तर पर कर्मचारियों की तैनाती की वजह से वह अधिक बढ़ नहीं पाती और समय रहते काबू पा लिया जाता है। हड़ताल शुरू होने से तेजी के साथ आग भडक़ती जा रही है।
वन भूमि में बढ़ा अतिक्रमण: वन विभाग के मैदानी अमले के हड़ताल पर जाने के चलते वनभूमि में अवैध रूप से कब्जा भी तेजी के साथ हो रहा है। बताया जा रहा कि गोविंदगढ़ के नजदीक बांसा, खंधों आदि जगह झोपड़ी बनाकर कब्जा किया गया है। मऊगंज रेंज के सीतापुर, कहुआवन में भी अतिक्रमण हुआ है। यहां बाउंड्रीवाल बना ली गई है।
इन स्थानों में भडक़ रही है आग
बीते 25 मई से ही अतरैला रेंज के ओबरी, गुरगुदा और गड्डी पहाड़ के जंगल में आग लगी, कोई देखने नहीं पहुंचा। सेमरिया के ककरेड़ी, मैनहा, हनुमना के कोढ़वा, जडक़ुड़, पिपराही, बिल्लीघाट, सलैया, चाकघाट के फुलवारी, मऊगंज के बैसहाई सहित अन्य कईस्थानों के जंगलों में आग भडक़ रही है। जिस पर नियंत्रण के लिए कोईभी व्यवस्था नहीं है।
वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं बना पाए अधिकारी
एक ओर वनकर्मियों की हड़ताल के चलते जंगलों को भारी नुकसान हो रहा है। खुलेआम लकडिय़ां काटी जा रही हैं तो आग की वजह से भी नुकसान हो रहा है। सीसीएफ ने सभी डीएफओ को निर्देशित किया है कि स्थानीय समितियों और पुलिस, होमगार्डके जवानों का सहयोग लेकर वन संपदा को बचाया जाए। जिले में कहीं भी डीएफओ या अन्य अधिकारियों ने अब तक भ्रमण कर जंगलों की स्थिति को नहीं देखा है।
भागकर आया हिरण, श्वान ने बनाया शिकार
जिन क्षेत्रों के जंगलों में आग भडक़ रही है वहां पर जानवर भी अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे हैं। अतरैला के पास हिरण का एक बच्चा गांव की ओर आ रहा था तभी स्थानीय युवकों ने दौड़ाकर श्वान से हमला करवा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। सिरमौर के नजदीक जंगल से गांव की ओर जा रहे नीलगाय को स्थानीय कुत्तों ने जख्मी कर दिया, जिसकी कुछ घंटों के बाद मौत हो गई। इसी तरह गोविंदगढ़ के जंगल से भागे नीलगाय को सिलपरा के पास मृत पाया गया है। इतना ही नहीं जंगलों के नजदीक रह रहे लोगों के मकानों तक आग के पहुंचने की आशंका है, इसकी भी शिकायत विभाग के अधिकारियों से की गईहै पर कोई व्यवस्था नहीं बताई जा रही है।
लकडिय़ों की निकासी भी जारी
जंगल को केवल आग लगने भर से नुकसान नहीं हो रहा है। खुलेआम इमारती लकडिय़ां भी काटी जा रही हैं। स्थानीय लोग इस तस्करी की फोटो भी खींचकर डीएफओ एवं अन्य अधिकारियों को भेज रहे हैं लेकिन विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर हैं और अधिकारियों द्वारा कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।
सीसीएफ बोले-व्यवस्था बनाने को कहा है
वन कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के चलते वनसंपदा को नुकसान हो रहा है। सभी डीएफओ से कहा है कि वह स्थानीय स्तर पर व्यवस्था बनाएं। आग बुझाने में उस क्षेत्र के लोगों का भी सहयोग लेने के लिए कहा है।
अतुल खेरा, सीसीएफ रीवा
Published on:
28 May 2018 07:12 pm
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