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झंडा-टोपी से लेकर चाय-समोसे तक का देना होगा हिसाब

जिला निर्वाचन कार्यालय ने स्थानीय स्तर पर खर्च की दर निर्धारित की, समय पर तथ्यों के साथ खर्च की जानकारी नहीं देने पर कार्रवाई होगी

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From flag-cap to tea-samosa, account will have to be given

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रीवा. नगर निगम के चुनाव में इस बार खर्च का पूरा ब्यौरा प्रत्याशी को देना होगा। इस पर निगरानी के लिए जिला निर्वाचन कार्यालय ने टीम गठित की है। जहां से हर खर्च का रेट निर्धारित कर दिया गया है, उससे अधिक यदि खर्च होगा तो प्रत्याशी से इसका हिसाब मांगा जाएगा। सही जवाब नहीं देने की दशा में कार्रवाई भी की जाएगी। चुनाव प्रचार के दौरान चाय-पान से लेकर पोस्टर और बैनर, टोपी आदि का भी हिसाब देना होगा। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में खर्च का ब्यौरा देने का नियम कई वर्ष पहले ही प्रारंभ हो गया था लेकिन स्थानीय निकाय के चुनावों में खर्च का कोई हिसाब नहीं होने की वजह से कुछ प्रत्याशियों द्वारा बड़ी रकम खर्च की जाती थी। जिला निर्वाचन कार्यालय ने खर्च की सूची जारी की है। जिसमें वीआइपी खाने में पूरी, सब्जी, रायते के साथ मिठाई है तो वहीं आमजन के लिए सादे खाने के पैकेट भी हैं। ये प्रत्याशी के ऊपर है कहां उसे वीआइपी व्यवस्था करनी है और कहां साधारण पूरी-सब्जी के साथ अचार से काम चलाना है। कई वस्तुओं के दाम बाजार में अधिक हैं लेकिन इस खर्च में कम ही रखे गए हैं। जिससे खर्च सीमा को लेकर अधिक समस्या नहीं होगी। बाजार दर के रेट जोड़े गए होते तो अधिकांश प्रत्याशी जल्दी ही निर्धारित सीमा को पार कर जाते। खान-पान के अलावा, टेबल, कुर्सी, पलंग यहां तक की गर्मी में सभा करनी हो तो पंडाल के लिए एसी लगाने के रेट भी तय किए हैं। पार्षद पद के प्रत्याशियों के लिए रेट तय कर दिए हैं, उन्हें अपने लिमिट के अनुसार ही खर्च करना है। पहली बार पार्षद पद के प्रत्याशियों से खर्चे की जानकारी ली जाएगी।

पार्षद पद के लिए पहली बार देना होगा हिसाब
पार्षद चुनाव में पहली बार प्रत्याशियों को खर्चे का ब्योरा आयोग को देना होगा। प्रत्याशियों का कहना है कि कुछ मद में ज्यादा रेट हैं तो कुछ में कम। ऐसे में प्रति प्रत्याशी 3.75 लाख की तय लिमिट के अंदर खर्च करना बड़ी चुनौती होगी। कपड़े के झंडे का 15 रुपए, प्लास्टिक के झंडे का 12 रुपए, पंपलेट चार सौ से आठ रुपए तक, तौलिया का 50 रुपए, टोपी का 35 रुपए, फायर ब्रिगेड हवाई पट्टी के लिए दो हजार अन्य जगह के लिए 20 रुपए प्रति किलोमीटर आदि की दर निर्धारित की गई है।

खाद्य सामग्री
आलूबंडा और समोसा पांच रुपए प्रति नग, मुगौड़ी दस रुपए, पोहा-जलेबी 20 रुपए, रसगुल्ला 15 रुपए का खर्च में जुड़ेगा। चाय पांच रुपए, काफी दस रुपए, मिनरल वाटर 20 रुपए, पानी पाउच दो रुपए, भोजन प्रति थाली १५० रुपए निर्धारित किया गया है।

प्रचार वाहनों का किराया भी निर्धारित
प्रचार के दौरान जो वाहन प्रयोग किए जा रहे हैं, उनका किराया प्रतिदिन के हिसाब से तय किया गया है। बस १३ से 22 सीटर 1500 रुपए, ३२ सीटर का दो हजार, ट्रेवलर २५०० रुपए, कार १२५० रुपए दो हजार तक, मैक्सी कैब दो हजार, टाटा मैजिक 1400 रुपए, माल वाहक १२ टन से अधिक २५०० रुपए, ई-रिक्शा ५००, ऑटो आठ सौ, ट्रैक्टर १२५० रुपए तय हुआ है। अन्य कई वाहनों के भी दाम तय किए गए हंै। इन वाहनों में डीजल और पेट्रोल अलग-अलग वाहनों के हिसाब से प्रति किलोमीटर की दर से तय किए गए हैं।

रिक्शा चालक का मेहनताना प्रतिदिन 300-500
चुनाव प्रचार में इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर सहित वाहन का किराया 2500 रुपए प्रति दिन के हिसाब से प्रत्याशी के खर्च में जोड़ा जाएगा। रिक्शा चालक को प्रतिदिन 300-500 रुपए दे सकेंगे।

कुर्सी और टेंट का किराया
टेंट व कुर्सी लगाकर प्रचार करने के बाद इसके खर्च का आंकलन भी आयोग के अनुसार करना होगा। एक फाइबर कुर्सी 5 रुपए, स्टील कुर्सी 39 रुपए, सोफा दो सीटर ४50 रुपए, टेबल 20 रुपए, दरी 41 रुपए, मैटी 100 रुपए, शामियाना वाटरपू्रफ पांच रुपए प्रति वर्गफीट, हाइलोजन 150 रुपए, साउंड सेट 500 रुपए, गेट पांच हजार रुपए, कूलर 450 रुपए, गद्दा व रजाई प्रतिनग 7-7 रुपए, पानी टंकी 40 रुपए, ड्रोन कैमरा चार हजार रुपए सहित अन्य के दाम तय हुए हैं।

इतना कर सकेंगे खर्च
- नगरपालिक निगम क्षेत्र में 3 लाख 75 हजार रुपए पार्षद पद के उम्मीदवार कर सकेंगे।
- नगर परिषदों में एक लाख से अधिक जनसंख्या पर 2 लाख 50 हजार, 50 हजार से एक लाख तक की जनसंख्या पर एक लाख 50 हजार और 50 हजार से कम जनसंख्या पर पार्षदों के निर्वाचन व्यय की अधिक व्यय सीमा एक लाख रुपए होगी।
- 10 लाख से कम जनसंख्या वाले नगर निगमों में महापौर पद के अभ्यार्थियों के निर्वाचन व्यय की अधिकतम सीमा 15 लाख रुपए निर्धारित है।