
भ्रष्टाचार के आरोपियों को सरकार ने बचाया,
रीवा। जलसंसाधन विभाग के बाणसागर परियोजना में हुए भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अफसरों पर मुकदमा चलाने के लिए सरकार ने अनुमति नहीं दी है। कई वर्षों से विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध केस चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति की फाइल लंबित थी। लंबे अंतराल के बाद मंत्री परिषद ने चार अधिकारियों के बारे में कहा है कि इनके विरुद्ध विभाग ने ही जांच कराई है, इस वजह से अलग से आपराधिक प्रकरण चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
2008 में दर्ज हुआ था एफआईआर
बाणसागर परियोजना में करोड़ों रुपए की आर्थिक अनियमितता सामने आ चुकी है। जिस पर वर्ष 2008 में ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज की थी। तब से लेकर अब तक यह जांच अलग-अलग कारणों से भटकाई जाती रही है। एक मुख्य चालान के बाद सात पूरक चालान भी पेश हो चुके हैं लेकिन अधिकांश आरोपी विभाग में अभी सेवाएं दे रहे हैं, जिनके विरुद्ध चालान पेश करने से पहले सरकार की अभियोजन स्वीकृति जरूरी होती है।
चार साल तक अटका रहा मामला
विभाग में पदस्थ अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए ईओडब्ल्यू ने 2012 में ही 18 नाम सरकार के पास अभियोजन स्वीकृति के लिए भेजा था। जिसमें जलसंसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री रहे पीसी महोबिया और थोक उपभोक्ता भंडार के सीईओ दिनेश कुमार के नाम पर स्वीकृति मिल चुकी है। कुछ अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सरकार के सामने ईओडब्ल्यू ने 14 नाम रखे थे जिसमें 12 बाणसागर घोटाले के आरोपी थे। लंबे अंतराल के बाद चार नामों पर सरकार ने आपत्ति जताई है।
मंत्री परिषद ने लौटाई थी फाइल
बीते अप्रैल में भी अभियोजन स्वीकृति से जुड़े प्रकरणों की फाइल मंत्री परिषद में प्रस्तुत की गई थी। जहां पर तकनीकी कमियां बताते हुए फाइल लौटाई गई थी। दोबारा फिर प्रस्ताव गया तो यह कहते हुए अभियोजन स्वीकृति की अनुमति नहीं दी गई कि विभाग पूर्व से ही जांच करा रहा है।
इनके नामों की लौटाई फाइल
जिन चार नामों पर मंत्री परिषद ने असहमति जाहिर की है, उसमें तत्कालीन प्रभारी कार्यपालन यंत्री पुरवा नहर संभाग अनिल अग्रवाल, पुरवा नहर-2 के कार्यपालन यंत्री पीएस द्विवेदी, बीबीएस परमार एवं अपर पुरवा नहर संभाग के भीम सिंह मोहनिया का नाम शामिल है। बताया गया है कि 8 अन्य नामों को फिर मंत्री परिषद के सामने रखा जाएगा जहां से निर्णय होगा।
एक वर्ष जांच अधिकारी को चार्ज लेने में लग गए
बाणसागर घोटाले की जांच कर रहे जबलपुर के डीएसपी को ईओडब्ल्यू ने वापस बुला लिया और रीवा की महिला निरीक्षक प्रेरणा पाण्डेय को जांच सौंपी गई। करीब एक वर्ष का समय पूरा होने जा रहा है लेकिन अब तक पूरा चार्ज नहीं सौंपा जा सका है। हर फाइल के पन्नों का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है। इस अवधि में प्रकरण की जांच शून्य रही।
नियमित हो रही समीक्षा
ईओडब्ल्यू के एडीजी पंकज श्रीवास्तव का कहना है कि बाणसागर घोटाले से जुड़े 12 आरोपियों में चार के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है। शेष आठ नामों पर सरकार विचार कर रही है। पूर्व में कई चालान पेश हो चुके हैं, समीक्षा नियमित की जा रही है। जांच प्रक्रिया और तेज की जाएगी।
Published on:
21 Oct 2017 01:19 pm
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