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रीवा। गोविंदगढ़ का ऐतिहासिक किला जर्जर हालत में पहुंच चुका है। बीते कई वर्षों से सरकार इसके संरक्षण के लिए योजनाएं तो बना रही है लेकिन उसे मूर्तरूप नहीं दिया जा सका है। पीपीपी मोड पर तैयार किए गए प्रोजेक्ट पर करीब एक वर्ष से सर्वे और डीपीआर तैयार करने का कार्य चल रहा था। लगातार हो रही लेटलतीफी से अनुबंध निरस्त होने की आशंका जताई जा रही थी।
अब कंपनी ने यहां पर कार्य प्रारंभ करने की तैयारी शुरू करा दी है। तीन एजेंसियों से हेरिटेज होटल बनाने के लिए सर्वे कराया जा रहा था। नागपुर की कंपनी द्वारा तैयार डिजाइन और प्रोजेक्ट को फाइनल किया गया है। बरसात के बाद व्यापक स्तर पर कार्य प्रारंभ करने की तैयारी की जा रही है।
जयपुर की शिवा कार्पोरेशन नाम की कंपनी को पीपीपी मॉडल पर गोविंदगढ़ किले में हेरिटेज होटल बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से अनुमति दी गई है। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर राकेश सिंह नरूका ने बताया कि बरसात के बाद कार्य तेजी से प्रारंभ होगा।
रीवा राजघराने द्वारा 1840 में इस किले का निर्माण कराया गया था, जिसका उपयोग ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में किया जाता था। किले में कई राजाओं का निवास भी रहा है। कस्बे को वृंदावन की तर्ज पर विकसित किया गया था। बड़ी संख्या में मंदिर यहां पर बनाए गए थे, जिनमें अष्टधातु, सोने, चांदी, पत्थरों आदि की मूर्तियां भी रखी गई। इनकी अपनी अलग विशेषताएं रही हैं, लेकिन कुछ समय से चोरों की नजर मूॢतयों पर लगी है।
गुड़-मेथी और बेल के मसाले का उपयोग
किले की दीवाल में सीमेंट का उपयोग नहीं किया गया था, इसलिए सरकार ने कंपनी से शर्त रखी है कि जिन मसालों का उपयोग हुआ था उन्हीं से किले का नवीनीकरण कराया जाए। इसलिए गुड़, मेथी, बेल, उड़द की दाल, गोद सहित अन्य सामग्री का उपयोग किया जाएगा। बाहर से किले का पुराना स्वरूप ही दिखेगा, भीतर कंपनी हेरिटेज होटल के लिए डिलक्स कमरे बनाएगी। जिसमें साज-सज्जा राजशाही के समय की ही दिखेगी। शासन ने तीन साल में कार्य पूरा करने की शर्त रखी है लेकिन करीब एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। किला लगातार खंडहर होता जा रहा है, कई जगह दीवाल एवं छत गिरने लगी है। बचे समय पर कार्य पूरा करना भी कंपनी के लिए चुनौती होगी। १०० करोड़ रुपए खर्च कर हेरिटेज होटल विकसित किया जाएगा।
- खजुराहो-बांधवगढ़ कॉरीडोर को जोड़ेगा
गोविंदगढ़ का किला स्थानीय जरूरत को नहीं बल्कि विदेशी पर्यटकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए विकसित कराया जा रहा है। खजुराहो और बांधवगढ़ के बीच ठहरने के लिए कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है, इसलिए इसे विकसित किया जा रहा है। ह्वाइट टाइगर सफारी महज पांच किलोमीटर की दूरी पर है। इसलिए वहां आने वाले पर्यटकों के ठहरने का बेहतर इंतजाम हो सकेगा। सफारी में विदेशी पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो गई है। खजुराहो-बनारस या फिर प्रयागराज के मध्य भी यह प्रमुख सेंटर के रूप में विकसित होगा।
- एक अनुबंध पहले निरस्त हो चुका है
गोविंदगढ़ किले को पहले पुरातत्व विभाग ने विकसित करने की योजना बनाई थी लेकिन वह सफल नहीं हो सका। इसके बाद पर्यटन विभाग को सौंपा गया। वर्ष 2010 में मेसर्स मैगपाई रिसार्ट प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी को सौंपा गया था। शर्त थी कि तीन साल के भीतर कार्य पूरा होगा लेकिन कंपनी ने पांच साल तक कार्य नहीं किया, जिससे किला जर्जर होता गया। पांच साल के बाद समीक्षा कर इसका अनुबंध निरस्त कर दिया गया। साथ ही 1.72 करोड़ रुपए कंपनी की ओर से अमानत राशि जमा की गई थी, उसे भी जब्त कर लिया गया। उक्त कंपनी को 99 वर्ष की लीज दी गई थी, जिसे हर महीने महज 2200 रुपए किराया चुकाना था।
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गोविंदगढ़ किले को संरक्षित करने के लिए पीपीपी मोड पर हेरिटेज होटल बनाने के लिए दिया गया है। कंपनी के कर्मचारी पहुंच चुके हैं और प्रोजेक्ट भी तैयार हो गया है। अब कार्य भी प्रारंभ हो रहा है। शासन की निर्धारित शर्तों के अनुसार ही कंपनी को काम कराना होगा।
धर्मेन्द्र सिंह परिहार, कार्यपालन यंत्री पर्यटन विभाग
Published on:
01 Aug 2019 08:59 pm
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