
holi festival
रीवा. खुशी और हर्षोल्लास के पर्व होली की तैयारियां जोरों पर हैं। हालांकि बढ़ती महंगाई का असर होली पर भी दिख रहा है। पिचकारी और रंग-गुलाल काफी महंगा हो गया। चीनी पिचकारियों पर भी बॉलीवुड का तड़का देखने को मिल रहा है। होली का पर्व प्रेम और खुशी का प्रतीक है इसको समाज व मन में फैली गंदगी को साफ करने के तौर पर मनाया जाना चाहिए। रंगों का त्यौहार होली बसंत के आगमन की खुशी में भी मनाया जाता है। लेकिन इस खुशी के त्यौहार में कैमिकलयुक्त रंग होली की खुशी में जहर घोल रहे हैं।
कैमिकल हो सकते हैं घातक
आजकल होली के रंगों में ऐसे कैमिकलों का इस्तेमाल होने लगा है जिससे शरीर को नुकसान होता है। पहले फूलों से रंग बनाए जाते थे। ये रंग त्वचा के लिए नुकसानदेय नहीं होते थे। इनमें खुशबू भी होती थी। लेकिन लगातार कट रहे पेड़ों व फूलों की कमी के चलते अब इनकी जगह कैमिकलयुक्त रंगों ने ले ली है। रंगों में विभिन्न तरह के कैमिकल के प्रयोग से अस्थमा, सांस की बीमारी, त्वचा संबंधी रोग, हड्डियों में रोग व बुखार हो सकता है। वहीं मिट्टी व पानी के साथ मिलकर यह कैमिकलयुक्त रंग ज्यादा जहरीले हो जाते हैं। यदि आप होली का त्यौहार खुशी के साथ मनाना चाहते हैं और किसी परेशानी से बचना चाहिते हैं तो कुछ बातों को लेकर सावधानी बरतें।
इन बातों का रखें ख्याल
- होली खेलने में कैमिलयुक्त रंगों का प्रयोग न करें।
- रंग छुड़ाने के लिए कठोर साबुन का प्रयोग न करें। साबुन में रूखापन बढ़ता है।
- अकेले होली खेलने न निकलें, केवल परिचित व रिश्तेदारों के साथ होली खेलें।
- भांग न पीएं, अनजान से कोई खाद्य पदार्थ न लें और भीड़ में शामिल न हों।
- आवारागर्दी का सामना होने पर तुरन्त पुलिस हेल्पलाइन की मदद लें।
- होली खेलने के दौरान महंगे जेवरात न पहनें।
- अपने बच्चों के लिए बड़ी बॉल्टी में पानी भरकर रखें ताकि बच्चे गटर के पानी का इस्तेमाल न करें।
- बाहरी मिठाइयां खरीदने के बजाय घर पर ही बनाएं, क्यों कि बाजार की मिठाई आप को बीमार भी कर सकती है।
Published on:
26 Feb 2018 09:14 pm
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