
Industrialists say, students are not eligible for employment
रीवा। उद्योगों की आवश्यकता के मद्देनजर विश्वविद्यालय छात्रों को तैयार नहीं कर पा रहे हैं। उद्योगों ने खुद इसकी कमान संभाल ली है। वर्तमान में औद्योगिक क्षेत्रों में खोले जा रहे प्रशिक्षण संस्थान इस बात का जीता जागता उदाहरण है। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन इस बात को न केवल शिक्षाविदों ने बल्कि उद्योगपतियों ने भी स्वीकार किया।
प्रयास जारी, लेकिन अभी अपर्याप्त
अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुक्त विश्वविद्यालय उत्तराखंड के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव ने कहा कि छात्रों को उद्योगों की आवश्यकता के मद्देनजर तैयार करने के लिए उनमें नॉलेज, स्किल व वैल्यू तीनों सामंजस्य के एक साथ विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रयास तो जारी हैं। लेकिन प्रक्रिया अव्यवस्थित हैं। नॉलेज विश्वविद्यालयों से प्राप्त हो रही है। स्किल उद्योगों में और वैल्यू कार्य के दौरान विकसित हो रहा है। जिससे छात्र को पूरी तरह से योग्य बनने में पूरा समय लग जाता है। उन्होंने कहा कि यह तीनों कार्य विश्वविद्यालय में होने चाहिए। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. केएन सिंह यादव ने कहा कि इस तरह के सम्मेलन उद्योगपतियों और शिक्षाविदों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसलिए ऐसे आयोजन समय-समय पर होते रहने चाहिए।
शिक्षाविद् के साथ उपस्थित रहे उद्योगपति
तीन विश्वविद्यालय के पं. शंभूनाथ शुक्ल सभा में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षाविद के रूप में उपस्थित रहे काशी विद्यापीठ वाराणसी के प्रो. एमबी शुक्ल व आईआईएम इंदौर केे प्रो. पीके सिंह व रिलायंस इंडस्ट्रीज मुंबई के जीएम सुनील पांडेय व बद्रिका प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन सुनील सिंह ने भी अपने विचार रखा। सम्मेलन के संयोजक व एमबीए विभाग के हेड प्रो. अतुल पांडेय ने कार्यक्रम का संचालन किया। विषय प्रवर्तन एमबीए एचआरडी के हेड प्रो. सुनील तिवारी व आभार प्रदर्शन पर्यटन अध्ययन केंद्र के हेड प्रो. एमसी श्रीवास्तव ने किया।
‘विवि व उद्योग बेहिचक एक दूसरे आए साथ’
आईआईएम इंदौर के प्रो. पीके सिंह ने अपने विशेष उद्बोधन में कहा कि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि विश्वविद्यालय व उद्योग साथ नहीं होंगे तो खामियाजा दोनों को भुगतना पड़ेगा। बेहतर होगा कि बेहिचक दोनों ही एक दूसरे का साथ दें। इससे विश्वविद्यालयों में उद्योगों की आवश्यकता के मद्देनजर छात्रों को तैयार किया जाएगा। प्रो. सिंह ने छात्रों से कहा कि उन्हें लगातार सीखते रहने की जरूरत है। यही समय और उद्योगों की मांग है। कौशल से जीविका मिलती है और सामाजिक प्रतिष्ठा भी। इसलिए इसे बनाए रखने और विकसित करने के लिए प्रयास जारी रहने चाहिए।
‘आयोजनों का क्रम जारी रहना चाहिए’
काशी विद्यापीठ वाराणसी के प्रबंधन विभाग के प्रो. एमबी शुक्ल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में उद्योगपतियों व शिक्षाविदों के बीच चर्चा के लिए इस तरह के आयोजन होते रहने चाहिए। क्योंकि दोनों के बीच परिचर्चा से ही यह बात स्पष्ट होगी कि उद्योगों को क्या चाहिए और विश्वविद्यालय छात्रों को किस तरह तैयार करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच समन्यवक का अभाव है। यही वजह है कि विश्वविद्यालयों में अभी तक यह बात नहीं समझी जा सकी है कि छात्रों के पाठ्यक्रमों में क्या शामिल होना चाहिए और क्या नहीं।
‘लायक बनाने समय और पैसा दोनो हो रहा बर्बाद’
औद्योगिक क्षेत्र में छात्रों के चयन के बाद उन्हें प्रशिक्षित कर लायक बनाने में पैसा व समय दोनों ही बर्बाद हो रहा है। बद्रिका ग्रुप के चेयरमैन सुनील ने ने कहा कि विश्वविद्यालयों का कार्य उद्योग कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर कई कंपनियों ने प्रशिक्षण संस्थान भी शुरू कर रखा है। उन्होंने कहा कि यह न ही उद्योगों के लिए उचित है और न ही विश्वविद्यालयों के लिए।
‘व्यक्तिगत जीवन में भी छात्रों का किया सहयोग’
रिलायंस इंडस्ट्री के सीनियर जीएम सुनील पांडेय ने कहा कि उद्योग व विश्वविद्यालयों के बीच हर तरह का समन्वय जरूरी है। उद्योग के अधिकारी भी विश्वविद्यालयों से उद्योग तक पहुंचने वाले छात्रों का सहयोग करें तो छात्र और कुशल हो सकते हैं। उन्होंने व्यक्तिगत अनुभवों को शेयर करते हुए कहा कि कई छात्रों का उन्होंने सहयोग किया। आज वह अच्छे पोस्ट पर हैं।
Published on:
26 Feb 2018 12:20 pm
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