
it is important for saints throughout the country to marry Sita ram
रीवा। मिथिलाबिहारी कुंज खजुहा में सोमवार को सीताराम विवाहोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस मौके पर धूमधाम से गाजे-बाजे के साथ रथ में सवार देवगणों के बीच भगवान राम की बारात निकलेगी। तत्पपश्चात वैदिक रीति रिवाज से द्वारचार, भामरी पैपखरी एवं कोहरवार लीला के साथ रात 12 बजे विवाह संपन्न होगा।
रीवा जिले के गुढ़ विधानसभा अंतर्गत आने वाले खजुहा धाम में सीताराम विवाहोत्सव का आनंद लेने मुंबई दिल्ली इलाहाबाद, भोपाल, कटनी सिंगरौली, टीकमगढ, छतरपुर सहित विभिन्न स्थानों से गुरू भाई एवं साधू महात्मा पहुंचने का सिलसिला जारी है।
खजुहा धाम में विवाहोत्सव की तैयारी कई दिनों से चल रही है। यहां हर दिन कार्यक्रम हो रहे हैं। तीसरे दिवस धनुषयज्ञ लीला संपन्न हुई। सुबह 9 बजे गुरूदेव भगवान का वेदमंत्रों के साथ पंचोपचार पूजन, अभिषेक विद्वान आचार्यों द्वारा कराया गया। दोपहर 12 बजे की झांकी दर्शन में मानस मर्मज्ञ अयोध्या से संत अवधकिशोर दास महराज पधारे। यह आयोजन जगदगुरू रामानन्दाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य महाराज मैथिल पीठाधीश्वर अयोध्याधाम के सानिध्य में संपन्न हो रहा है। खजुहा धाम में सोमवार 20 फरवरी को रात 7 बजे राम बारात निकलेगी। बारात में गाजे-बाजे, हाथी, घोड़े शामिल होंगे। रथों पर राजा दशरथ, गुरू वशिष्ट व विश्वामित्र, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघन सवार रहेंगे।
विवाह लीला की दिखाई झलक
संत अवधकिशोर दास महराज ने विवाह शब्द की विस्तृत व्याख्या करते हुए विवाह लीला की झलक दिखाई। मिथिला के नगर दर्शन एवं फु लवारी की लीला में तो सखियों के बीच जनक नन्दिनी सीता बाग में भगवान राम को देखने से ही संकल्प पूरा हुआ। गिरिजापूजन में माता ने तो स्वयं राम के समान वर मिलने का पूर्ण आर्शीवाद दिया।
इनकी रहेगी विशेष मौजूदगी
इस आयोजन में मुख्य रूप से तुलसीदास महाराज महंत शाहनगर, उधौदास महाराज महंत रामहर्षण कुंज पीटीएस चौराहा रीवा, रामजियावनदास, लक्ष्मणदास महाराज अयोध्या, डॉ. अभिलाष त्रिपाठी, डॉ. चक्रपाणि , हरिगोविंददास दुबे, रामहित द्विवेदी, डॉ. मिथिलाबिहारी दास महाराज, परमानन्द त्रिपाठी, राघवेन्द्र त्रिपाठी, रमाकांत शुक्ला कनौजा, रमेश शुक्ल निपनिया, शिवभाई बाम्बे कटनी से तिवारी,डॉ. अंजनी त्रिपाठी, धर्मेन्द्र तिवारी बब्बुल सहित हजारों लोग मौजूद रहेंगे
इन्होंने की थी शुरुआत
खजुहा धाम स्वामी रामहर्षण महाराज की तपोस्थली है। उन्होंने यहां रहकर तपस्या की। करीब 12 करोड़ राम मंत्रों का जाप अपने जीवन में किया। उन्होंने ही सीता राम विवाह आरंभ किया था। फाल्गुन माह की शुक्ल पंचमी को यह विवाह संपन्न होता है।
Published on:
20 Feb 2018 12:33 pm
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