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आर्थिक मदद को आगे नहीं बढ़े हाथ, टूट रहा जैन शोध केंद्र का सपना

उद्देश्य रह गया अधूरा....
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रीवा

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Ajit Shukla

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Updated: 28 Sep 2018, 12:02 PM IST

Jain research center in bad stituation Rewa APSU, govt not help

Jain research center in bad stituation Rewa APSU, govt not help

रीवा। जैन धर्म से जुड़ी संस्कृति, मान्यता, परंपरा व पूर्व में क्षेत्र से जुड़ाव सहित कई अन्य बिन्दुओं पर शोध और अध्ययन के बावत अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में जैन शोध केंद्र की स्थापना तो कर दी गई, लेकिन केंद्र को विस्तार दे पाना संभव नहीं हो रहा है। आर्थिक अभाव केंद्र को विस्तार देने में आड़े आ रहा है।

समाज के लोगों से मिले मदद तो पूरा हो उद्देश्य
विश्वविद्यालय में केंद्र की स्थापना का निर्णय लेने के साथ ही इस उम्मीद में भवन के लिए भूमि उपलब्ध करा दिया गया कि समाज के लोगों से आर्थिक मदद मिलेगी तो उद्देश्य पूरा हो जाएगा, लेकिन अभी तक चंद लोगों को छोड़ दिया जाए तो केंद्र विस्तार में सहयोग देने के लिए जैन समाज ने रुचि नहीं दिखाया है। नतीजा केंद्र के संरचनात्मक विकास में केवल सामने की बाउंड्रीवाल बना पाना मुमकिन हो सका है। जबकि केंद्र में अध्ययन को लेकर कई छात्र-छात्राओं ने रुचि दिखाई है।

इतिहास विभाग से दो छात्रों ने पूरी कर ली पीएचडी
केंद्र को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की योजना न केवल जैन संस्कृति सहित अन्य बिन्दुओं पर शोध कराने की है बल्कि पाठ्यक्रम भी संचालित किया जाना है। केंद्र के प्रोफेसर इन इंचार्ज प्रो. महेश चंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक इतिहास विभाग के जरिए अब तक जैन धर्म विषय पर दो छात्रों को शोध कराया जा चुका है। एमफिल में भी कई प्रवेश हुए हैं। योजना सफल रही तो केंद्र की ओर से डिग्री व डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी संचालित किया जाएगा।

समाज से मदद में आए केवल तीन लाख रुपए
विश्वविद्यालय को केंद्र के संचालन में आर्थिक मदद के रूप में जैन समाज के लोगों की ओर से अब तक केवल तीन लाख रुपए मिले हैं। इसके अलावा न ही शासन की ओर से कोई रुचि दिखाई गई है और न ही समाज के दूसरे सदस्यों की ओर से हाथ आगे बढ़ाया गया है। यह बात और है कि रीवा व सतना के कई लोगों ने केंद्र के संरचनात्मक व अकादमिक विस्तार के लिए आर्थिक मदद करने की इच्छा जताई है।

शोध केंद्र स्थापित करने का उद्देश्य
- पीएचडी पाठ्यक्रम के जरिए जैन धर्म पर होगा शोधकार्य
- डिप्लोमा व सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम किए जाएंगे संचालित
- समाज में जैन धर्म की मान्यता व परंपराओं पर अध्ययन
- जैन धर्म व सभ्यता का पूर्व में क्षेत्र से संबंध की खोज