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रीवा। शहर के मध्य सिरमौर चौराहे के नजदीक बनाए गए कृष्ण राजकपूर आडिटोरियम से जुड़ा विवाद समाप्त नहीं हो रहा है। पूर्व में की गई एक शिकायत के आधार पर कमिश्नर कार्यालय ने कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी है। शिकायत में आरोप था कि कलेक्टर ने आडिटोरियम के रखरखाव के लिए आउट सोर्सिंग की व्यवस्था को स्थगित करने का आदेश दिया था लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता बीके माला ने इसकी शिकायत संभागायुक्त से की थी। जिस पर उन्होंने कहा था कि 26 सितंबर 2018 को रीवा कलेक्टर ने संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजा था, जिसमें अनुरोध किया गया था कि आडिटोरियम का रखरखाव संस्कृति विभाग की देखरेख में हो। साथ ही नगर निगम आयुक्त को भी इसी पत्र की प्रतिलिपि भेजते हुए निर्देशित किया गया था कि आडिटोरियम के रखरखाव की व्यवस्था फिलहाल स्थिगित रखी जाए। करीब नौ महीने से अधिक का समय बीतने जा रहा है लेकिन अब तक इस पत्र पर कार्रवाई नहीं हुई है।
अब तक न तो संस्कृति विभाग ने इसे अपने अधीन लिया है और न ही आउट सोर्स से रखरखाव की व्यवस्था स्थगित हुई है। इस शिकायत का हवाला देते हुए कलेक्टर से पूरे मामले में रिपोर्ट मांगी गई है। इस आडिटोरियम को लेकर शुरू से ही विवाद रहा है, आरोप लगते रहे हैं कि सत्ता का संरक्षण मिल रहा है लेकिन अब प्रदेश की सरकार बदली है तो कुछ लोगों के लिए इसके मायने भी बदल गए हैं और विरोध नहीं हो रहा। अब भाजपाई सवाल पूछ रहे हैं कि जांच की मांग करने वाले अब क्यों खामोश हैं।
- बारात घर के रूप में हो गया तब्दील
शो मैन राजकपूर और कृष्णा के वैवाहिक जीवन की स्मृतियों को सहेजने के लिए कृष्णा राजकपूर आडिटोरियम बनाया गया है। जहां पर दोनों की शादी हुई थी, उसी स्थान पर आधुनिक आडिटोरियम बनाया गया है। पुनर्घनत्वीकरण योजना के तहत बनाए गए इस आडिटोरियम का रखरखाव समदडिय़ा ग्रुप को दिया गया है। दावा किया गया था कि इसे कलाकेन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा लेकिन अब बारातघर के रूप में संचालन हो रहा है। आए दिन वैवाहिक आयोजनों से जुड़े कार्यक्रम यहां पर हो रहे हैं। इस मामले में जिम्मेदार भी कोई ठोस जवाब नहीं दे पाते हैं, वह मामले को टरकाने का प्रयास करते हैं।
Published on:
25 Jun 2019 11:27 am
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