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देश के इन नेताओं पर लगा वोट की राजनीति करने का आरोप, देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए उन्हें बताया गया बड़ा खतरा

एपीएस में कार्यक्रम...

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रीवा

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Ajit Shukla

Sep 18, 2018

Kushabhau lecture in Rewa APSU, BJP leader comment on Political Party

Kushabhau lecture in Rewa APSU, BJP leader comment on Political Party

रीवा। जब नेतृत्वकर्ता की नीति व नीयत ठीक रहती है तो देश की बाह्य सुरक्षा को कोई खतरा नहीं होता है। जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व संभाला है। देश को किसी तरह का बाह्य खतरा नहीं है। वर्तमान में सबसे बड़ा खतरा देश की आंतरिक सुरक्षा को है। उक्त विचार भाजपा के विधायक व पूर्व मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने व्यक्त किया। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित कुशाभाऊ ठाकरे स्मृति भाषणमाला में विजयवर्गीय बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित रहे।

बोले, वोट राजनीति करने वाले देश के लिए खतरा
पं. शंभूनाथ शुक्ल सभागार में आयोजित ‘आंतरिक और बाह्य सुरक्षा की चुनौतियां’ विषयक भाषणमाला में मुख्य वक्ता ने बिना किसी पार्टी का नाम लिए कहा कि वोट की राजनीति करने वालों से देश की आंतरिक सुरक्षा को सबसे बड़ा खतरा है। क्योंकि वोट के लिए देश की सुरक्षा को ताक पर रखते हुए यह लोग अफजल जैसे आतंकवादी के समर्थकों के साथ खड़े हो जाते हैं। कहा कि पूर्व में देश को सही नीति और नीयत वाला नेतृत्वकर्ता नहीं मिला। शायद इसी का परिणाम है कि आज भी कश्मीर का मसला ढोया जा रहा है। इसका खामियाजा यह है कि देश की स्वतंत्रता में जितने लोग शहीद हुए अब उतने सैनिक कश्मीर को लेकर शहीद हो रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री सहित कई दिग्गज रहे उपस्थित
भाषणमाला में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, विशिष्ट अतिथि उद्योग मंत्री राजेंद्र शुक्ला, सांसद जनार्दन मिश्रा ने भी विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। कुलपति प्रो. केएन यादव की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में सीधी से राज्यसभा सांसद अजय प्रताप सिंह भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस मौके पर सामाजिक व राजनैतिक विचारक भगवत शरण माथुर ने विषय प्रवर्तन किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. दिनेश कुशवाहा ने किया। कुलसचिव डॉ. बृजेश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

‘चुनाव की विकृति से चिंतित रहे कुशाभाऊ’
केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अपने संबोधन में कहा कि सच्ची राजनीति के लिए जनप्रतिनिधियों को स्व. कुशाभाऊ ठाकरे के विचारों का अनुसरण करना होगा। उन्होंने कहा कि स्व. ठाकरे अच्छे प्रतिनिधि के चुने जाने के लिए होने वाले चुनाव के पक्षधर तो रहे, लेकिन वह इस बात को लेकर परेशान रहते रहे कि चुनाव विकृत रूप न ले ले। उनकी चिंता जायज रही है। चुनाव के जरिए योग्य प्रतिनिधि चुनने के बजाए जाति, धर्म व संप्रदाय के आधार पर लोग चुने जाने लगे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि युवा पीढ़ी को स्व. ठाकरे के विचारों से अवगत कराना जरूरी है। ताकि वह उनका अनुसरण कर सकें। इसके लिए इस तरह के भाषणमाला का आयोजन जरूरी हो गया है।

‘खतरे में है देश की आंतरिक सुरक्षा’
भाषणमाला का विषय प्रवर्तन करते हुए भगवत शरण माथुर ने कहा कि देश में लोगों के बीच जिस तरह तेजी के साथ जाति, वर्ग व संप्रदाय का संघर्ष बढ़ रहा है, उससे यह जाहिर है कि देश को आंतरिक सुरक्षा से सबसे बड़ा खतरा है। नक्सलवाद व आतंकवाद जैसे बाह्य खतरों का सामना तो किया जा सकता है, लेकिन आंतरिक सुरक्षा में बना जाति, वर्ग व संप्रदाय का खतरा टालना आसान नहीं है। क्योंकि लोगों में नैतिकता व सात्विकता का लोप हो रहा है। सामाजिक विचारक माथुर ने कहा कि ऐसे में कुशाभाऊ ठाकरे जैसे लोगों पर आधारित कार्यक्रम ही लोगों में चेतना का संचार कर सकता है।

‘वर्तमान में स्व. ठाकरे का अनुसरण जरूरी’
उद्योग मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि देश की सुरक्षा में सेंध हमेशा से कमजोर नेतृत्व का परिणाम रहा है। वर्तमान में देश को सही नेतृत्व मिल रहा है। इसलिए देश बाहरी बुरी ताकतों से टक्कर लेने की स्थिति में है। उद्योग मंत्री ने स्व. ठाकरे के जीवनवृत्त पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके विचारों का अनुसरण किया जाना चाहिए। खासतौर पर युवाओं के लिए यह जरूरी है।

‘देश की सुरक्षा के लिए संगठित होने की जरूरत’
सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए एकजुट होने की जरूरत है, लेकिन यहां स्थिति अलग है। पूर्व में भोग की ललसा को नजरअंदाज कर आज अच्छे कार्यों पर भी उंगली उठाई जाती है। वोट के लिए किसी भी स्थिति में देश की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यह सभी पार्टियों को ध्यान में रखना चाहिए।

कुलपति ने गिनाई विश्वविद्यालय की समस्या
अपने स्वागत उद्बोधन में कुलपति प्रो. केएन सिंह यादव ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का बखान करते हुए अतिथियों के समक्ष समस्याएं भी रखीं। शासन से मिलने वाले अल्प अनुदान के साथ कुलपति प्रस्तावित 1000 की क्षमता वाले नए सभागार की जरूरत का भी जिक्र किया। भाषणामाला के दौरान कुशाभाऊ ठाकरे की स्मृति पर आधारित पुस्तक श्रद्धेय, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेयी पर आधारित पुस्तक श्रद्धांजलि व भाषणामाला के सिंहावलोकन पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. एसएस अग्रवाल ने स्व. ठाकरे का संक्षिप्त जीवन परिचय प्रस्तुत किया।