
Laxman bag mandir rewa hindu temple historical heritage
रीवा. विंध्य के लोगों की आस्था का प्रमुख केन्द्र एवं रीवा की ऐतिहासिक धरोहर लक्ष्मण बाग मंदिर इन दिनों अपनी दुर्दशा के लिए आंसू बहा रहा है। समय के साथ इस धार्मिक स्थल पर लोगों की आस्था तो बढ़ती गई लेकिन इस ऐतिहासिक धरोहर की सुंदरता एवं व्यवस्थित धार्मिक स्थल की पहचान धूमिल पड़ती गई।
भवन का हिस्सा जर्जर होकर धीरे - धीरे गिरता जा रहा है। मंदिर का बाहरी हिस्सा अत्यंत जीर्ण-शीर्ण हो गया है। साफ - सफाई भी नियमित नहीं हो रही है। जिसकी वजह से लोगों को आकर्षित नहीं कर पा रहा है।
मंदिर का अंदर का हिस्सा अभी भी बेहद आकर्षक है।
यहां रहने वाले संत यह चाहते हैं कि लक्ष्मण बाग को व्यवस्थित कराया जाए। परिसर को बचाया जाए लेकिन प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। बताते हैं कि रीवा राजघराने के महाराजा रघुराज सिंह ने मंदिर परिसर की स्थापना की थी।
लक्ष्मण बाग मंदिर के कई हिस्से धीरे - धीरे गिरते जा रहे हैं। बड़ा परिसर अब संकीर्ण होता जा रहा है। भवन का कई हिस्सा गिर चुका है और अब भी गिर रहा है। पिछले दिनों ही प्रवेश द्वार की दीवार गिर गई। उसे भी नजर अंदाज किया जा रहा है। करीब एक हफ्ते का समय हो गया, उसे न तो मरम्मत कराया गया और नहीं मलवा हटाया गया।
अभी भी मलवा वहीं पर पड़ा हुआ है। इसी प्रकार आएदिन भवन का जो हिस्सा गिर जाता है उसे नजर अंदाज कर दिया जाता है। मरम्मत या सुधार करने में ध्यान नहीं दिया जाता।
मंदिर परिसर शाम होते ही अंधेरे के साए में गुम हो जाता है। ऐसा नहीं है कि यहां बिजली नहीं पहुंची है लेकिन पूरे मंदिर परिसर की बजाए कमरों में ही प्रकाश किया गया है। बाहर का परिसर अंधेरे में रहता है। वहीं यहां जाने वाला मार्ग भी अंधेरे के साए में ही है।
बिछिया पुल से अंदर करीब डेढ़ किमी. के मार्ग में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था करना नगर निगम ने जरूरी नहीं समझा। जिससे पूरी रास्ते में घुप अंधेरा रहता है। जहां शाम ढलते ही अपराधी सक्रीय हो जाते हैं।
Published on:
03 Oct 2018 11:04 pm
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