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रीवा में तिवारी परिवार को सातवीं बार लोकसभा चुनाव में टिकट, जानिए आखिर किस वजह से महत्वपूर्ण है यह परिवार

- समर्थकों में उत्साह, बड़े मत के अंतर से चुनाव जीतने का किया दावा

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रीवा

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Mrigendra Singh

Apr 05, 2019

rewa

Loksabha election 2019, Congress candidate tiwari family

- समर्थकों में उत्साह, बड़े मत के अंतर से चुनाव जीतने का किया दावा
। रीवा की राजनीति में दो परिवार ही ऐसे रहे हैं जिन्हें लंबे समय तक संगठन और जनता ने अवसर दिया है। रीवा किला के बाद श्रीनिवास तिवारी का ही परिवार ऐसा रहा है जिसे कई बार चुनाव लडऩे का अवसर मिला है और जनता ने जीत भी दिलाई है।
लोकसभा चुनाव में यह सातवां अवसर होगा जब तिवारी परिवार को टिकट दी गई है। इसके पहले 1991 में श्रीनिवास तिवारी स्वयं मैदान में थे तो इसके बाद 1996 से 2014 तक जितने भी लोकसभा चुनाव हुए उसमें 1998 को छोड़कर सबमें कांग्रेस की ओर से सुंदरलाल तिवारी प्रत्याशी रहे। इसके अलावा तीन दशक से इसी परिवार पर कांग्रेस का भरोसा रहा है। अब 2019 के चुनाव में तीसरी पीढ़ी के सिद्धार्थ तिवारी को अवसर मिला है। 1999 के चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर सुंदरलाल तिवारी को जीत भी मिली थी। विधानसभा का चुनाव तो परिवार के अन्य सदस्य भी कई बार लड़ चुके हैं। इस परिवार के अलावा रीवा किला ही ऐसा रहा है जहां की तीन पीढिय़ां लगातार राजनीति में सक्रिय रही हैं।

दादा और पिता के पदचिन्हों पर चलेंगे सिद्धार्थ
कांग्रेस पार्टी से लोकसभा के लिए प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद सिद्धार्थ तिवारी ने दादा श्रीनिवास और पिता सुंदरलाल तिवारी के छायाचित्रों पर माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिया। सिद्धार्थ ने कहा कि जनता की सेवा जिस तरह से परिवार की दो पीढिय़ों ने किया है, उसे आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

समर्थकों की लगी भीड़
बीत कुछ समय से अमहिया में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का पहले की तरह जमघट नहीं लग रहा था। बड़े नेताओं के निधन के बाद मायूषी का वातावरण था। टिकट की घोषणा होते ही यहां की रौनकता बढ़ गई। कार्यकर्ताओं ने जिंदाबाद के नारे लगाए और दावा किया है कि युवा चेहरा उनका नेतृत्व करेगा और बड़े अंतर से जीत दर्ज करेंगे।
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- सिद्धार्थ तिवारी कांग्रेस प्रत्याशी से पत्रिका की विशेष बातचीत
रीवा से कांग्रेस ने सिद्धार्थ तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उनका नाम घोषित किया है। प्रत्याशी बनाए जाने के बावजूद सिद्धार्थ मन से प्रसन्न नहीं हैं। इसके पीछे की वजह उन्होंने स्वयं ही बताया है। कहा है कि यह पहला अवसर है जब दादा श्रीनिवास तिवारी और पिता सुंदरलाल तिवारी की गैर मौजूदगी में जनता के बीच जाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए असमंजस का दौर है, टिकट पाने के बावजूद प्रसन्नता का भाव मन में उत्पन्न नहीं हो पा रहा है। इससे उबरने के लिए भी उन्होंने अपनी तैयारियों पर चर्चा की। पेश है सिद्धार्थ के साथ पत्रिका की बातचीत के प्रमुख अंश---
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सवाल- टिकट आपको ही मिलेगी, इसे लेकर कितना आश्वस्त थे।
जवाब- कांग्रेस पार्टी में हर कार्यकर्ता को महत्व मिलता है,जितना हर कार्यकर्ता टिकट के लिए आश्वस्त था उतना ही मैं भी था।
सवाल- पहला चुनाव लडऩे जा रहे हैं, किस तरह की चुनौती मानते हैं।
जवाब- चुनाव पहला है या दूसरा, यह महत्वपूर्ण नहीं है। चुनौती यह है कि इतने कम समय में लोगों के बीच कैसे आशीर्वाद लेने पहुंचा जाए। जनता का साथ मिलने की पूरी उम्मीद है, हर चुनौती को पार करेंगे।


सवाल- टिकट के बाद नेताओं के असंतोष का सामना कैसे करेंगे।
जवाब- कांग्रेस पार्टी में हर कार्यकर्ता को उम्मीद होती है कि उसे भी अवसर मिले लेकिन जब एक नाम तय होता तो पार्टी के सिद्धांत पर काम होता है। हम सबका लक्ष्य केन्द्र में सरकार बनाने का है। सबको साथ लेकर चलेंगे, असंतोष का कोई सवाल नहीं।


सवाल- दादा और पिता की गैर मौजूदगी में कैसे संभालेंगे चुनाव की कमान।
जवाब- मुझे लोग बधाई दे रहे हैं तो समझ नहीं पा रहा हूं कि हर्षित हूं या फिर दु:खी हूं। जीवन में बड़े असमंजस के दौर से गुजर रहा हंू। दादा और पिता जब भी असमंजस और परेशानी में होते थे तो जनता के दरबार में जाते थे। उन्हीं से समाधान मांगते थे। जनता का आशीर्वाद प्राप्त करने की यात्रा होगा यह चुनाव।

सवाल- किन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएंगे।
जवाब- चुनाव का मुद्दा रीवा रहेगा, मध्यप्रदेश रहेगा, कमलनाथ का चेहरा और राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने का लक्ष्य होगा।